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अयोध्या में मस्जि‍द निर्माण के लिए बने ट्रस्ट पर विवाद

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट में अयोध्या के किसी मुस्लिम को शामिल न किए जाने से विवाद खड़ा हो गया है.

धन्नीपुर गांव में एक दरगाह के पास 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद बनेगा (फोटोः शिवेंद्र श्रीवास्तव) धन्नीपुर गांव में एक दरगाह के पास 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद बनेगा (फोटोः शिवेंद्र श्रीवास्तव)

लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले फोरलेन हाइवे पर अयोध्या के सोहावल ब्लॉक में पड़ने वाले दूसरे टोल प्लाजा को पार करते ही रिहाइशी इलाके शुरू हो जाते हैं. यहां से करीब डेढ़ किलोमीटर आगे बढ़ते ही बाईं ओर मौजूद रौनाही थाना को एक नई पहचान मिल गई है. इसी थाने के ठीक पीछे धन्नीपुर गांव की वह पांच एकड़ जमीन है जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पांच फरवरी को मस्जिद के निर्माण के लिए 'सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड' के पक्ष में आवंटित किया है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 9 नवंबर को रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. इसमें अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर ही राम मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट के गठन के साथ मस्जिद के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश सरकार को दिया गया था.

अयोध्या में 5 अगस्त से मंदिर निर्माण की शुरुआत होने जा रही है. इसी बीच 29 जुलाई को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी मस्जि‍द निर्माण के लिए ट्रस्ट की घोषणा कर दी. इस ट्रस्ट का नाम 'इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट' रखा गया है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारूखी ट्रस्ट के अध्यक्ष बनाए गए हैं. ट्रस्ट के सचिव और प्रवक्ता अतहर हुसैन बताते हैं, “इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट रौनाही में मस्जि‍द निर्माण के साथ इस्लामिक एजुकेशनल संस्था और एक लाइब्रेरी का भी निर्माण करेगा. मस्जिद निर्माण के लिए बजट की व्यवस्था भी ट्रस्ट ही करेगा.” कुल 15 सदस्यों वाले इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट में अभी नौ सदस्यों के नाम की ही घोषणा की गई है.

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट में अयोध्या के किसी मुस्लिम को शामिल न किए जाने से विवाद खड़ा हो गया है. बाबरी मस्जिद के लिए पुश्त दर पुश्त लड़ाई लड़ने वाले पक्षकारों को इसमें कोई जगह नहीं दी गई है. बाबरी मस्जि‍द के मुद्दई रहे हाशि‍म अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी कहते हैं, “म‍स्जिद बनाने के लिए गठित ट्रस्ट में अयोध्या के किसी मुस्लि‍म को जगह न देने से बाबरी मस्जि‍‍द के पक्ष में लड़ाई लड़ने वालों का अपमान हुआ है. सुन्नी वक्फ बोर्ड को मंदिर बनाने के लिए गठित ‘श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ से सीख लेनी चाहिए जिसमें बड़ी संख्या में अयोध्या के लोगों को जगह दी गई है.” बाबरी मस्जिद के पैरोकार मुख्य अयोध्या शहर से बाहर मस्जिद निर्माण पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे हाजी महबूब कहते हैं, “सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को कोर्ट से अधि‍कार मिला है, वो जिसको चाहें ट्रस्ट में रखें जिसको चाहें न रखें. हमारा कोई मतलब नहीं है. ट्रस्ट के बाकी बचे सदस्यों में अगर मेरा नाम शामिल किया जाता है तो मैं मना कर दूंगा. अयोध्या के बाहर धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण में मेरी कोई रुचि नहीं है.”

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सदस्य इमरान माबूद खान और अब्दुल रज्जाक खान को भी इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट में जगह नहीं मिली है. इन दोनों सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अयोध्या के रौनाही इलाके में म‍स्जिमद के लिए मिली जमीन का विरोध किया था.

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट में सदस्यों को लेकर उठे विवाद पर ट्रस्ट के प्रवक्ता अतहर हुसैन कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते. हालांकि अतहर हुसैन कहते हैं, “ट्रस्ट में अयोध्या विवाद आपसी बातचीत से हल करने और नई मस्जि‍द को विवादित जगह से अलग बनाये जाने की मध्यस्थता कर रही टीम में शामिल अतहर हुसैन, मोहम्मद राशि‍द और इमरान अहमद को शामिल किया गया है. ” ट्रस्ट अब अपने लिए नए दफ्तर के लिए जगह की खोज करने जा रहा है. ट्रस्ट के एक पदाधि‍कारी बताते हैं कि ट्रस्ट के सभी सदस्य बैठक करके पहले यह तय करेंगे कि दफ्तर अयोध्या में हो या लखनऊ में.

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