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कोरोना संक्रमितों का नहीं हुआ 'आयुष्मान भव'

यूपी में कोरोना संक्रमण के‍ इलाज में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना गरीबों को कोई लाभ नहीं दिला पायी है. निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को कोविड-19 का इलाज देने में रुचि नहीं ली.

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प्रतीकात्मक फोटा (पीटीआइ) प्रतीकात्मक फोटा (पीटीआइ)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रयागराज में करीब डेढ़ दर्जन निजी अस्पताल होने के बावजूद किसी में भी आयुष्मान योजना के तहत कोरोना से संक्रमित गरीब मरीज के इलाज होने की सूचना नहीं है
  • आजमगढ़ में कोरोना की पहली लहर के दौरान 70 और दूसरी लहर में 50 आयुष्मान योजना के लाभार्थ‍ियों को कोविड का इलाज मिला है
  • महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. डी. एस. नेगी ने सभी मंडलों के स्वास्थ्य अपर निदेशकों को पत्र लिखकर आयुष्मान योजना में कोविड मरीजों को मिले इलाज का ब्योरा मांगा है

कोरोना संक्रमण के‍ इलाज में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना गरीबों को कोई लाभ नहीं दिला पायी है. आलम यह है कि निजी अस्पताल में एक भी मरीज को आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं मिल पाया है. उदाहरण के तौर पर प्रयागराज जिले को ही लीजिए. यहां 3,14,893 आयुष्मान कार्ड धारक हैं. प्रयागराज में एक लाख अधि‍क लोग कोरोना से संक्रमित हुए. इनमें से 65 हजार से अधि‍क तो घर पर ही इलाज से ठीक हो गए. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल के दूसरे हफ्ते में बीमारी जब अपनी पूरी तेजी पर थी तब प्रयागराज के सरकारी ही नहीं निजी अस्पताल भी मरीजों से भर गए थे. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रयागराज में करीब डेढ़ दर्जन निजी अस्पताल होने के बावजूद किसी में भी आयुष्मान योजना के तहत कोरोना से संक्रमित गरीब मरीज के इलाज होने की सूचना नहीं है. नर्सिंग होम एसोसिएशन के पदाधि‍कारी कहते हैं कि आयुष्मान योजना के लिए चिन्ह‍ित हर अस्पताल में ऐसे गरीब मरीजों के लिए बेड आरक्षि‍त रहते हैं. आयुष्मान योजना का मरीज निजी अस्पताल इलाज के लिए क्यों नहीं आया इसका जवाब नर्सिंग होम एसोसिएशन के पास नहीं है. प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधि‍कारी डॉ. प्रभाकर राय कहते हैं, “आयुष्मान योजना में व्यवस्था है कि सरकारी अस्पताल में बेड खाली न होने पर ही मरीज को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाता है. इस वक्त सरकारी अस्पताल में बड़ी संख्या में बेड खाली हैं. ऐसे में निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति नहीं दी जा सकती है.”

पूर्वी जिले प्रयागराज ही नहीं प्रदेश के पश्च‍िमी जिले अलीगढ़ में भी कोरोना मरीज इलाज के लिए निजी अस्पताल नहीं पहुंचा है. अलीगढ़ में 2,33,329 लोगों के पास गोल्डन कार्ड है. जिले में आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधि‍कारी डॉ. खानचंद के मुताबिक, 1 अप्रैल 2021 से 20 मई 2021 तक 2,048 लोगों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज लिया है. इन मरीजों में कोविड के कितने मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत इलाज मिला है, इसकी कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं है.

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के दिन झारखंड के रांची जिले से किया था. योजना के तहत भारत सरकार से प्राप्त वर्ष 2011 की सूची के अनुसार, गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यापन करने वाले परिवारों (बीपीएल) के पांच सदस्यों को कुल 1,350 प्रकार की बीमारियों का इलाज सरकारी या सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में करने का प्रावधान किया गया है. पात्र परिवार का जिले के बाहर अन्य प्रदेशों में भी सरकारी या सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पांच लाख तक का इलाज नि:शुल्क होता है. जून 2020 में कोरोना का इलाज भी इस योजना में शामिल कर लिया गया है. कोरोना के इलाज के लिए सरकारी प्रबंध ही आयुष्मान योजना के लाभर्थ‍ियों के आड़े आ रहे हैं. बुंदेलखंड में बिगड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त कराने के लिए प्रयासरत समाजसेवी ब्रजराज यादव बताते हैं, “कोरेाना संक्रमण जब तेजी पर था उस वक्त एक एक बेड के लिए मारामारी थी. आक्सीजन तक मिल नहीं रही थी, ऐसे में आयुष्मान योजना का कार्ड दिखाने पर कोई भी मदद निजी अस्पताल करने को तैयार नहीं थे. ऐसे में बड़ी संख्या में आयुष्मान योजना के लाभार्थी इलाज नहीं मिलने से दम तोड़ चुके हैं.” वहीं दूसरी ओर सरकार ने कोरोना संक्रमित व्यक्त‍ि के निजी अस्पताल में 10 दिन तक के इलाज का खर्च करीब डेढ़ लाख रुपए निर्धारित किया था. इसके विपरीत आयुष्मान योजना में वेंटीलेटर के साथ आइसीयू वार्ड में भर्ती होने पर अधि‍कतम 4,500 रुपए का प्रावधान किया गया है. आइसीयू वार्ड के लिए 3,600 रुपए, एचडीयू वार्ड के लिए 2,700 रुपए तथा सामान्य वार्ड के लिए प्रतिदिन 1,800 रुपए निर्धारित किए गए हैं. प्रयागराज में एक स्वास्थ्य केंद्र चलाने वाले रामकिंकर सिह बताते हैं, “कोरोना संक्रमण के फैलने के बाद अधि‍कारी मौजूद नहीं थे. आयुष्मान कार्ड के लाभार्थि‍यों के लिए प्रावधान और कोरोना इलाज के प्रावधान में काफी अंतर होने के कारण निजी अस्पतालों ने ऐसे मरीजों को भर्ती करने से परहेज किया.”

निजी अस्पतालों द्वारा आयुष्मान मरीजों से पैसा वूसलने की शि‍कायतें भी आम हो गई हैं. गोरखपुर के बलुआ गांव निवासी काली प्रसाद सैनी की एक दुर्घटना में कमर और हाथ कर हड्डी टूट गई थी. सैनी जिले के आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती हुए. निजी अस्पताल संचालक ने सैनी से आपरेशन और इलाज के लिए पांच लाख रुपए ले लिए. सैनी ने निजी अस्पताल की शि‍कायत जिला प्रशासन से की है. गोरखपुर में 339 लाख लोग आयुष्मान योजना के तहत गोल्डल कार्ड धारक हैं. गोरखपुर के एक समाजसेवी संजय मिश्र बताते हैं, “निजी अस्पताल पहले तो मरीज को आयुष्मान योजना के कार्ड पर ही भर्ती करते हें लेकिन बाद में मरीज की स्थि‍ति गंभीर बता कर परिवार वालों को इस योजना के तहत इलाज का प्रावधान न होने की बात कह कर पैसा वसूल लेते हैं. ऐन मौके पर इलाज के लिए पैसा मांगे जाने पर गरीब परिवार के सामने घर के गहने या जमीन बेचने के अलावा कोई और चारा नहीं होता है.” गोरखपुर में एक निजी नर्सिंग होम संचालक बताते हैं कि आयुष्मान योजना के तहत कोविड-19 के इलाज की कोई गाइडलाइन अभी तक नहीं मिली है. वहीं गोरखपुर जिला प्रशासन ने आयुष्मान योजना के मरीजों से पैसा वसूलने की बढ़ती शि‍कायतों की जांच शुरू की है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि सभी जिलों में आयुष्मान योजना के लाभार्थ‍ियों को कोरोना का इलाज नहीं मिला है. पूर्वांचल के आजमगढ़ जिले ने कोविड पीड़ित मरीजों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलाने में उल्लेखनीय काम किया है. आजमगढ़ में कोरोना की पहली लहर के दौरान 70 और दूसरी लहर में 50 आयुष्मान योजना के लाभार्थ‍ियों को कोविड का इलाज मिला है. महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. डी. एस. नेगी ने सभी मंडलों के स्वास्थ्य अपर निदेशकों को पत्र लिखकर आयुष्मान योजना में कोविड मरीजों को मिले इलाज का ब्योरा मांगा है.

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