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यूपी में कोरोना काल में जमीन पर उतरे 8,500 करोड़ रु. के निवेश, 6,400 करोड़ रु. लाइन में

औद्योगिक विकास विभाग के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान यूपी में लगभग 8,500 करोड़ रुपये के निवेश वाली सात परियोजनाओं में वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ हो गया है.

गोरखपुर में बन रहा खाद का कारखाना गोरखपुर में बन रहा खाद का कारखाना
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी में करीब 6,400 करोड़ रुपये के निवेश की 19 परियोजनाएं सक्रिय कार्यान्वयन के अधीन हैं
  • सरकार अब तक 43 प्रतिशत हस्ताक्षरित एमओयू का कार्यान्वयन करवाने में सफल हुई है
  • सरकार ने एमओयू की मॉनिटरिंग के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग तंत्र विकसित किया है

यूपी में कोरोना संकट के दौरान निवेश से जुड़े आंकड़े राहत देने वाले हैं. औद्योगिक विकास विभाग के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान यूपी में लगभग 8,500 करोड़ रुपये के निवेश वाली 7 परियोजनाओं में वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ हो गया है, जबकि लगभग 6,400 करोड़ रुपये के निवेश की 19 परियोजनाएं सक्रिय कार्यान्वयन के अधीन हैं. इस प्रकार प्राप्त निवेश आशयों में से अब लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश सक्रिय चरणों के अधीन है. औद्योगिक विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना बताते हैं कि कोविड-19 के बाद 14,900 करोड़ रुपये के निवेश-प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में परिवर्तित कर उत्तर प्रदेश सरकार अब तक 43 प्रतिशत हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का कार्यान्वयन करवाने में सफल हुई है. महाना कहते है, “कोविड-19 के दौरान यूपी देश के प्रमुख आर्थ‍िक केंद्र के रूप में उभरा है. वित्तीय वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा 1.96 लाख रोजगार के अवसरों की संभावना वाली लगभग 9,700 करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं हेतु 1,000 से अधिक भूखंडों का आवंटन किया गया है.” सतीश महाना बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में रोजगार के नये अवसरों के सृजन एवं राज्य के निवासियों की आर्थिक उन्नति की दिशा में राज्य में औद्योगीकरण-जनित विकास हेतु उत्तर प्रदेश सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. राज्य में निवेश व औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदम इस प्रकार हैं:-

उत्तर प्रदेश में निवेश में उल्लेखनीय प्रगति

◆वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा अब तक लगभग 9,700 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 1,95,990 की रोजगार सृजन की संभावना वाली परियोजनाओं को लगभग 740 एकड़ भूमि (1097 भूखंड) आवंटित की गई है.


◆उक्त निवेश परियोजनाओं में से 7,006 करोड़ रुपये के निवेश और 1,71,683 रोजगार की संभावना वाली परियोजनाओं के लिए 566 एकड़ (871 भूखंड) का आवंटन तो केवल यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा ही किया गया है. इनमें सेक्टर 29 और 33 में अपैरल पार्क (124 भूखंड), हस्तशिल्प पार्क (76 भूखंड), एमएसएमई पार्क (516 भूखंड) और खिलौना (टॉय) पार्क (111 भूखंड) के लिए किए गए आवंटन सम्मिलित हैं.


◆अन्य प्राधिकरणों, जैसे उ.प्र. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने 588 करोड़ रुपये के निवेश और 8,441 रोजगार की संभावना वाली परियोजनाओं के लिए लगभग 52 एकड़ (123 भूखंड) आवंटित किए हैं तथा नोएडा ने 1,341 करोड़ रुपये के निवेश और 14,500 रोजगार की संभावना वाली परियोजनाओं के लिए 92 एकड़ (101 भूखंड) आवंटित किए हैं.

◆कुछ प्रमुख निवेशक जिन्हें हाल ही में भूमि आवंटित की गई है, उनमें हीरानंदानी ग्रुप, सूर्या ग्लोबल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एमजी कैप्सूल्स, केशो पैकेजिंग, माउंटेन व्यू टेक्नोलॉजीज आदि सम्मिलित हैं.


◆राज्य सरकार ने 40 से अधिक निवेश आशयों को आकर्षित करने में सफलता प्राप्त की है, जिसमें लगभग 10 देशों, जैसे- जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस), यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, जर्मनी, दक्षिण कोरिया आदि की कंपनियों के लगभग 45,000 करोड़ रुपये के निवेश-प्रस्ताव सम्मिलित हैं.

इनमें निम्नलिखित निवेश परियोजनाएं सक्रिय क्रियान्वयन के अधीन हैं-

  • हीरानंदानी ग्रुप द्वारा डेटा सेंटर में रु. 750 करोड़ का निवेश
  • ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा एकीकृत खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने में 300 करोड़ रु. का निवेश
  • एसोसिएटेड ब्रिटिश फूड पीएलसी (एबी मौरी) (यूके) द्वारा खमीर मैन्यूफैक्चरिंग में 750 करोड़ रु. का निवेश
  • डिक्सन टेक्नोलॉजीज द्वारा कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में 200 करोड़ रु. का निवेश
  • वॉन वेलेक्स (जर्मनी) द्वारा फुटवियर निर्माण में 300 करोड़ रु. का निवेश
  • सूर्या ग्लोबल फ्लेक्सी फिल्म्स प्रा. लि. द्वारा पीओपीपी, बीओपीईटी, मेटालाइज़्ड फिल्म्स प्रोडक्शन प्लांट में 953 करोड़ रु. का निवेश
  • मैक सॉफ्टवेयर (यूएस) द्वारा सॉफ्टवेयर विकास में 200 करोड़ रु. का निवेश
  • एकैग्रेटा इंक (कनाडा) द्वारा खाद्यान्न अवस्थापना उपकरणों में 746 करोड़ रु. का निवेश
  • एडिसन मोटर्स (दक्षिण कोरिया) द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों में 750 करोड़ रु. का निवेश
  • याज़ाकी (जापान) द्वारा वायरिंग हारनेस तथा कम्पोनेंट्स में 2,000 करोड़ रु. का निवेश


यू.पी. इन्वेस्टर्स समिट-2018 में हस्ताक्षरित समझौता-ज्ञापनों (एमओयू) का क्रियान्वयन

◆राज्य सरकार ने एमओयूज़ की मॉनिटरिंग के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग तंत्र विकसित किया है. ऑनलाइन एमओयू ट्रैकिंग पोर्टल पर निवेशकों, नोडल विभागों और नोडल अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है. इसके अतिरिक्त ऑनलाइन एमओयू ट्रैकिंग पोर्टल के माध्यम से निवेश परियोजनाओं की प्रगति की मासिक समीक्षा की जाती है.

◆एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाले 200 से अधिक निवेश प्रस्तावों वाले विभागों को विभाग के प्रमुख की अध्यक्षता में एक परियोजना अनुश्रवण इकाई (पीएमयू) और अन्य विभागों को एक सेल के सृजन का आदेश दिया गया है.

◆प्रत्येक नोडल विभाग को निवेशकों की सहायता करने के लिए एक समर्पित नोडल अधिकारी की नियुक्ति का आदेश दिया गया है.

◆500 करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्तावों की सहायता के लिए मंडल स्तर पर नोडल अधिकारियों को नामित किया जाता है, 2,000 करोड़ रुपये तक के एमओयूज़ के लिए विशेष सचिव/निदेशक रैंक के अधिकारियों को नामित किया जाता है और 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव की सुविधा के लिए विभाग के प्रमुख या सचिव स्तर के अधिकारी को उत्तरदायी बनाया गया है.

व्यावसायिक सुगमता (ईज़ आफ डूइंग बिज़नेस)

भारत सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) द्वारा हाल ही में घोषित बिज़नेस रिफार्म ऐक्शन प्लान रैंकिंग में उत्तर प्रदेश ने पिछले 3 वर्षों में 12 स्थानों की अभूतपूर्व प्रगति करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया है.

◆राज्य सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में रिकॉर्ड 186 सुधारों को लागू किया गया है, जैसे- श्रम विनियमन, निरीक्षण नियम, भूमि आवंटन, संपत्ति पंजीकरण, पर्यावरण स्वीकृति तथा करों का भुगतान आदि.

◆राज्य में निवेशकों पर विनियामक (रेग्यूलेटरी) भार को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवीनीकरण, निरीक्षण, रजिस्टर व रिकॉर्ड तथा रिटर्न फाइल करने के संदर्भ में लाइसेंसों एवं अनापत्ति प्रमाणपत्रों को चिन्हित करने की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है. इस संबंध में 15 विभागों में अब तक 80 ऐसे प्रक्रियात्मक अनुपालनों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 52 प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं का सरलीकरण किया भी जा चुका है.

◆राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों में से एक, भारत के सबसे बड़े डिजिटल सिंगल विंडो पोर्टल ‘निवेश मित्र’ का कार्यान्वयन है, जिसके माध्यम से उद्यमियों को लगभग 166 सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. उद्यमियों के आवेदनों के 93 प्रतिशत की औसत निस्तारण दर के साथ निवेश मित्र पोर्टल पर प्राप्त 98 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण सफलतापूर्वक किया गया है.

नीतिगत सुधार 

औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के शुभारंभ एवं 20 क्षेत्र-विशिष्ट पूरक नीतियों के साथ राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए नीति-संचालित शासन तंत्र ने उद्यमिता, नवाचार और मेक-इन-यूपी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इन नीतियों के अंतर्गत देश में सर्वश्रेष्ठ एवं आकर्षक प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है, जैसे- भूमि सब्सिडी, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी आदि.

◆वर्तमान समय में पूरे विश्व की कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुदृढ़ व वैकल्पिक बनाने का प्रयास कर रही हैं और स्थिर व सुव्यवस्थित निवेश स्थलों की तलाश कर रही हैं. अतः भारत सरकार की नीति के अनुरूप राज्य सरकार ने भी संपूर्ण प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डवलपमेंट ऐंड मेन्टेनेंस (ईएसडीएम) और कम्पोनेंट निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए नई इलेक्ट्रॉनिक्स नीति-2020 के अंतर्गत नवीनीकृत (रिफरबिश्ड) प्लांट और मशीनरी पर स्थायी पूंजीगत निवेश के 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन प्रदान करने जैसे नीतिगत निर्णय किए हैं.

◆कोविड-19 कालखंड के उपरांत बदलती हुई परिस्थितियों में राज्य सरकार ने कई नई नीतियों की घोषणा की है. ‘पिछड़े क्षेत्रों के लिए त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति-2020’ के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के पूर्वांचल, मध्यांचल और बुंदेलखंड क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के केंद्रों की स्थापना के उद्देश्य से नई औद्योगिक इकाइयों को फास्ट ट्रैक मोड में आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं.

◆इसी प्रकार गैर-आईटी आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए एक नई स्टार्टअप नीति-2020 घोषित की गई है. इस श्रृंखला में डेटा सेंटर नीति तथा रुग्ण औद्योगिक इकाइयों के लिए भी नीति शीघ्र ही घोषित की जाएगी.

◆बुंदेलखंड और पूर्वांचल में निजी औद्योगिक की पात्रता सीमा 100 एकड़ से घटा कर 20 एकड़ कर दी गई है तथा पश्चिमांचल एवं मध्यांचल में 150 एकड़ से घटा कर 30 एकड़ और लॉजिस्टिक्स पार्कों के लिए पूरे प्रदेश में 50 एकड़ से घटा कर 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता का प्रावधान कर दिया गया है.

◆लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को ‘उद्योग का दर्जा’ प्रदान किया गया है. ज़ोनिंग नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे लाॅजिस्टिक्स इकाइयों को औद्योगिक भू-उपयोग का लाभ मिल सके. इसके अतिरिक्त ऐसी लाॅजिस्टिक्स इकाइयों को औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की भूमि औद्योगिक दरों पर आवंटित करने की भी अनुमति प्रदान की गई है.

◆कोविड-19 महामारी के बाद राज्य सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बड़ी राहत देते हुए मंडी परिसर के बाहर लेनदेन पर मंडी शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है.

◆राज्य के पारंपरिक व स्थानीय उद्योगों के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए वर्ष 2018 में ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ कार्यक्रम प्रारंभ किया गया. इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा विपणन सहायता, तकनीकी और कौशल उन्नयन सहायता, प्रशिक्षण और आसान ऋण जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं. 

भूमि बैंक सृजन तथा सुधार

◆प्रदेश में पहले से ही 20,000 एकड़ का औद्योगिक भूमि बैंक उपलब्ध है. इसके अतिरक्ति वित्तीय वर्ष 2021 में लगभग 5,000 एकड़ के भूमि बैंक के विकास का लक्ष्य निर्धारित करते हुए अगस्त-सितंबर, 2020 में मात्र 2 माह की अवधि में राज्य सरकार ने विभिन्न औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के माध्यम से लक्ष्य का 13.67 प्रतिशत प्राप्त कर लिया है.

◆सिंगल विंडो पोर्टल-निवेश मित्र के माध्यम से सभी प्रमुख औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भूमि का ऑनलाइन आवंटन तथा वास्तविक समय में अपडेशन हेतु भारत सरकार के औद्योगिक सूचना प्रणाली (आइआइएस) पोर्टल के साथ औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआइएस) का एकीकरण किया गया है.

◆राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए एक्सप्रेसवेज़ के किनारे लगभग 22,000 एकड़ भूमि चिह्नित की है. एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप में मिश्रित भूमि उपयोग हेतु ज़ोनिंग नियमों में संशोधन की अनुमति दी गई है.

◆भूमि को अवरुद्ध करने को हतोत्साहित करने के लिए 5 वर्षों के भीतर भूमि का उपयोग करने में विफल होने पर भूमि आवंटन के निरस्तीकरण के लिए उ.प्र. औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 में संशोधन किया गया है.

◆भूमि को गैर-कृषि घोषित करने के लिए 45 दिनों के भीतर आवेदन के निस्तारण के आदेश को अधिसूचित किया गया है तथा औद्योगिक भूमि की सुलभ उपलब्धता के लिए लैंड पूलिंग नीति अधिसूचित की गई है.

◆सीलिंग सीमा से अधिक कृषि भूमि की खरीद में आसानी के लिए राजस्व संहिता में संशोधन किया गया है और इसके अनुमोदन का अधिकार जिला-स्तर के अधिकारियों को प्रदान कर दिया गया है. सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को मेगा और इससे उच्च श्रेणी के उद्योगों को आवेदन की तिथि से 15 दिनों के भीतर भूमि प्रदान करने के लिए निर्देशित किया गया है.


संस्थागत सुधार

◆निवेशकों को सुविधा एवं सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित एजेंसी- ‘इन्वेस्ट यूपी’ की स्थापना की गई है. देश में समान प्रकृति के संगठनों के विपरीत, जो या तो निवेश प्रोत्साहन या निवेश सुविधा प्रदान करते हैं, इन्वेस्ट यूपी निवेशकों को पूर्ण निवेश जीवन-चक्र की अवधि में सहायता प्रदान करेगा.

◆विभिन्न नए स्वदेशी व विदेशी निवेश प्रस्तावों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने ‘इन्वेस्ट यूपी’ में एक समर्पित हेल्पडेस्क स्थापित किया है.

नवीन फोकस सेक्टर एवं निवेश के अवसर

◆राज्य सरकार द्वारा नए प्रकार के उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जैसे- बल्क ड्रग तथा मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग. इसके लिए यूपी सरकार समर्पित औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रही है.

◆इसके अतिरिक्त यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में एमएसएमई पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क, परिधान पार्क, हस्तशिल्प पार्क और खिलौना (टाॅय) पार्क के विकास हेतु कार्यवाही की जा रही है. इसी प्रकार प्रस्तावित हेरिटेज सिटी में एकीकृत टाउनशिप तथा राया अर्बन सेंटर एवं बाजना अर्बन सेंटर में लॉजिस्टिक्स हब के विकास की योजना है.

◆यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 5,000 हेक्टेयर में विकसित किया जाने वाला जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा उत्तरी भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक होगा. हवाई अड्डे के साथ एमआरओ/कार्गो कॉम्प्लेक्स और एयरोट्रोपोलिस जैसी परियोजनाओं के विकास की अच्छी संभावना है.

◆राज्य सरकार ने प्रस्तावित जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 6 किमी दूर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर 21 में 1,000 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में हाल ही में एक फिल्म सिटी की घोषणा की है.

◆इसके अतिरिक्त यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर 28 में 350 एकड़ में डेडिकेटेड मेडिकल डिवाइस पार्क प्रस्तावित है, जिसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए कलाम इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ टेक्नोलॉजी के साथ एमओयू किया गया है.

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