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शख्सियत: बिजली की सूरत और सीरत बदलते श्रीकांत

यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रदेश में ‘सस्ती और क्लीन एनर्जी’ के लिए बिजली की लाइन हानि रोकने का एक बड़ा अभि‍यान शुरू किया है. पहली बार यूपी ऐसा राज्य बना है जिसके पास सरप्लस बिजली है.

श्रीकांत शर्मा (फोटोः आशीष मिश्र) श्रीकांत शर्मा (फोटोः आशीष मिश्र)

लखनऊ के अशोक मार्ग पर स्थित शक्ति-भवन के 15वें तल पर यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का कक्ष है. यहां रोज सुबह ठीक नौ बजे श्रीकांत शर्मा पहुंचकर अपना काम शुरू कर देते हैं. कक्ष में इनकी कुर्सी के ठीक सामने एक बड़ी-सी टीवी स्क्रीन पल-पल यूपी में बिजली की मांग और उपलब्धता की जानकारी देती रहती है. यह बता रही है कि 16 जुलाई को यूपी में 22,873 मेगावाट की अब तक की उच्चतम बिजली की मांग थी जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया है. 17 जुलाई को 17,966 मेगावाट डिमांड है जबकि कहीं रोस्टिंग नहीं है इसे भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया है. टीवी स्क्रीन के बगल की दीवार बिजली की मांग और सप्लाई को दर्शाते हुए चार्ट और ग्राफि‍क्स से पटी है. यह दीवार यूपी में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग और उसे पूरा किए जाने के लिए श्रीकांत के बनाए रोडमैप की हल्की सी झलक देती है. श्रीकांत ने वर्ष 2030 तक यूपी में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने का रोडमैप बना रखा है. वर्ष 2030 में यूपी में बिजली की औसत मांग 31,613 मेगावाट पर पहुंच जाएगी और यूपी के पास उस समय 28,398 मेगावाट बिजली रहेगी.

फि‍लहाल श्रीकांत 17 जुलाई की दोपहर साढ़े 12 बजे शक्ति भवन के अपने कार्यालय कक्ष में बिजली की लाइन हानि रोकने के लिए शुरू किए गए प्रयासों के बारे में अधि‍कारियों से फीडबैक ले रहे थे. श्रीकांत ने यूपी के सभी सांसदों, विधायकों, ग्राम प्रधानों, मजरे के ग्राम पंचायत सदस्यों को पत्र लिखकर लाइन हानि रोकने के लिए बिजली विभाग के अभि‍यान में शामिल होने का निवेदन किया है. यूपी में अभी 30 प्रतिशत लाइन लॉस है जिसे 15 प्रतिशत पर लाने का अभि‍यान श्रीकांत शर्मा ने शुरू किया गया है. उन्होंने हर जिले में बिजली विभाग और विजिलेंस को 30-30 फीडर दिए हैं. विजिलेंस को फीडर से जुड़ी ‘ए .टी. एंड सी. लॉस’ (कुल तकनीकि एवं कमर्शियल लॉस) कम करने का लक्ष्य दिया गया है. इसी क्रम में बिजली चोरी को रोकने के लिए यूपी के हर जिले में 75 बिजली थाने खोले गए हैं. हर थाने में इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल तक के कुल 28 कर्मचारियों को तैनात किया गया है.

प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली हानि वाले फीडर कई तरह के हैं. एक वे हैं जहां मौजूद कनेक्शन के अनुपात में काफी कम लोगों को बिजली का बिल भेजा जा रहा है. ऐसे फीडर की व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी बिजली विभाग को मिली है. ऐसे फीडर जहां बिजली बिल तो भेजा जा रहा है लेकिन इसका भुगतान कम लोग कर रहे हैं. इनकी जिम्मेदारी विजिलेंस को दी गई है. अपवादस्वरूप कुछ बिजली उपभोक्ता ऐसे भी हैं जो किसी सब स्टेशन से जुड़े हैं, यह मालूम नहीं है. पहली बार बिजली विभाग के सभी उपभोक्ता की टैगिंग करने का सघन अभि‍यान भी शुरू किया गया है. श्रीकांत शर्मा हर बुधवार को पॉवर कार्पोरेशन की सभी वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रबंध निदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रहे हैं. इसमें ‘लाइन लॉस’ को कम करने का मुख्य एजेंडा है.

बिजली विभाग और विजिलेंस को 90 दिनों का समय दिया गया है. इसमें सघन अभि‍यान चलाकर सौ फीसद बिलिंग, सभी उपभोक्ताओं की टैगिंग और बिजली चोरी को रोकने की कार्यवाही करनी है. 90 दिन में अगर इन फीडर में लाइन लॉस 15 प्रतिशत से कम होता है तो इनपर 24 घंटे बिजली देना शुरू कर दिया जाएगा. यह पूरा अभि‍यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभि‍यान से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री मोदी के ‘कमिटमेंट’ के 16 बिंदुओं में से पांचवां बिंदु “सस्ती और क्लीन एनर्जी” को पूरा करने की दिशा में भी यूपी ने तेजी से कदम बढ़ाया है. सस्ती बिजली के लिए घाटा कम होना पहली शर्त है. घाटा तभी कम होगा जब ‘ए. टी. एंड सी. लॉस’ और लाइन हानियां कम होंगी. श्रीकांत शर्मा ने सभी फीडर का चरणबद्ध तरीके से ‘ए. टी. एंड सी. लॉस’ और लाइन हानि कम करने का प्रयास शुरू किया गया है.

इस अभि‍यान में गांव के लोगों को ‘इनसेंटि‍व’ देने का भी प्रावधान है. उस गांव को 24 घंटे बिजली दी जाएगी जो जितना बिजली उपभोग कर रहा है उतना बिल दे रहा है. जहां पर लाइन हानि 15 प्रतिशत से कम होगी. यहां पर प्राथमिकता के तौर पर जर्जर तार बदला जाएगा. इस गांव में बिजली की जितनी डिमांड या लोड है उससे 40 फीसद ज्यादा क्षमता का ट्रांसफॉरमर लगाया जाएगा. इससे ओवरलोड होने का कोई खतरा ही नहीं रहेगा.

यूपी के ग्रामीण इलाकों में कुल 48 सौ फीडर हैं. श्रीकांत शर्मा ने इसमें से 40 फीसद को अलग करा दिया गया है. पहली बार ग्रामीण इलाके में घरेलू और कृषि‍ कार्य के लिए अलग-अलग फीडर हो गए हैं. ‘एग्रीकल्चर फीडर’ गांव से नहीं जुड़े हैं. इस फीडर से जुड़े किसानों को सुबह सात से शाम पांच बजे तक बिजली मिलती है जिससे वह अपने खेती से जुड़े काम को निबटाता है. ग्रामीण इलाकों में ‘एग्रीकल्चर’ और ‘डोमेस्टियक’ फीडर के अलग-अलग होने का फायदा यह है कि अब ट्रांसफॉरमर जलने की शि‍कायतें कम हुई हैं. इस प्रकार हर 90 दिन में हर जिले में 60 फीडर पर होने वाली लाइन हानि को 15 फीसद से नीचे लाने का प्रयास शुरू हुआ है. इस तरह डेढ़ साल में यूपी के सभी फीडर पर लाइन हानियों को कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

ऐसे कई पूर्व प्रयासों से यूपी ऐसा राज्य बन गया है जिसके पास सरप्लस पॉवर है. वर्ष 2020 में बिजली की 15,609 मेगावाट की औसत मांग है और इसकी तुलना में 17,956 मेगावाट बिजली मौजूद है. श्रीकांत शर्मा ने उपभोक्ता को बिजली कैसे पहुंचाई जाए? इसका प्रबंधन किया. आज यूपी के बिजली विभाग की आयात क्षमता 13,500 मेगावाट पर पहुंच गई है. यानी ‘क्राइसिस’ में जरूरत पड़ने पर यूपी 13,500 मेगावाट बिजली खरीद सकता है. मार्च, 2017 में यूपी की बिजली आयात क्षमता 8,000 मेगावाट थी.

वर्तमान में यूपी 9,000 मेगावाट बिजली बाहर से खरीद रहा है. केंद्र सरकार ने बिजली खरीदने और बेचने के लिए “दीप पोर्टल” लॉन्च किया है. इसके जरिए सस्ती बिजली खरीदी जा रही है. बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पॉवर का ‘वेस्टर्न कॉरिडोर’ भी खोला गया है. 2,800 मेगावाट बिजली इसी के जरिए ली जा रही है. यूपी में पॉवर ग्रिड की क्षमता भी बढ़ाई गई है. आज यूपी में ग्रिड की क्षमता 24,500 मेगावाट है. जब यूपी में भाजपा की सरकार बनी थी तब ग्रिड की क्षमता 16,500 मेगावाट थी. श्रीकांत शर्मा का प्रयास है कि बिजली का टैरिफ आगे और न बढ़े. टैरिफ बढ़ने का सबसे ज्यादा नुकसान उस उपभोक्ता को होता है जो समय पर बिजली बिल भुगतान कर रहा है. श्रीकांत‍ ने सभी उपभोक्ताओं से बिजली बिल वसूली की तैयारी की है. घर में आने वाला बिजली मीटर रीडर ही बिल जमा कर ले. इसके अलावा राशन की दुकानों और स्वयं सहायता समूह भी बिजली बिल जमा करा सकेंगे. ऐसे कई प्रयासों से श्रीकांत शर्मा यूपी के यूपी का पॉवर कार्पोरेशन को आर्थिीक रूप से स्वावलंबी बनाने की मुहिम में जुट चुके हैं.

यूपी के बिजली विभाग को नई पहचान दिलाने में जुटे श्रीकांत शर्मा मथुरा जिला मुख्यालय से 24 किलोमीटर दूर गोवर्धन तहसील के गांठुली गांव के रहने वाले हैं. इनके पिता राधारमण शर्मा गांव के ही पास 'महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज' में अध्यापक थे. इसी कॉलेज से श्रीकांत ने इंटर तक पढ़ाई की. श्रीकांत को बचपन से क्रिकेट का शौक था और यह क्रिकेटर बनना चाहते थे. इंटर की पढ़ाई करने के बाद कुछ समय मथुरा में भी पढ़े लेकिन बाद में आगे की पढ़ाई करने वर्ष 1989 में श्रीकांत दिल्ली चले आए. यहां डीएवी कॉलेज के नॉर्थ कैंपस में बीए (आनर्स) में दाखि‍ला लिया. कॉलेज में दाखि‍ला लेने के पहले ही दिन श्रीकांत अखि‍ल भारतीय विद्यार्थी परिषद की टोली के संपर्क में आए. चूंकि श्रीकांत शर्मा संघ की पृष्ठभूमि से थे. इनके पिता जी भी संघ से जुड़े थे इसलिए श्रीकांत के लिए विद्यार्थी परिषद का सदस्य बनना कोई नई बात नहीं थी. विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आते ही श्रीकांत ने 'चलो कश्मीर आंदोलन' में भाग लिया और गिरफ्तारी भी दी.

श्रीकांत 1995 तक विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक सदस्य रहे. इस दौरान 1991-92 में यह डीएवी कालेज के छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे. इसके तुरंत बाद यह दिल्ली में विधार्थी परिषद के आठ विभाग में से एक के विभाग प्रमुख बन गए. वर्ष 1996 में यह दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा में महामंत्री बने. दो साल बाद श्रीकांत ने भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय टीम में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में प्रवेश लिया. इस दौरान श्रीकांत ने मीडिया का काम भी देखा. मीडिया से बेहतर सांमजस्य बनाने के कारण श्रीकांत की भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया टीम में सदस्य के रूप में एंट्री हुई.

वर्ष 2007 में श्रीकांत शर्मा और (वर्तमान में राष्ट्रपति) रामनाथ कोविंद की टोली यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा का मीडिया प्रबंधन करने को दिल्ली से लखनऊ भेजी गई. विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि होने के कारण श्रीकांत शर्मा ने मीडिया टीम के सदस्य के रूप में अच्छी छाप छोड़ी. इसी की बदौलत श्रीकांत को वर्ष 2009 में भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया टीम का सह संयोजक बनाया गया. वर्ष 2012 में श्रीकांत शर्मा राष्ट्रीय मीडिया टीम के संयोजक के बने. भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया टीम के प्रभारी श्रीकांत शर्मा और तत्कालीन राष्ट्रीय प्रवक्ता (वर्तमान में केंद्र सरकार में वित्त मंत्री ) निर्मला सीतारमण को गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान मीडिया का काम देखने की जिम्मेदारी मिली. यही वह समय था जब श्रीकांत शर्मा ने अपने काम से नरेंद्र मोदी और अमित शाह की शाबाशी बटोरी थी.

लोकसभा चुनाव-2014 के बाद केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने श्रीकांत शर्मा को पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के साथ राष्ट्रीय मीडिया सेल की जिम्मेदारी सौंपी. भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया टीम को हाइटेक करने का पूरा श्रेय श्रीकांत शर्मा को ही जाता है. श्रीकांत ने भाजपा का यूट्यूब चैनल लॉन्च किया. देश में भाजपा पहली पार्टी थी जिसने सबसे पहले अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च किया था. श्रीकांत ने ही भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया टीम के साथ राज्य मीडिया सेल की कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन किया. इसी कड़ी में श्रीकांत शर्मा ने मीडिया सेल को रियल टाइम टीवी न्यूज मॉनिटरिंग, रियल टाइम फीडबैक, मीडिया को लाइव फीड और एसएमएस प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं से लैस किया. इससे भाजपा के राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरीय पदाधि‍कारियों के साथ बेहतर संचार और समन्वय सुनिश्च‍ित हो सका.

श्राकांत वर्ष 2014 से 2016 तक हिमाचल प्रदेश के प्रभारी भी रहे. मार्च, 2017 में यूपी के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने श्रीकांत शर्मा को मथुरा से प्रत्याशी बनाया. श्रीकांत चुनाव जीते और यूपी की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. आज श्रीकांत शर्मा ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में पूरी सक्रियता से अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. शक्ति‍ भवन में इनके कार्यालय कक्ष में श्रीकांत की मेज-कुर्सी के बराबर में एक डायनिंग टेबल भी रखा है. असल में श्रीकांत अपने दफ्तर में कभी अकेले नहीं बल्कि विभाग के सहयोगियों के साथ भोजन करते हैं. लोगों के साथ यही जुड़ाव श्रीकांत की पूंजी है.

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