scorecardresearch
 

उत्तर प्रदेशः बजट बढ़ा पर स्कूल ड्रॉपआउट दर में गिरावट बेहद मामूली

पिछले चार साल के आंकड़े बताते हैं कि बजट में खर्च बढ़ाने के बावजूद उत्तर प्रदेश में स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों की दर में बहुत मामूली गिरावट आई है. 

फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे

कई बार बजट में खर्च बढ़ाने का भी फायदा होता नहीं दिखता है. उत्तर प्रदेश में प्राइमरी शिक्षा के स्तर पर बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों के मामले में यही होता दिख रहा है. जहां बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों यानी स्कूल ड्रॉपआउट की दरों में पिछले चार साल में मामूली गिरावट दर्ज की गई है. 

उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि उसने शिक्षा पर मौजूदा वित्त वर्ष में यानी 2019-20 में अपने कुल बजट का 14.3 फीसदी खर्च शिक्षा के मद में रखा है. लेकिन इतनी बड़ी रकम खर्च करने का असर छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर पर जरा भी नहीं दिख रहा है. पिछले चार साल में स्कूल ड्रॉपआउट रेट में महज आधे फीसदी की कमी आई है. लोकसभा में 15 जुलाई को पूछे गए एक सवाल के जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया, "साल 2013-14 में उत्तर प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट 7.7 फीसदी था जो साल 2017-18 में घटकर 7.24 फीसदी हो गया."

मानव संसाधन विकास मंत्री के इस जवाब का मतलब यही है कि उत्तर प्रदेश में प्राइमरी के स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वालों की दर में सिर्फ आधे फीसदी (0.46 फीसदी) की ही कमी आई है.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2018-19 में समग्र शिक्षा पर कुल 6,52,974.17 (लाख रु.) खर्च किए है. और पिछले चार सालों (2014-18 तक) में सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत कुल 40,89,850.13 (लाख रु.) खर्च किए है. उत्तर प्रदेश सरकार ने 2019 के बजट में 14.3 फीसदी खर्च शिक्षा के लिए आवंटित किया, हालांकि साल 2018 में सरकार ने ये खर्च 15.9 फीसदी रखा था. समग्र शिक्षा के लिए योगी सरकार ने 18,484 करोड़ रु. खर्च किए तो वहीं सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधा मिड डे मिल के लिए 2,227 करोड़ रु. का बजट रखा है. प्राथमिक स्कूलों के विकास के लिए योगी सरकार ने 500 करोड़ रु. का बजट रखा है, तो वहीं सैनिक विद्यालयों की स्थापना के लिए 36 करोड़ 57 लाख रु. का बजट रखा है.   

पूरे देश की बात करें तो सबसे कम ड्रॉप आउट रेट वाले राज्य तमिलनाडु, केरल, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र हैं. वहीं अरुणाचल प्रदेश 23.25 फीसदी के साथ सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट वाला राज्य है. प्राथमिक स्तर पर देखे तो देश भर में औसतन 6.35 फीसदी ड्रॉप आउट की दर है और उच्च प्राथमिक स्तर पर देश में औसतन 5.67 फीसदी ड्रॉप आउट रेट की दर है तो वहीं हायर सेकेंडरी स्तर पर देश में औसतन 13.09 फीसदी ड्रॉप आउट रेट है. 

देश में केंद्र और राज्य सरकार शिक्षा को लेकर कई अभियान चला रही हैं. हालांकि अगर केंद्र सरकार का इस बार का बजट देखे तो सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा, स्कूल पर अपनी कोई ठोस नीति लागू करने की दिशा में ढुलमुल रवैया ही दिखाया है. 

लोकसभा में मानव संसाधन मंत्री ने इस ड्रॉपआउट दर के पीछे कुछ वजहें भी बताईं. उन्होंने कहा, "इसके (ऊंची ड्रॉपआउट दर) पीछे कई कारण हैं उनमें से एक मुख्य कारण आर्थिक मुद्दे हैं. इसके अलावा बच्चों से घर का काम करवाना, बच्चों की पढ़ाई में रुचि कम होना और परिवार का पलायन होना भी कारण है."

(आदेश दुबे आइटीएमआइ के छात्र हैं और इंडिया टुडे में प्रशिक्षु हैं)

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें