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शख्स‍ियत: संस्कृत का वाचस्पति बनाने की मुहिम

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र ने मिस्ड कॉल के जरिए महज 20 घंटे में संस्कृत सिखाने की अनोखी योजना शुरू की है. इसमें किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है. इसके अलावा यूपी में सस्कृत भाषा को आम जन से जोड़ने के लिए कई अन्य योजनाओं ने भी आकार लिया है.

डॉ. वाचस्पति मिश्र डॉ. वाचस्पति मिश्र
स्टोरी हाइलाइट्स
  • संस्कृत को वैकल्प‍िक विषय लेकर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अर्भ्थ‍ियों के लिए संस्कृत संस्थान ने शुरू की विशेष कक्षाएं. तीन हजार रुपए प्रतिमाह छात्रवृत्त‍ि की भी व्यवस्था
  • यूपी के 12 हजार प्राइमरी शि‍क्षकों को संस्कृत भाषा सिखाई जा चुकी है. ये शिक्षक हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, गणि‍त जैसे विषयों के हैं
  • एक महीने में संस्कृत में नाटक का मंचन सिख्राने के लिए नाट्य प्रशि‍क्षणशाला, वेदों को कंठस्थ करने पर 50 हजार रुपए पुरस्कार से संस्कृत को लोकप्र‍िय बनाने की पहल

लखनऊ के इंदिरा नगर में ए ब्लॉक चौराहे के पास एक निजी भवन में चल रहा उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान न्यू हैदराबाद इलाके में तैयार हो रहे नए पांच मंजिला भवन में शि‍फ्ट होने का इंतजार कर रहा है. ए ब्लॉक चौराहे के समीप अस्थाई कार्यालय में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र रोज सुबह 10 बजे पहुंचकर सबसे पहले अपना कंप्यूटर ऑन कर उसके जरिए ऑनलाइन संस्कृत कक्षाओं की गतिविधि‍यों पर नजर रखना शुरू कर देते हैं. ये वे ऑनलाइन कक्षाएं हैं जिनके जरिए लोगों को 20 घंटे में संस्कृत भाषा सिखाने की महत्वाकांक्षी योजना आकार ले चुकी है. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान जब स्कूल-कॉलेज बंद हो गए थे तो दूसरे विषयों की तरह संस्कृत की पढ़ाई भी बाधि‍त हो गई थी. इसी दौरान डॉ. वाचस्पति मिश्र और संस्कृत संस्थान के निदेशक पवन कुमार ने सोचा कि क्यों न दूसरे विषयों की तरह संस्कृत की भी ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की जाए. लेकिन एक शंका थी कि क्या विद्यार्थी संस्कृत की पढ़ाई में रुचि लेंगे.

प्रयोग के तौर पर डॉ. मिश्र और पवन कुमार ने संस्कृत संस्थान के मोबाइल नंबर 9522340003 के जरिए मिस्ड कॉल से संस्कृत सीखने की योजना को अंतिम रूप दिया. इस मोबाइल नंबर पर लोग मिस्ड कॉल करके संस्कृ‍त की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए खुद को रजिस्टर कर सकते थे. उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से संस्कृत सीखने वालों की दो कैटेगरी बनायी गई. पहले में वे लोग थे जो संस्कृत की पढ़ाई कर रहे थे और दूसरे में उन सामान्य लोगों को रखा गया जो संस्कृत भाषा सीखना चाहते थे. जुलाई के पहले हफ्ते में यह खबर लखनऊ के अखबारों में छपी. 10 जुलाई से मिस्ड कॉल के जरिए संस्कृत सीखने वालों का पंजीकरण शुरू हो गया. संस्कृत संस्थान से जारी किए गए मोबाइल नंबर पर मिस्ड कॉल देते ही उस व्यक्त‍ि के मोबाइल के मैसेज बॉक्स में गूगल फार्म का लिंक शेयर हो जाता था जिसे भरकर संस्कृत संस्थान से संस्कृत सीखने के लिए पंजीकरण हो जाता था. यह योजना इस तरह लोकप्रिय हुई कि पहले चरण के दस दिन के भीतर 20 जुलाई तक 40 हजार मिस्ड कॉल संस्कृत संस्थान के मोबाइल नंबर पर दर्ज हो गई. इनमें से 10 हजार लोगों ने फार्म भरकर पंजीकरण करा लिया. जिसमें से साढ़े आठ हजार लोगों की पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है. रोज एक घंटा चलने वाली ये कक्षाएं 20 दिन तक चलेंगी. डॉ. मिश्र का दावा है कि 20 दिन के भीतर संस्कृत संस्थान लोगों को इतनी संस्कृत भाषा सिखा देगा कि वे न केवल इसे पढ़ व समझ सकेंगे बल्कि‍ बोल भी सकेंगे.

इस योजना के तहत पंजीकृत हुए लोगों की जूम और गूगल मीट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म के जरिए कक्षाएं संचालित की जा रही हैं. इन कक्षाओं के लिए संस्कृत संस्थान किसी भी प्रकार की फीस नहीं ले रहा है. इस योजना में जो साढ़े आठ हजार लोग संस्कृत सीख रहे हैं उनमें 30 प्रतिशत महिलाएं हैं. इनके लिए संस्कृत की कक्षाओं का समय अलग से प्रतिदिन दोपहर 3 से 4 बजे तक संस्कृत संस्थान ने तय किया है. इसी तरह नौकरी पेशा वालों के लिए शाम को 6 से 7 और 7 से 8 का टाइम स्लॉट तय किया गया है. इस योजना के लिए संस्कृत संस्थान ने विशेष रूप से शि‍क्षकों को प्रशि‍क्षि‍त किया है कि वे 20 घंटे में लोगों संस्कृत सिखा दें. प्रत्येक क्लास में दो शिक्षक रहते हैं. एक पढ़ाता है तो दूसरा उसके सहायक की भूमिका में रहता है. इसके अलावा हर ऑनलाइन क्लास के लिए एक निरीक्षक की भी तैनाती की गई है. यह निरीक्षक इस बात की निगरानी करता है कि शिक्षक संस्कृत भाषा को कैसे पढ़ा रहा है और जो लोग इसे सीख रहे हैं वे ऑनलाइन कक्षा में रुचि ले रहे हैं कि नहीं. मिस्ड कॉल से संस्कृत सिखाने की योजना के पहले चरण की सफलता के बाद अब संस्कृत संस्थान कुछ अंतराल के बाद मिस्ड कॉल से संस्कृत सीखने की योजना के लिए पंजीकरण फि‍र शुरू करने की तैयारी कर रहा है. मिश्र अब ज्योतिष, कर्मकांड, पुरोहित विधा के अलावा पाली और प्राकृत भाषा को भी मिस्ड कॉल के जरिए सिखाने की योजना को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.

संस्कृत संस्थान ने पहली बार प्राइमरी स्कूलों के शि‍क्षकों को संस्कृत भाषा का प्रशि‍क्षण दिया है. बीते तीन वर्षों में हर ब्लॉक से 12 से 15 शि‍क्षकों का चयन किया जा चुका है जिन्हें संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण दिया गया जिससे कि ये न केवल संस्कृत बोलने में दक्ष हो सके हैं बल्कि‍ बच्चों को रोचक ढंग से संस्कृत सिखा भी रहे हैं. खास बात यह भी है कि ये शिक्षक अलग-अलग विषय मसलन साइंस, गणि‍त, हिंदी, अंग्रेजी जैसे विषयों के हैं. अब तक 12 हजार शि‍क्षक संस्कृत भाषा सीख चुके हैं.

इसके अलावा सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थ‍ियों के लिए भी संस्कृत संस्थान एक सहारा बना है. डॉ. वाचस्पति मिश्र ने संस्कृत संस्थान के निदेशक पवन कुमार के साथ मिलकर पिछले वर्ष जुलाई से सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थ‍ियों को संस्कृत विषय की तैयारी कराने की योजना शुरू की है. इस योजना में वही अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में संस्कृत को एक वैकल्पिक विषय के रूप में लिया है. एक बैच में 100 से ज्यादा अभ्यर्थ‍ियों का चयन किया जाता है जिसमें से 50 अथ्यर्थ‍ियों को तीन हजार रुपए छात्रवृत्त‍ि भी दी जाती है. संस्कृत संस्थान अभ्यर्थि‍यों का चयन एक परीक्षा के जरिए करता है. अबतक संस्थान दो बार परीक्षाएं आयोजित करा चुका है. इनमें चयनित हुए अभ्यर्थ‍ियों की कक्षाएं चल रही हैं. इतने कम समय पर संस्थान से संस्कृत विषय की तैयारी करने वाले चार अभ्यर्थ‍ियों का अंतिम रूप से अलग-अलग सिविल सेवा परीक्षाओं में चयन हो चुका है.

इसके लिए हर जिले में योग कक्षाएं, एक महीने में संस्कृत में नाटक का मंचन सिख्राने के लिए नाट्य प्रशि‍क्षणशाला, वेदों को कंठस्थ करने पर 50 हजार रुपए पुरस्कार की योजना शुरू करके डॉ. वाचस्पति मिश्र ने यूपी संस्कृत संस्थान को नई पहचान दिलाई है. संस्कृत के उत्थान में लगे डॉ. वाचस्पति मिश्र के पूर्वज तो फर्रुखाबाद के रहने वाले थे लेकिन इनका जन्म मेरठ में हुआ था. मेरठ के सिवालखास विधानसभा क्षेत्र में भोला की झाल इलाके में चलने वाले प्रतिष्ठ‍ित गुरुकुल प्रभात आश्रम से इन्होंने प्रारंभिक शि‍क्षा प्राप्त की. इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.फिल. और पीएचडी की है. वर्तमान में डॉ. मिश्र मेरठ कॉलेज में संस्कृत विभागाध्यक्ष हैं. रक्षाबंधन पर्व पर मनाए जाने वाले संस्कृत दिवस पर डॉ. वाचस्पति मिश्र कम आयुवर्ग वाले लोगों का संस्कृत भाषा में अनोखा कवि सम्मेलन कराने के साथ ऐसे लोग जो नि:स्वार्थ भाव से संस्कृत भाषा की उन्नति में लगे हैं, उनको संबल देने की योजना बना रहे हैं. 

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