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कायम हैं चिराग के तेवर

लोजपा नेता चिराग पासवान ने नीतीश सरकार की खामियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री को न सिर्फ पत्र लिखा है बल्कि आर-पार की लड़ाई के लिए 16 सितंबर को पार्टी की बैठक तक बुला ली है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार चुनाव से पहले एनडीए में कलह तेज होता जा रहा है
  • नीतीश सरकार की खामियों को लेकर चिराग ने प्रधानमंत्री को में पत्र लिखा है
  • लोजपा 4 दर्जन से अधिक उन सीटों पर भी उम्मीदवार उतार सकती है जो जद (यू) के खाते में जाएंगी

बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) कुनबे में कलह तेज होता जा रहा है. लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने नीतीश सरकार की खामियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री को न सिर्फ पत्र लिखा है बल्कि आर-पार की लड़ाई के लिए 16 सितंबर को पार्टी की बैठक तक बुला ली है.

लोजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इस बात की पुष्टि की है कि पार्टी के नेता चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है. चूंकि यह गोपनीय खत है इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है. सूत्रों का कहना है कि पत्र में इस बात की जिक्र किया गया है कि किस तरह से कोरोना के दौरान लोगों की समस्याओं की तरफ बिहार सरकार ने ध्यान नहीं दिया और बाढ़ के दौरान भी लोगों के राहत के लिए गंभीर प्रयास नहीं हुए. राशन कार्ड बनाने से लेकर, पुलिस में मामला दर्ज कराने और कोई भी सरकारी काम बिना रिश्वत के नहीं होने आदि बातों का भी जिक्र किया गया है. पत्र में 7 सितंबर को हुए लोजपा की बैठक में पार्टी को मिले फीडबैक का भी जिक्र किया गया है.

लोजपा के नेता यह कह रहे हैं कि भाजपा किसे सीएम प्रोजेक्ट करती है यह उसका काम है. सीएम के उम्मीदवार को लेकर पार्टी की कोई शिकायत नहीं है. पार्टी का मामना है कि जो मौजूदा स्थति है उसमें चुनाव के दौरान एनडीए को नुक्सान हो सकता है. 16 सितंबर को बैठक क्यों बुलाई जा रही है, लोजपा के एक नेता कहते हैं, “पिछली बैठक में पार्टी ने 143 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की बात की थी, इसको लेकर आगे क्या किया जाए इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है.” माना जा रहा है कि सीट शेयरिंग की घोषणा होने के बाद लोजपा 4 दर्जन से अधिक उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है जो जद (यू) के खाते में जाएं. विदित हो कि 2005 में लोजपा जब राजद के साथ थी उस वक्त भी पार्टी ने राजद प्रत्याशियों के खिलाफ कई सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए थे, जिससे चुनाव में जद (यू)-भाजपा को सफलता हाथ लगी थी.

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