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बैंक में प्लास्ट‍िक कचरा जमा करिए, बदले में पैसा लीजिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मलदेहिया इलाके में एक अनोखा 'प्लास्ट‍िक वेस्ट बैंक' खोला गया है. इस बैंक में प्लास्टि‍क जमा करने के बदले में पैसे के अलावा कपड़े का झोला या फेस मास्क दिया जाता है.

वाराणसी में खुला प्लास्टि‍क बैंक वाराणसी में खुला प्लास्टि‍क बैंक
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वाराणसी के नगर आयुक्त गौरांग राठी ने प्लास्ट‍िक बैंक की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई है
  • बैंक में जमा होने वाली प्लास्ट‍िक के रिसाईकिल के लिए आशापुरी में 10 मीट्रिक टन का प्लांट लगाया गया है
  • प्लास्टिक के कचरे से प्लास्टिक की पाइप, पॉलिस्टर के धागे, जूते के फीते और अन्य सामग्री बनाई जाएगी

बैंक का नाम सुन कर आपके मन में रुपयों के लेन-देन की बात सामने आती होगी. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पर्यावरण को शुद्ध रखने के एक अनोखा बैंक बना है. यहां रुपयों को लेन-देन नही बल्कि प्लास्टिक के कचरे का लेन-देन होता है. ये बैंक वाराणसी के मलदेहिया इलाके में खोला गया है. इस बैंक का नाम “प्लास्टिक वेस्ट बैंक” है. इस बैंक में प्लास्टिक के कचरे से लेन-देन होता है. ये प्लास्टिक शहर के लोग,प्लास्टिक वेस्ट बैंक के वालिंटियर, उपभोक्ता यहां लाकर जमा करते हैं. अगर कोई बैंक में कम प्लास्टिक जमा करता है तो उसे उस प्लास्टिक के कचरे के बदले कपड़ें का झोला या फेस मास्क दिया जाता है. अगर कोई अधि‍क मात्रा में प्लास्टिक लाया है तो बैक से उसके वजन के अनुसार पैसे दिए जाते हैं. यानी कि यहां आपको रुपये के बदले में रुपये नहीं बल्कि प्लास्टिक के कचरे के बदले रुपये प्राप्त होंगे.

वाराणसी के नगर आयुक्त 2014 बैच के आइएएस अफसर गौरांग राठी ने वाराणसी में प्लास्ट‍िक बैंक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. गौरांग अक्तूबर 2019 को वाराणसी के नगर आयुक्त बने थे. गौरांग ने पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान एनालिटिक्स का उपयोग करके सभी जरूरी सेवाओं की डिजिटल निगरानी का अनोखा तंत्र तैयार किया था और. उत्तर भारत में पहली बार काशी में ड्रोन से सैनेटाइजेशन करवा कर चर्चा बटोरी थी. नगर आयुक्त गौरांग राठी ने बताया की पीपीई मॉडल पर केजीएन व यूएनडीपी काम कर रही है. 10 मीट्रिक टन का प्लांट आशापुर में लगा है, करीब 150 सफाई मित्र इस काम में लगे है. नगर आयुक्त ने बताया की पॉलीथिन पर प्रतिबन्ध है फिर भी टेट्रा पैक और पानी पीने की बोतले चलन में है, जिसका निस्तारण रिसाईकिल करके किया जाता है.

केजीएन कंपनी के निदेशक साबिर अली ने  बताया की वे एक किलो पॉलीथिन के बदले 6 रूपया देते हैं,जो आठ से दस रूपया किलो में बिकता है. पूरे वाराणसी शहर से रोजाना करीब दो टन पॉलीथिन कचरा इकट्ठा हो जाता है. इसके अलावा 25 रूपया किलो पीईटी यानी इस्तमाल की हुई पीने के पानी की बोतल खरीदी जाती है, जो प्रोसेसिंग के बाद करीब 32-38 रूपया किलो बिकती है. किचन में इस्तमाल होने वाली प्लास्टिक बाल्टी, डिब्बे मग आदि जिसे पीपी, एलडीपी बोलते है, 10 रूपया किलो खरीदा जाता है, जो 4 से 5 रुपये की बचत करके बिक जाता है. कार्ड बोर्ड आदि सभी रीसाइकिल होने वाले कचरे को ये बैंक लेता है. इस बैंक में जमा प्लास्टिक के कचरे को वाराणसी के आशापुर स्थित प्लांट पर जमा किया जाता है. प्लास्टिक के कचरे को प्रेशर मशीने से दबाया जाता है, प्लास्टिक  को अलग किया जाता जिनमे पीईटी बोतल को हैड्रोलिक बैलिंग मशीन से दबाकर बण्डल बनाकर आगे के प्रोसेस के लिए भेजा जाता है और अन्य प्लास्टिक कचड़े को अलग करके उनको भी रीसाईकल करने भेज दिया जाता है. फिर इसे कानपूर समेत दूसरी जगहों पर भेजा जाता है जहां मशीन द्वारा प्लास्टिक के कचरे से प्लास्टिक की पाइप, पॉलिस्टर के धागे, जूते के फीते और अन्य सामग्री बनाई जाएगी. नगर निगम द्वारा शुरू किए गए इस पहल में प्लास्टिक के कचरे को निस्तारण के लिए इस बैंक का निर्माण हुआ है.

पर्यावरणविद भी इस पॉलीथिन को बेहद खतरनाक और पर्यावरण का शत्रु मानते हैं, उनका कहना है कि प्लास्टिक के बैग और पॉलीथिन से शहर  में कई तरह के प्रदूषण पैदा होते हैं, ये पॉलीथिन पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक हैं. गंगा में लोगो द्वारा पॉलीथिन फेंक दिया जाता है, जिससे गंगा में गंदगी होती है साथ ही जलीय जन्तुओं को नुकसान होता है. पॉलीथिन से सीवर ज़ाम होता है, नालियां चोक हो जाती है. साथ ही पॉलीथिन जलाने से भी जहरीले धूएं से वातारवरण खराब होता है और हवा जहरीली हो जाती है.

बनारस को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए पहले से ही यहां प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध है. लेकिन अभी भी कई ऐसे प्लास्टिक के सामग्री हैं जो उपयोग में हैं, जिसके निस्तारण के लिए प्लास्ट‍िक बैंक के उपाए काफी कारगर साबित हो रहा है और उपयोग का सामान भी बनाया जा रहा है. ऐसे में ये प्लास्टिक बैंक जहां वाराणसी को प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण के रोकथाम में कारगर साबित होगा तो वहीं काशी के विकास में भी मुख्य भूमिका निभाएगा. 

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