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इंसेफेलाइटिस की तर्ज पर कोरोना से बचाए जाएंगे मासूम

पूर्वांचल में महामारी का रूप ले चुकी इंसेफेलाइटिस को नियंत्रण में करने के बाद योगी सरकार इसी तर्ज पर यूपी के सभी जिलों में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) खोलने की तैयारी कर रही है. कोरोना की संभावित तीसरी लहर में कारगर साबित होंगे पीआइसीयू.

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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बना पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बना पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में बच्चों के लिए 100 बेड का आईसीयू तैयार रखने का निर्देश दिया है
  • हर मंडल मुख्यालय पर 100-100 बेड का और जिला अस्पतालों में 25-25 बिस्तरों की क्षमता वाला का आईसीयू बनेगा
  • आयुष विभाग अपने सभी अस्‍पतालों में बच्‍चों के स्वास्थ्य को लेकर एक हेल्‍प डेस्‍क बनाने जा रहा है. साथ ही आयुष कवच ऐप पर बच्‍चों की सेहत से जुड़ा एक नया फीचर जुड़ेगा

विशेषज्ञ कोरोना की संभावित तीसरी लहर के प्रति बच्चों को अधिक संवेदनशील बता रहे हैं. इन आशंकाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में बच्चों को ऐसी किसी संभावित लहर से बचाने के लिए पहले से ही युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू की गई हैं. दिमागी बुखार से बच्चों की आकाल मौत रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मार्च 2017 में यूपी की सत्ता संभालते ही युद्ध स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए थे. पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) और सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) तक इंसेफेलाइटिस को केंद्र में रखकर स्वास्थ्य सुविधाओं की बुनियादी संरचना को मजबूत किया गया. पूर्वांचल के तीन दर्जन से अधिक संवेदनशील जिलों में रोकथाम को लेकर सफाई और स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया, उससे इंसेफेलाइटिस तकरीबन खत्म होने के कगार पर है. अब इंसेफेलाइटिस उन्मूलन के ये अनुभव योगी सरकार कोराना से बच्चों को बचाने में उपयोग कर रही है. इंसेफेलाइटिस नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाने वाले पीकू (पीडियाट्रिक्स इंटेंसिव केयर यूनिट) प्रोजेक्ट को पूरे प्रदेश में कोरोना से बच्चों को बचाने के लिए लागू किया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में बच्चों के लिए 100 बेड का आईसीयू तैयार रखने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री ने हर मंडल मुख्यालय पर 100-100 बेड का और जिला अस्पतालों में 25-25 बिस्तरों की क्षमता वाला का आईसीयू बनाने को कहा है. इसके साथ ही तय समय में जरूरी और दक्ष मानव संसाधन  का बंदोबस्त करने का भी अधि‍कारियों को निेर्देश दिया है. इंसेफेलाइटिस से मासूमों को बचाने के करीब चार दशक लंबे अनुभव के मद्देनजर बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिर्विसिटी के डॉक्टर पीकू के संचालन के लिए प्रदेश के अन्य चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग देगें. मालूम हो कि प्रदेश के करीब तीन दर्जन जिलों खासकर गोरखपुर और बस्ती मंडल के सभी जिलों में पिछले चार दशक से मासूमों के लिए काल बनी इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों में अब 95 फीसद की गिरावट आ चुकी है.

कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए समेकित प्रयास भी शुरू किए गए हैं. आयुष विभाग ने भी कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. आयुष विभाग अपने सभी अस्‍पतालों में बच्‍चों के स्‍वस्‍थ्‍य को लेकर एक हेल्‍प डेस्‍क बनाने जा रहा है. साथ ही आयुष कवच ऐप पर बच्‍चों की सेहत से जुड़ा एक नया फीचर भी जोड़ने जा रहा है. मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने आयुष विशेषज्ञों से आयुर्वेद की पुरानी परम्‍पराओं से कोरोना संक्रामित लोगों के इलाज की बात कहीं थी. इसके बाद से आयुष विभाग लगातार होमआइसोलेटेड मरीजों को आयुर्वेदिक दवाएं, काढ़ा आदि वितरित करा रहा है. अब आयुष विभाग ने अब संभावित कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी शुरू कर दी है. आयुष विभाग के प्रभारी अधिकारी डॉ. अशोक कुमार दीक्षित के मुताबिक कोरोना काल में आयुष कवच मोबाइल ऐप लोगों में काफी लोकप्रिय हुआ है. ढ़ाई लाख से अधिक लोग इसका इस्‍तेमाल कर रहे हैं.

उन्‍होंने बताया कि आयुष कवच ऐप पर जल्‍दी बच्‍चों की सेहत से जुड़ा एक फीचर जोड़ने की तैयारी चल रही है. इसमें बच्‍चों की सेहत का मौसम के हिसाब से कैसे ख्‍याल रखें, किस तरह से बच्‍चों में रोग प्रतिरोधक क्षमताओं को बढ़ाया जाए, कौन-सी घरेलू औषद्यीय के जरिए उनकी सेहत बेहतर बनाए, इसकी जानकारी लोगों को दी जाएगी. डॉ. अशोक बताते हैं कि प्रदेश में आयुष विभाग के करीब 2,104 चिकित्‍सालय हैं. इनमें से लखनऊ, बनारस, पीलीभीत समेत अन्‍य जिलों में 8 बड़े अस्‍पताल है. इन सभी अस्‍पतालों में बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी एक हेल्‍पडेस्‍क बनाई जाएगी. जहां पर आयुष डॉक्‍टर लोगों को बच्‍चों की सेहत और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाई जाए इसकी जानकारी देंगे. इसके अलावा यहां से बच्‍चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का वितरण भी किया जाएगा. अस्‍पतालों में ओपीडी खुलने पर बच्‍चों का इलाज भी यहां शुरू किया जाएगा.

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