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नदीसूत्र

स्वर्णरेखा नदी की रेत से सूप से सोना निकालने की कोशिश करती महिलाएं

नदीसूत्रः स्वर्णरेखा को लॉकडाउन में मिली नई जीवनरेखा

03 मई 2020

मिथकों में महाभारत से जुड़ी स्वर्णरेखा की जीवनरेखा क्षीण होती जा रही थी. उद्योगों और घरों से निकले अपशिष्ट के साथ खदानों से निकले अयस्कों ने इस नदी के जीवन पर सवालिया निशान लगा दिया था. यह नदी सूखी तो झारखंड, बंगाल और ओडिशा में कई इलाके जलविहीन हो जाएंगे, पर इस कोरोना महामारी के लॉकडाउन ने झारखंड की खरकई-सुवर्णरेखा नदियों की नई जिंदगी दी है, इनका पानी हुआ स्वच्छ, नहाने-धोने के साथ ही जलीय जीवों के लिए भी सुरक्षित

फोटो सौजन्यः सोशल मीडिया

नदीसूत्रः तमिलनाडु के लोकजीवन और लोकाचार में नदियां

04 मार्च 2020

गरमी में देशभर में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है और उनमें से एक नाम तमिलनाडु के शहर चेन्नै का भी होता है. विडंबना यही है कि तमिलों ने पुराने समय से ही अपने जलागारों और जलस्रोतों का न सिर्फ संरक्षण किया बल्कि अपनी पूजा में भी शामिल किया. वहां के स्थानीय नृत्यों में कारागम या कारागट्टम में वर्षा की देवी मारी अम्मन और नदी देवी गंगेयी अम्मन और कावेरी अम्मन की स्तुति की जाती है. पर नई पीढ़ी नदियों और जलाशयों से दूर है

फोटोः रॉयटर्स/ इंडिया टुडे

नदीसूत्रः मुंबई की मीठी नदी का कड़वा वर्तमान और जहरीला भविष्य

13 फरवरी 2020

मायानगरी मुंबई कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया पर आरे के जंगल बचाने जाग गई थी. पर शहर के लोगों ने एक मरती हुई नदी पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया. मुंबई ने एक नदी को मौत की नींद सोने पर मजबूर कर दिया है. नाम है मीठी, पर इसका भविष्य और वर्तमान दोनों कड़वा-कसैला है. 

फोटोः मंदार देवधर

नदीसूत्रः बोल मेरी बिजली कितना पानी

31 जनवरी 2020

महाराष्ट्र का विदर्भ पहले से ही पानी की किल्लत का इलाका है. वहां की वेनगंगा नदी का अस्तित्व खतरे में है क्योंकि न सिर्फ खेतों को सींचने के लिए, बल्कि ताप बिजलीघरों का पेट भरने के लिए भी इस नदी का पानी इस्तेमाल किया जा रहा है. बढ़ते ताप बिजलीघर अधिक पानी खींच रहे हैं और वेनगंगा पर ताबड़तोड़ बांध बनाए जा रहे हैं

फोटोः पवन सिंह/ लोक दायित्व

नदीसूत्रः ...और जी उठी पौराणिक महत्व की नदी छोटी सरयू

21 जनवरी 2020

अब तक हमने नदीसूत्र में नदियों की व्यथा कथा ही लिखी थी. पर कुछ लोग वाकई अपनी तरफ से योगदान देकर विरासत बचा रहे हैं. सरयू की पूर्व धारा रही छोटी सरयू भी काल के गाल में समाने वाली थी, पर पवन सिंह जैसे कुछ लोगों ने अथक मेहनत से उसे बचा लिया. लिहाजा, नदी जी गई है.

फोटो सौजन्यः सोशल मीडिया

नदीसूत्रः सोन से रूठी नर्मदा हमसे न रूठ जाए

07 जनवरी 2020

लगातार होते रेत खनन, नदियों के पास ताबड़तोड़ कथित विकास परियोजनाओं और बांध बनाए जाने और इसके जलागम क्षेत्र में जंगल का अबाध कटाई ने नर्मदा को बहुत बीमार बना दिया है. पिछली गर्मियों में नर्मदा का जलस्तर तो इतना गिर गया था कि कोई पांव-पैदल भी नदी को पार कर सकता था. इस नदी को नदी-जोड़ परियोजना ने भी काफी नुक्सान पहुंचाया है

फोटोः ट्विटर

नदीसूत्रः गंगाजल पाइपलाईन योजना बिहार सरकार का मायोपिक विजन है

20 दिसंबर 2019

एक तरफ गंगा खुद अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रही है, वहीं बिहार सरकार गंगा के 50 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी को गया भेजने के लिए भारी-भरकम योजना लेकर तैयार है. गया में भूजल स्तर सुधारने के दूसरे मुफीद तरीके अपनाने की बजाए गंगा का पानी गया तक लाने के पीछे मंशा आखिर क्या है?

फोटोः सोशल मीडिया

नदीसूत्रः सोने के कणों वाली नदी स्वर्णरेखा की क्षीण होती जीवनरेखा

18 दिसंबर 2019

स्वर्णरेखा नदी में सोने के कण पाए जाते हैं, पर मिथकों में महाभारत से जुड़ी स्वर्णरेखा की जीवनरेखा क्षीण होती जा रही है. उद्योगों और घरों से निकले अपशिष्ट के साथ खदानों से निकले अयस्कों ने इस नदी के जीवन पर सवालिया निशान लगा दिया है. यह नदी सूखी तो झारखंड, बंगाल और ओडिशा में कई इलाके जलविहीन हो जाएंगे