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देवरिया विधानसभा उपचुनाव: त्रिपाठियों के बीच चौतरफा जंग

देवरिया के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है कि यहां के किसी विधानसभा चुनाव में सभी प्रमुख दलों ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं.

भाजपा उम्मीदवार सत्यप्रकाश मणि‍ त्रिपाठी का सम्मान करते कार्यकर्ता भाजपा उम्मीदवार सत्यप्रकाश मणि‍ त्रिपाठी का सम्मान करते कार्यकर्ता
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कानपुर में बिकरू हत्याकांड के बाद सभी पार्टियां ब्राह्मणों को रिझाने में जुटी हैं
  • पूर्वांचल में ब्राह्मण वोटों को ध्यान में रखकर सभी पार्टियों ने यह कदम उठाया है
  • यहां से भाजपा के उम्मीदवार सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी हैं

कानपुर में बिकरू हत्याकांड के बाद ब्राह्मणों को रिझाने में जुटीं सभी राजनीतिक पार्टियां पूर्वांचल के ब्राह्मण बाहुल्य इलाके में जोर आजमाइश दिखाने जा रही हैं. देवरिया के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है कि यहां के किसी विधानसभा चुनाव में सभी प्रमुख दलों ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं. देवरिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस ने इस बार न केवल ब्राह्मण उम्मीदवारों पर दांव लगाया है बल्कि‍ रोचक बात यह भी है कि सभी त्रिपाठी हैं. देवरिया सदर सीट से अंतिम बार ब्राह्मण जनप्रतिनिधि‍ वर्ष 1989 के विधानसभा चुनाव में जीता था. इसके बाद तीन दशकों से यहां कोई भी ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका है.

वर्ष 1967 में अस्त‍ित्व में आई देवरिया सदर सीट पर अब तक हुए 14 चुनावों पर नजर डालें तो पता चलता है कि अब तक यहां से सबसे अधि‍क पिछड़ों को प्रतिनिधि‍त्व करने का मौका मिला है. इसके अलावा ब्राह्मण, भूमिहार और मुस्लि‍म समुदाय से जुड़े लोग दो-दो बार तथा एक बार ठाकुर तथा एक बार श्रीवास्तव बिरादरी से जनप्रतिनिधि‍ चुने जा चुके हैं. देवरिया सदर सीट पर वर्ष 1969 में ब्राह्मण बिरादरी के दीप नारायण मणि‍ पहली बार चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय किसान दल (बीकेडी) से विधायक चुने गए थे. इसके बाद वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर रामछबीला मिश्र ने यहां से जीत दर्ज की थी. देवरिया में एक इंटर कालेज के प्राचार्य पद से रिटायर हुए राम चंद्र पाठक बताते हैं, “पूर्वांचल में ब्राह्मण बिरादरी काफी तादाद में हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए देवरिया सदर विधानसभा उपचुनाव में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं. इतना ही नहीं देवरिया में ब्राह्मणों के बीच त्रिपाठी बिरादरी के लोग ज्यादा प्रभावशाली हैं इसीलिए सभी पार्टियों ने इसी बिरादरी से उम्मीदवार उतारे हैं.”

वर्ष 1980 में भाजपा ने देवरिया सदर विधानसभा सीट से रामनवल मिश्र को प्रत्याशी बनाया था लेकिन वह चुनाव में छठवें स्थान पर थे. 40 वर्ष बाद भाजपा ने एक बार फि‍र इस सीट से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारा है. भाजपा ने संत बिनोवा महाविद्यालय, देवरिया के एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीतिक शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है. भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यप्रकाश मणि बैतालपुर के उद्योपुर गांव के मूल निवासी हैं. लंबे समय से भाजपा में हैं. उनके परिवार में कई शिक्षाविद् हैं. इनमें एक भाई अमर कंटक में कुलपति हैं. जिला पंचायत सदस्य के रूप में कार्य करने का अवसर इन्हें मिल चुका है. इन्होंने देवरिया में कौन्तेय नगर की स्थापना कर वहां निर्धन छात्रों को शिक्षा देने की मिसाल कायम की है. डॉ. सत्य प्रकाश मणि‍ त्रिपाठी कई समितियों में सदस्य एवं वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में देवरिया विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी रह चुके  हैं. ये बैतालपुर के ब्लॉक प्रमुख भी रहे हैं और एक बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं.

सपा के लिए यह पहला मौका है कि उसने देवरिया सदर से किसी ब्राह्मण उम्मीदवार पर भरोसा जताया है. समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार ब्रह्माशंकर त्रिपाठी पांच बार कसया एवं कुशीनगर से विधायक रह चुके हैं. सपा शासनकाल में दो बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं. कसया के पिपरा झाम गांव के मूल निवासी ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को राजनीति में 50 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने राजनीति की शुरूआत 1967 में की थी. 1989 में जद (जनता दल) से चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने. इसके बाद 1993 में दोबारा विधायक बनने का अवसर उन्हें हासिल हो सका. वर्ष 2002 में सपा से चुनाव लड़कर फिर विधायक बनने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ. 2003 में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनने का अवसर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दिया. वर्ष 2007 में कसया से चुनाव लड़े और फिर विधायक बनें. परिसीमन के बाद 2012 में कुशीनगर विधानसभा बन गई, जहां से चुनाव लड़कर एक बार फिर जीते.

अपने पुराने ब्राह्मण वोटबैंक को हथि‍याने में लगी कांग्रेस ने 34 वर्ष बाद देवरिया सदर विधाानसभा सीट से ब्राह्मण उम्मीदवार मुकुंद भाष्कर मणि‍ त्रिपाठी को टिकट दिया है. बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति अपनाते हुए वर्ष 2002, 2007 और 2017 में ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे थे. इस बार भी बसपा ने अभय मणि‍ त्रिपाठी को टिकट दिया है जिन्हें इसी सीट पर 2017 में हार का सामना करना पड़ा था.

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