scorecardresearch
 

अंत्येष्टि‍ स्थल बन जाते तो गंगा में न तैरती लाशें

मुख्यमंत्री योगी ने 27 जनवरी, 2020 को बिजनौर से गंगा यात्रा की शुरुआत करने के साथ गंगा के किनारे बसे गावों में शवदाह गृह निर्माण की योजनाओं को हरी झंडी दिखाई थी. लेकिन पिछले 15 महीनों के दौरान निर्धारित लक्ष्य के 20 फीसद गांवों में भी अंत्येष्टि‍ स्थल बनकर तैयार नहीं हो पाए हैं.

X
यूपी में उन्नाव जिले में गंगा के किनारे दफनाए गए शव (पीटीआइ) यूपी में उन्नाव जिले में गंगा के किनारे दफनाए गए शव (पीटीआइ)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पिछले सात साल से पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थल बनाने की योजना समय समय पर तैयार होती रही है जो सरकारी भ्रष्टाचार का शि‍कार हुई हैं
  • वर्ष 2014 में पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थल का निर्माण करने के लिए 100 करोड़ रुपए बजट का प्रावधान किया गया था
  • पंचायती राज विभाग ने गरीब कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार के लिए पांच हजार रुपए का प्रावधान किया है

चार साल पहले 19 मार्च, 2017 को मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने सरकारी विभागों का प्रजेंटेशन देखकर समीक्षा शुरू की थी. इसी क्रम में 19 अप्रैल, 2017 को उन्होंने पंचायतीराज विभाग के प्रस्तुतीकरण में पंचायतों के सशक्तिकरण का संकल्प दोहराते हुए प्रत्येक चार पंचायतों पर एक चंद्रशेखर आजाद ग्रामीण विकास सचिवालय की स्थापना और 32,700 ग्राम पंचायत में कार्यालय भवनों का आधुनिकीकरण कराकर इंटरनेट, टीवी आदि आधुनिक संयंत्र उपलब्ध कराने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे. इसी बैठक में मुख्यमंत्री योगी को पता चला कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 450 में अंत्येष्ट‍ि स्थल बन चुके हैं जबकि इससे कहीं अधि‍क 521 ग्राम पंचायतों में अंत्येष्ट‍ि स्थलों का निर्माण लंबे समय से अटका पड़ा है. मुख्यमंत्री योगी ने फौरन पंचायत विभाग के अधि‍कारियों को लंबित अंत्येष्टि‍ स्थलों का निर्माण कार्य पूरा करने के साथ प्रदेश के सभी पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थल का विकास करने की एक विस्तृत योजना बनाने का आदेश दिया था. योजना तैयार होकर हकीकत में तब्दील होने में करीब डेढ़ वर्ष का समय लग गया. मई, 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थल बनाने की योजना ने गति पकड़ी. सितंबर, 2019 के पहले हफ्ते में तत्कालीन प्रमुख सचिव पंचायती राज अनुराग श्रीवास्तव ने सभी जिलाधि‍कारियों को आदेश भेजकर 15 सितंबर, 2019 तक पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थलों का निर्माण पूरा करने को कहा था. पंचायती राज विभाग ने बहुद्देशीय पंचायत भवन, अंत्येष्टि‍ स्थल निर्माण योजना और राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों से प्राप्त धनराशि‍ को देने और इस्तेमाल करने के लिए लोक प्रबंधन तंत्र (पीएफएमएस) लागू किया था. ग्राम पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थल के निर्माण के‍ लिए करीब 200 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया था.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 जनवरी, 2020 को बिजनौर से गंगा यात्रा की शुरुआत करने के साथ गंगा नदी के किनारे बसे गावों में बड़े पैमाने पर योजनाओं को हरी झंडी दिखाई थी. योगी आदित्यनाथ ने गंगा के किनारे 1,358 किलोमीटर में बसे 27 जिलों, 21 नगर निकाय, 1038 ग्राम पंचायतों के उद्धार का अभियान शुरू किया. इनमें गंगा गंगा के किनारे अनाधिकृत ढंग से शवदाह को रोकने के लिए नगर विकास विभाग और पंचायती राज विभाग को सभी तटवर्ती क्षेत्रों में एक स्थान चिन्हित कर वहां श्मशान घाट या शवदाह गृह का निर्माण कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. वास्तविक स्थ‍िति यह है कि गंगा के किनारे बसे गांवों में पिछले 15 महीनों के दौरान निर्धारित लक्ष्य के 20 फीसद गांवों में भी अंत्येष्टि‍ स्थल बनकर तैयार नहीं हो पाए हैं. कानपुर के विठूर में गंगा के किनारे बने आश्रम के संचालक राजेंद्र त्रिपाठी बताते हैं, “अगर गंगा नदी के किनारे बसे गांवों में अंत्येष्टि‍ स्थल बन जाते और ग्राम पंचायत को इनका जिम्मा मिल जाता तो बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमण से मृत्यु होने के बाद शव का सम्मानजनक अंतिम संस्कार हो जाता. गरीब लोगों के पास अंतिम संस्कार के लिए जरूरी धन नहीं होने के कारण उन्होने शवों को नदी में प्रवाहित कर दिया है.”

वाराणसी में गंगा सफाई अभि‍यान से जुड़े समाजसेवी ललित मिश्र बताते हैं, “गंगा और दूसरी नदियों के किनारे बसे गांवों में अंत्येष्टि‍ स्थलों का निर्माण करने की योजना योगी सरकार में बनी जो अभी तक हकीकत में उतर नहीं पायी है. इतना ही नहीं पिछले सात साल से पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थल बनाने की योजना समय समय पर तैयार होती रही है जो सरकारी भ्रष्टाचार का शि‍कार हुई हैं.” वर्ष 2014 में पंचायतों में अंत्येष्टि‍ स्थल का निर्माण करने के लिए 100 करोड़ रुपए बजट का प्रावधान किया गया था. साथ ही नदियों के किनारे भी सभी ग्राम पंचायतों में भी इसके निर्माण के निर्देश दिए गए. लक्ष्य का आवंटन वित्तीय वर्ष वार किया गया. वर्ष 2014 में 13.23 लाख रुपए प्रति अंत्येष्टि‍ स्थल के निर्माण में खर्च करने का प्रावधान किया गया. महंगाई को देखते हुए अंत्येष्टि‍ स्थलों की निर्माण लागत को बढ़ाकर अब 24 लाख रुपए प्रति कर दिया गया है. वर्तमान में इसी लागत से अंत्येष्टि‍ स्थलों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. नदियों के किनारे बने अंत्येष्टि‍ स्थल सरकारी गड़बड़ि‍यों की दास्तान जाहिर कर देते हैं. मसलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को ही ले लीजिए. यहां पर कुल 30 से अधिक अंत्येष्टि‍ स्थलों के निर्माण का दावा सरकारी महकमा कर रहा है. इनमें से ज्यादातर की हालत बहुत ही ख्रराब है. वाराणसी के भदवां और नियारडीह ग्राम पंचायत में बने अंत्येष्टि‍ स्थल में केवल प्लेटफार्म ही बना है. ऐसे में नदी में बाढ़ आने की वजह से मजबूरी में  लोग यहां पर दाह संस्कार करते हैं. वाराणसी में ब्लाक चिरईगांव का मुस्तफाबाद शवदाह स्थल गंदगी से पटा पड़ा है. बड़ागांव ब्लाक के गजापुर, बलुआ और सरावां में बने अंत्येष्टि‍ स्थल में कोई भी जरूरी व्यवस्था मौजूद नहीं है.

कोरोना संक्रमण काल में हो रही मौत के बाद दाह संस्कार की परेशानियों को देखते हुए वाराणसी में गंगा नदी के किनारे नया शवदाह गृह खोलने की तैयारी की जा रही है. शवदाह निर्माण के लिए गोरखपुर की संस्था आगे आई है. संस्था ने नगर निगम के अधिकारियों को लकड़ी आधारित शवदाहगृह खोलने का प्रस्ताव देते हुए घाट किनारे जमीन मांगी है. जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने भी लकड़ी आधारित शवदाहगृह के लिए नगर नगर निगम को पत्र भेजा है. डीएम के पत्र के बाद नगर आयुक्त गौरांग राठी ने गंगा घाट किनारे जमीन की तलाश के लिए एक्सीएन अजय राम को जिम्मेदारी दी है.

पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने गांव में कोविड और नान-कोविड अंत्येष्टि‍ स्थल को चिन्हित करने का आदेश दिया है. अधि‍कारियों को भेजे गए आदेश में मनोज कुमार सिंह ने कहा है कि गरीब कोविड मरीज के अंतिम संस्कार की व्यवस्था सरकार करेगी. इसके लिए तत्काल पांच हजार रुपए पंचायत निधि‍ से मुहैया कराया जाएगा. 

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें