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चुनाव में ‘किंग मेकर’ बनने का सपना देखने लगे डकैत

चित्रकूट में तैनात एक पुलिस अधिकारी बताते हैं कि गौरी गैंग ने आगामी पंचायत चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी हनक कायम करने की मंशा से हिंसक वारदातों को तेज किया है.

पाठा के जंगल में कॉम्बिंग करती पुलिस पाठा के जंगल में कॉम्बिंग करती पुलिस
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बुंदेलखंड में पाठा के जंगलों में डाकू गौरी यादव गैंग ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं
  • डकैतों के मूवमेंट पर नजर रखने वाले जानकार इसे पंचायत चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं
  • डाकू गौरी यादव गैंग पर कई थाना क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं

बुंदेलखंड में पाठा के जंगलों में बड़े नामी डकैतों के खात्मे के बाद अब इकलौते बचे डाकू गौरी यादव गैंग ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं. डकैतों के मूवमेंट पर नजर रखने वाले जानकार इसे पंचायत चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं. चित्रकूट में पाठा के जंगलों में सक्रिय डाकू गौरी की मां वर्तमान में ग्राम प्रधान है. 25 दिसंबर से ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. ऐसे में गांवों में प्रधानी का चुनाव लड़ने वाले लोग जुगत भिड़ाने में लगे हैं. पाठा के जंगलों और उसके आसपास बसे गांवों में डकैतों के फरमान चलते रहे हैं लेकिन डकैत ददुआ, ठोकिया व बबली कोल के मारे जाने के बाद से इलाके में शांति थी. इसी बीच दिसंबर के अंतिम हफ्ते में चित्रकूट के मारकुंडी थाना क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी ठेकेदार जयप्रकाश पांडेय ने एसपी अंकित मित्तल को सौंपे पत्र में डकैत गौरी गैंग के द्वारा सड़क निर्माण के एवज में रंगदारी मांगने पर सुरक्षा की फरियाद लगाई थी. इसके बाद एक हफ्ते के अंदर साढ़े पांच लाख के इनामी डाकू गौरी यादव गैंग ने रंगदारी वसूलने के लिए चेकडैम के निर्माण कार्य को रुकवाकर चार लाख रुपये की मांग की.

रविवार 3 जनवरी को चित्रकूट के बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के ददरी वन बीट क्षेत्र में डाई चेकडैम का निर्माण कार्य हो रहा है. शाम को मनरेगा के तहत दो दर्जन मजदूर काम कर रहे थे. कुछ देर बाद ही आधा दर्जन असलहाधारी डाकू पहुंचे और मजदूरों को धमकाते हुए काम बंद करा दिया. इस दौरान मौके पर मौजूद वन विभाग के वाचर जमुनिहाई निवासी मथुरा प्रसाद और बेलहरी के बंशीधर को पकड़ कर बंदूक की बटों से पीटा. वन कर्मियों की पिटाई कर रहे डाकुओं ने अपने आप को डाकू गौरी यादव गैंग का सदस्य बताया. डाकुओं ने चार लाख रुपये की रंगदारी पहुंचाने के बाद ही काम शुरू करने की धमकी देते हुए चले गए. डाकुओं के जाने के बाद पिटाई से घायल वन वाचरों ने मोबाइल से अफसरों को जानकारी दी. सूचना पर मौके पर डीएफओ कैलाश प्रकाश और मारकुंडी वन रेंजर रमेश यादव अन्य अफसरों और कर्मियों के साथ पहुंचे. बहिलपुरवा थाना प्रभारी दीनदयाल सिंह भी पुलिस फोर्स के साथ पहुंच गए. डीएफओ कैलाश ने घटना की जानकारी चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल को दी. अंकित मित्तल बताते हैं, “डकैतों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है. जंगलों में पुलिस बल कॉम्बिंग कर रही है. जल्द ही पुलिस डकैतों को पकड़ने में कामयाब हो जाएगी.” डकैत गौरी यादव गैंग ने जिस अंदाज में सिर उठाना शुरू किया है उससे पुलिस महकमा अलर्ट हो गया है. यूपी और मध्य प्रदेश की पुलिस टीमें जंगलों में सर्चिंग कर इस पर लगाम लगाने का प्रयास कर रही हैं. चित्रकूट एसपी अंकित मित्तल व सतना एसपी धर्मवीर सिंह के निर्देश पर बहिलपुरवा मारकुंडी के अलावा मध्य प्रदेश के नयागांव व मझगवां क्षेत्र में पुलिस टीमें नियमित जंगली क्षेत्र में भ्रमणशील हैं.

डाकू गौरी यादव गैंग पर यूपी और मध्य प्रदेश के कई थाना क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. लगभग दस साल पहले दिल्ली से भागे एक अपराधी को पकड़ने जब दिल्ली पुलिस की टीम चित्रकूट के बेलहरी गांव के पास पहुंची थी तो इसी गैंग ने पुलिस पर फायरिंग झोंक दी थी जिससे दरोगा भगवान राम की मौत हो गई थी. कुख्यात डाकू ददुआ ठोकिया व बबुली कोल के मारे जाने के बाद ऐसा लगने लगा था कि यह इलाका डकैतों के प्रभाव से मुक्त हो गया है. इसी बीच पिछले वर्ष मानिकपुर विधानसभा का उपचुनाव भी डकैतों के फरमान से अछूता रहा था. बुंदेलखंड के बीहड़ों में बादशाहत कायम करने के बाद डकैतों ने राजनीति में भी पर्दे के पीछे से अपना खेल खेला. बांदा के सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित बताते हैं, "डकैतों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए खुद नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए इनकी शरण ली. डकैतों ने अपने समर्थक नेताओं के लिए बीहड़ से फरमान जारी किया जिसकी नाफरमानी करना जानलेवा खतरा मोल लेना था." पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्ता पर आरोप है कि ददुआ ने 2004 में इन्हें लोकसभा चुनाव लड़वाया था. 2005 में ददुआ का बेटा वीर सिंह पटेल चित्रकूट जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुआ. वीर सिंह चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक निर्वाचित हुए थे. ददुआ का भाई बाल कुमार पटेल मिर्जापुर से सपा सांसद और बाल कुमार का लड़का राम सिंह प्रतापगढ़ के पट्टी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे. ददुआ के चाचा शिव संपत चित्रकूट के मऊ थाना क्षेत्र के तहत आने वाले एक गांव में साल 1990 से 2000 तक लगातार प्रधान रहे थे.

सपा ही नहीं बसपा में भी ददुआ के संपर्क रहे. पूर्व मायावती सरकार में ग्राम्य विकास मंत्री रहे और मऊ-मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक दद्दू प्रसाद और चित्रकूट- बांदा लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सपा सांसद आर. के. पटेल पर थाना मानिकपुर में डाकू ददुआ से संपर्क रखने का मुकदमा दर्ज है. ददुआ के नक्शे कदम पर ठोकिया ने भी अपने परिवार वालों को राजनीति में उतारा. 2005 में ठोकिया ने अपनी चाची सरिता पटेल को कर्वी ब्लॉक प्रमुख के पद पर निर्विरोध निर्वाचित कराया. दो साल बाद ठोकिया ने अपनी मां पियरिया देवी को विधानसभा चुनाव में नरैनी से लड़वाया लेकिन वह हार गईं. पाठा के बीहड़ों में आतंक का पर्याय बने बलखड़िया ने भी जारी रखा. 2010 के पंचायत चुनाव में बलखड़िया ने लखनपुर गांव से अपनी पत्नी लक्षमनिया को प्रधान का चुनाव लड़वाया लेकिन वह मात्र 10 वोटों से चुनाव हार गईं थीं. चित्रकूट में तैनात एक पुलिस अधिकारी बताते हैं कि गौरी गैंग द्वारा अचानक हिंसक वारदातों को तेज करने के पीछे की मंशा आगामी पंचायत चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी हनक कायम करने की है, ताकि वह अपने आतंक का इस्तेमाल चुनाव में कर सके.

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