scorecardresearch
 

देर रात रैन बसेरे में गुलजार कलेक्टर का ‘दफ्तर’

गाजियाबाद के जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने रोजाना किसी एक रैन बसेरे में रात गुजारना शुरू कर दिया है. वे वहां लोगों की समस्याएं सुनते हैं और लगे हाथ दिन भर की पत्रावलियों का निस्तारण भी करते हैं.

गाजियाबाद के राजनगर स्थित रैन बसेरे में देर रात मौजूद जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय गाजियाबाद के राजनगर स्थित रैन बसेरे में देर रात मौजूद जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डीएम से एक समाजसेवी ने 29 दिसंबर को रैन बसेरों की दुर्दशा के बारे में शिकायत की
  • डीएम अजय शंकर पांडे उसी दिन रात में रैन बसेरों को निरीक्षण करने निकल पड़े
  • उन्होंने रैन बसेरे में लोगों की समस्याएं सुनीं और पत्रावलियों का निस्तारण भी किया

गाजियाबाद के कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी कक्ष के बाहर मंगलवार 29 दिसंबर को सुबह 10 बजे से ही काफी गहमागहमी थी. जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय दैनिक सरकारी कामकाज में व्यस्त थे. तभी सुबह करीब 11:30 बजे एक समाजसेवी का जिलाधि‍कारी कक्ष में प्रवेश होता है. वह जनपद गाजियाबाद में चल रहे रैन बसेरों की दुर्दशा की शिकायत करते हैं. जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने स्वयं रैन बसेरों का निरीक्षण कर समाधान करने का आश्वासन दिया, लेकिन समाजसेवी अपनी शिकायत जारी रखते हैं. वे कहते हैं, “आपके आसपास ही रैन बसेरे इतनी बुरी दशा में है कि आप उनमें प्रवेश भी नहीं कर सकते. इन रैन बसेरों में दस मिनट ठहरने की कल्पना ही नहीं की जा सकती है. रैन बसेरों के बिस्तर और कंबल इस कदर गंदे हैं कि उन्हें हाथ तक नहीं लगाया जा सकता.” जिलाधिकारी ने दोबारा समाजसेवी को टोका और संतुष्ट करने का प्रयास किया लेकिन वह अपनी शिकायत पर अड़े रहे. जिलाधिकारी ने उन समाजसेवी का मोबाइल नंबर लिया और कहा कि जिन रैन बसेरों का नाम लिया जा रहा है वहां की हकीकत देखने वे स्वयं जाएंगे. समाजसेवी जिलाधिकारी की बात को हल्के में लेते हुए यह तंज करके निकल गए कि “मैं उस दिन का इंतजार करूंगा.”

जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने रोज की भांति अपना सारा कामकाज निपटाया. शाम को घर गए और रात 11 बजे के करीब अचानक अपने स्टाफ के साथ रैन बसेरों का आकस्मिक निरीक्षण करने के लिए निकल पड़े. सबसे पहले दलबल के साथ वह अर्थला रैन बसेरे में पहुंचे. उन्होंने यहां मौजूद लोगों से बातचीत की. कंबल और बि‍स्तरों की दशा देखी. कोई ज्यादा गड़बड़ी न मिलने पर अजय शंकर पांडेय अपने स्टाफ के साथ रात करीब 12:30 बजे राजनगर स्थित डूडा के रैन बसेरे में पहुंचे. रैन बसेरे में कुछ लोग सो रहे थे और कुछ लोग आपस में बातचीत कर रहे थे. जिलाधिकारी के आगमन की सूचना मिलते ही रैन बसेरे में मौजूद लोग अपने बिस्तर से उठकर खड़े होने लगे. जिलाधिकारी ने सब को इस ठंड में बिस्तर में रहने का अनुरोध किया. इसी दौरान जिलाधिकारी के ओएसडी ने सुबह कार्यालय कक्ष में आए समाजसेवी का मोबाइल फोन मिलाया. ओएसडी ने समाजसेवी को बताया कि जिलाधिकारी आपके पड़ोस के रैन बसेरे में आए हैं. ओएसडी ने समाजसेवी से कहा कि जिलाधि‍कारी ने आपसे जो वादा किया है उसका आप भी साक्षी बनें. समाजसेवी ने 15 मिनट में आने की बात कहते हुए फोन काट दिया और इसके बाद उनका फोन बंद हो गया.

जिलाधिकारी रैन बसेरे के एक खाली बिस्तर पर बैठ गए. उन्होंने अपने ओएसडी को निर्देश दिया कि वह अपने साथ लाई सरकारी पत्रावलियों और डाक का निस्तारण यहीं करा लें. कुछ ही समय में रैन बसेरे के भीतर जिले के कलेक्टर का कार्यालय शुरू हो गया. एक-एक करके फाइलों का निस्तारण होने लगा. रैन बसेरे के मैनेजर को जिलाधिकारी के आने की जानकारी मिली तो वह नई चद्दर और कंबल लेकर भागता हुआ रैन बसेरा पहुंचा. जिलाधिकारी ने उसको वापस कर दिया और पहले से ही बिछे बिस्तर और कंबल का इस्तेमाल किया. फाइलों के निस्तारण के बाद जिलाधिकारी ने रैन बसेरों में रहने वाले लोगों से बातचीत की. उनका हालचाल जाना और उनकी असुविधाओं के बारे में पूछा. जिलाधि‍कारी ने वहीं से रैनबसेरों के प्रभारी अधि‍कारी को फोन पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का आदेश भी दिया. जिलाधि‍कारी ने रैनबसेरे में मौजूद लोगों को अपने व्यक्त‍िगत संसाधन से जैकेट भी बांटे. करीब ढाई घंटा रैन बसेरे में गुजारने के बाद जिलाधिकारी अपने घर की ओर रवाना हुए. इस तरह प्रतिदिन जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने किसी एक रैन बसेरे में रात गुजारना शुरू कर दिया है. वे वहां लोगों की समस्याएं सुनते हैं. लगे हाथ दिन भर की पत्रावलियों का भी निस्तारण करते हैं. कड़क सर्दी में रैन बसेरों में रात बिताने वाले जिलाधिकारी ने इनके इंतजाम से जुड़े लोगों में गर्मी तो ला ही दी है.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें