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पंचायत चुनाव में खूब बंट रही शराब

यूपी में पंचायत चुनाव की घोषणा होते ही शराब के अवैध कारोबार ने भी तेजी पकड़ ली है. प्रत्याशी लोगों को लुभाने के लिए शराब का सहारा ले रहे हैं. शराब से प्रतापगढ़, प्रयागराज चित्रकूट, अयोध्या में समेत कई जिलों में मौतें हुई हैं.

हाथरस पुलिस द्वारा पकड़े गए शराब के अवैध कारोबारी हाथरस पुलिस द्वारा पकड़े गए शराब के अवैध कारोबारी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सिर्फ मार्च में 25 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हो चुकी है
  • शराब की डिमांड बढ़ने से इसकी तस्करी में भी इजाफा हो रहा है
  • शराब के अवैध कारोबार को रोकने के लिए आबकारी विभाग ने टोलफ्री नंबर जारी किया है

अयोध्या जिले के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर गांव में 1 अप्रैल को जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत हो गई है जबकि आधा दर्जन लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है. उनमें दो लोगों की हालत चिंताजनक बताई गई है. जानकारी के अनुसार, प्रधानी चुनाव को लेकर पूर्व प्रधान राजनाथ वर्मा द्वारा गांव में पार्टी दी गई और शराब बांटी गई. शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत खराब होने लगी और उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत हुई. कुछ लोगों को आंखों के सामने अंधेरा छा गया. गांव के 32 वर्षीय वीरेंद्र वर्मा, पुत्र राम बुझारत वर्मा तथा 30 वर्षीय धर्मेंद्र वर्मा, पुत्र मोतीलाल वर्मा की मौत हो गई जबकि लाल बहादुर पुत्र जयराम, राजेश पुत्र कल्पू, जयश्री पुत्र मुसई, ध्रुव कुमार वर्मा पुत्र घुरहू प्रसाद, राम शुभावन वर्मा की तबीयत खराब हो गई है. लाल बहादुर पुत्र जयराम तथा राजेश प्रजापति की हालत चिंताजनक बताई जा रही है. मृतक धर्मेंद्र वर्मा के पिता मोतीलाल वर्मा ने निवर्तमान प्रधान राजनाथ वर्मा के खिलाफ नामजद तहरीर देते हुए कार्रवाई की मांग की है. जिलाधिकारी अनुज कुमार झा तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पांडे ने मौके पर पहुंचकर दोषि‍यों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ.

इससे पहले प्रतापगढ़ जिले में जहरीली शराब के कारोबार ने फिर सगे भाइयों समेत पांच लोगों की जान ले ली. यहां 31 मार्च को उदयपुर थाना क्षेत्र के कटरिया गांव के चार व राकी के एक व्यक्ति की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई. तीन लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. शराब से चार लोगों के मौत की खबर से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा रहा. छानबीन में यह बात सामने आई है कि प्रधान पद के दावेदार ने इन लोगों को शराब पिलाई थी. एक प्रधान पद के दावेदार को हिरासत में भी लिया गया है.

यूपी में पंचायत चुनाव की घोषणा होते ही शराब के अवैध कारोबार ने भी तेजी पकड़ ली है. प्रत्याशी लोगों को लुभाने के लिए शराब का सहारा ले रहे हैं. शराब से प्रतापगढ़, प्रयागराज चित्रकूट, अयोध्या में समेत कई जिलों में मौतें हुई हैं. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार यूपी में सिर्फ मार्च के महीने में 25 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हो चुकी है. इनमें सर्वाधि‍क मौतें प्रयागराज मंडल में हुई है. रिटायर्ड पुलिस अधि‍कारी राम भजन सिंह कहते हैं, “पंचायत चुनाव में मतदाताओं को लुभाने का सबसे आसान साधन शराब है. प्रत्याशी वोट बटोरने के लिए शराब गांव में जमकर शराब बांटते हैं. शराब की डिमांड बढ़ने से इसकी तस्करी में भी इजाफा हो रहा है.” यही वजह है कि पंचायत चुनाव का बिगुल बजते ही अवैध शराब के तस्कर सक्रिय हो गए है. गुरुवार, 1 अप्रैल को मुरादाबाद की पाकबड़ा पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक लग्जरी कार से करीब ढाई लाख रुपये की शराब बरामद की है. पुलिस ने तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पूछताछ में कबूला है कि वह पंचायत चुनाव में खपाने के लिए हरियाणा प्रदेश की शराब लेकर आ रहे थे. पाकबड़ा थाना प्रभारी योगेंद्र यादव ने बताया कि ग्राम पंचायत चुनाव 2021 के मद्देनजर अन्य प्रदेशों से तस्करी कर लाई जा रही अवैध शराब की बरामदगी को पुलिस द्वारा एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. गुरुवार सुबह सूचना मिली थी कि एक लग्जरी कार से हरियाणा से शराब लाई जा रही है, जिससे पाकबड़ा क्षेत्र के गांवों में बेचा जाएगा. पुलिस ने पाकबड़ा कस्बे में कैलशा रोड पर चेकिंग शुरू कर दी. इसी दौरान एक लग्जरी कार आई. टीम ने घेराबंदी कर कार रुकवा ली. कार को चेक किया गया तो उसमें शराब की पेटियां लदी हुईं थीं. पुलिस ने कार से तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है.

पंचायत चुनाव में शराब के कारोबारियों पर राज्य चुनाव आयोग की भी नजर है. आयोग का दावा है कि पंचायत चुनाव में यदि किसी प्रत्याशी ने अपने वोटरों को रिझाने के लिए शराब या फिर अन्य नशीले पदार्थ की दावत दी तो प्रत्याशी का नामांकन तक रद्द किया जा सकता है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से आचार संहिता के उल्लंघन की जो गाइडलाइन जारी की गई है उसके अनुसार शराब की पार्टियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. साफ किया गया है कि यदि वोटरों को रिझाने के लिए यदि प्रत्याशियों या फिर उनके समर्थकों ने शराब की पार्टी दी तो इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा. आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि आयोग के दावे का बहुत असर फि‍लहाल देखने को नहीं मिल रहा है. प्रदेश में शराब के अवैध कारोबार को रोकने के लिए आबकारी विभाग की ओर से जारी व्हाट्सऐप नंबर पर एक सप्ताह के अंदर 55 शि‍कायतें आ चुकी हैं. इनमें 45 शि‍कायतों का तत्काल निस्तारण किया जा चुका है. अपर मुख्य सचिव आबकारी संजय भूसरेड्डी बताते हैं, “शराब के अवैध कारोबार को रोकने के लिए पिछले सप्ताह टोल फ्री नंबर 18001805331 और व्हाट्सऐप नंबर 9454466019 जारी किए गए थे. इन नंबरों पर मिली शिकायतों के बाद लखनऊ, लखीमपुरखीरी, उन्नव समेत कई जिलों में कार्रवाई की गई है.”

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