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कोरोना मरीजों को रुला रही ऑक्सीजन

ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ने से न केवल इसके रेट में काफी इजाफा हुआ है बल्कि‍ इसकी सप्लाई भी बाधि‍त हुई है.

मरीजों के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हुई है (फोटोः आशीष मिश्र) मरीजों के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हुई है (फोटोः आशीष मिश्र)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही ऑक्सीजन की खपत बढ़ गई है
  • ऑक्सीजन की कमी के चलते एंबुलेंस संचालकों को भी परेशानी हो रही है
  • अस्पतालों के बढ़े शुल्क ने मरीजों का दर्द और बढ़ा दिया है

उत्तर प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने का असर अब ऑक्सीजन की खपत में भी दिखने लगा है. ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ने से न केवल इसके रेट में काफी इजाफा हुआ है बल्कि‍ इसकी सप्लाई भी बाधि‍त हुई है. उदाहरण के तौर पर झांसी जिले को ही लीजिए. यहां के रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों के आइसीयू में भर्ती कोविड मरीजों के लिए 150 से 200 ऑक्सीजन सिलिंडरों की जरूरत पड़ती थी जो बढ़कर अब 500 सिलिंडर से अधि‍क हो गई है. झांसी में इंदौर और भोपाल से ऑक्सीजन सप्लाई का कच्चा माल आता है. झांसी में कुल चार सप्लायर मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों को ऑक्सीजन की सप्लाई करते हैं. जिले के गोरामछिया और बिजौली में दो ऑक्सीजन सप्लाई प्लांट भी लगे हैं. यहां से सिलिंडरों के जरिए अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है. मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण झांसी में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधि‍त हो गई है. इसने ऑक्सीजन सिलिंडरों के दाम में भी काफी इजाफा कर दिया है. झांसी के एक निजी अस्प्ताल संचालक डॉ. विवेक गर्ग बताते हैं, “झांसी में सौ प्रेशर वाला जो ऑक्सीजन सिलिंडर मार्च-अप्रैल में 120 रुपए में मिल जाता था वह अब 500 रुपए में मिल रहा है.“

ऑक्सीजन की कमी के चलते एम्बुलेंस संचालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सरकारी एंबुलेंस को तो किसी तरह ऑक्सीजन मिल पा रही है लेकिन नि‍जी एंबुलेंस का ऑक्सीजन मिलना लगभग बंद हो गया है. आगरा शहर में तो सिलिंडर सप्लाई करने वालों ने हाथ खड़े कर दिए हैं. यहां के एक सप्लायर सुनील शर्मा बताते हैं, “ऑक्सीजन प्लांट दिल्ली, नोएडा, गाजिबाद, पानीपत में हैं. यहीं से एनसीआर, आगरा समेत आसपास के जिलों में ऑक्सीजन सप्लाई होती है. इन जिलों के कुछ प्लांट ने मरम्मत करने के लिए शटडाउन ले लिया है जिस वजह से डिमांड के मुताबिक ऑक्सीजन सप्लाई बाधि‍त हो गई है.” आगरा के सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के एक चिकित्सक बताते हैं, “कोविड के सभी गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है. इसके अलावा सांस, कैंसर और अन्य बीमारियों से पीडि़त अस्पताल में भर्ती या घर में रह कर इलाज करा रहे रोगियों को भी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है. इस वजह से ऑक्सीजन की डिमांड में लगातार इजाफा हो रहा है.” आगरा में मरीजों को सस्ते दाम पर ऑक्सीजन का सिलिंडर मुहैया कराने में लगी संस्था के स्वयंसेवक सुनिल विकल के मुताबिक, ऑक्सीजन की कमी होने से नए मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर देने में समस्या आ रही है. आगरा के सहायक औषधि‍ आयुक्त ए.के. जैन कहते हैं, “नोएडा स्थि‍त एक कंपनी के प्लांट से आगरा में ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है. यह कंपनी गाजियाबाद में भी एक नया ऑक्सीजन प्लांट शुरू करने जा रही है. इसके बाद से सितंबर के अंत तक आगरा में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता हो पाएगी.”

ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे मरीजों का दर्द अस्पतालों के बढ़े शुल्क ने और बढ़ा दिया है. ऑक्सीजन सप्लाई के नाम पर निजी अस्पतालों में 800 रुपए से लेकर एक हजार रुपए तक लगने वाला चार्ज बढ़कर 3,000 से लेकर 3,500 रुपए तक हो गया है. एंबुलेंस चालकों ने भी ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ एंबुलेंस ले जाने पर 500 रुपए से एक हजार रुपए तक चार्ज बढ़ा दिए हैं. फूड सेफ्टी ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार बताते हैं, “ दूसरे राज्यों से ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से कीमतों में इजाफा हुआ है. अस्पतालों के अलावा किसी अन्य इंडस्ट्री को ऑक्सीजन न सप्लाई करने के आदेश दिए गए हैं. मनमर्जी कीमत वसूलने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी.”

ऑक्सीजन का अर्थशास्त्र

#छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर में 1.5 क्यूबिक मीटर और बड़े में 7 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन आती है. अस्पतालों द्वारा ली जाने वाली सुरक्षा राशि‍ छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए 5,500 रुपए और बड़े सिलिंडर के लिए 10 हजार रुपए है.

#छोटा ऑक्सीजन सिलिंडर 130 रुपए के आसपास रीफि‍ल होता है जबकि बड़ा 310 से 325 रुपए में. नि‍जी उपयोग के लिए घर ले जाने पर क्रमश: छह हजार या दस हजार रुपए प्रति सिलिंडर के हिसाब से सिक्युरिटी मनी जमा होती है.

#सामान्य दिनों में एक बड़े शहर में 250 से 300 बड़े सिलिंडर की खपत प्रतिदिन होती थी जो बढ़कर अब 800 से 900 सिलिंडर रोज पर पहुंच गई है. एक मरीज कम से कम दो दिन बड़ा सिलिंडर का उपयोग करता है. छोटे सिंलिंडर की खपत भी औसतन 300 रोज तक पहुंच गई है. इनका उपयोग ज्यादातर घरों में हो रहा है.

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