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पारसी समुदाय पर फोटो प्रदर्शनी

प्रदर्शनी में इस्तेमाल इन तस्वीरों को शांतनु ने पांच से छह सालों के बीच न सिर्फ मुंबई बल्कि सूरत, उडवादा, कोलकाता जैसे कई शहरों में अपने कैमरे में कैद किया है. वे कहते हैं, "पारसी लोग बेहद ख़ुशमिजाज़ होते हैं. उन्हें समर्पित ये मेरी दूसरी प्रदर्शनी है. इतने सालों में उनसे जुड़ी तस्वीरों को खींचते वक्त मुझे उ‌नके साथ बातचीत करने के कई‌ मौके हासिल हुए, जिनसे मुझे समझ आया कि वे बेहद मददगार किस्म के लोग होते हैं और वे अपने मन में कभी भी दूसरों के लिए दुर्भावना नहीं पालते हैं."

मुंबई के वरली स्थित ताओ आर्ट गैलरी में पारसीज-ए टाइमलेस लेगेसी के शीर्षक से लगी प्रदर्शनी मुंबई के वरली स्थित ताओ आर्ट गैलरी में पारसीज-ए टाइमलेस लेगेसी के शीर्षक से लगी प्रदर्शनी

मुंबई के वरली स्थित ताओ आर्ट गैलरी में 'पारसीज-ए टाइमलेस लेगेसी' शीर्षक से एक फोटो प्रदर्शनी लगाई गई है. अलग तरह की इस प्रदर्शनी में फोटोग्राफर शांतनु दास के 50 चुनिंदा फोटो हैं. कई पुरस्कारों से नवाजे गए शांतनु ने इस फोटो के लिए पवित्र मानी जानेवाली कई सीमाओं को भी लांघा है और ऐसा कर उन्होंने पारसियों की संस्कृति, रीति-रिवाज़ों और त्योहारों से संबंधित निजी परंपराओं को बेहद ख़ूबसूरती से अपने कैमरे में क़ैद किया है. इनमें काम में संलग्न, प्रार्थनाओं और जश्न में व्यस्त पारसियों का उत्साह सभी कुछ शामिल है. फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से पारसी समुदाय की विशिष्टताओं को दर्शाया गया है.

इस प्रदर्शनी का आयोजन एक जुनूनी आर्ट कलेक्टर, क्यूरेटर और आंत्रप्योनोर के तौर पर अपनी पहचान रखनेवाले परवेज़ दमानिया ने फ़्रवांशी स्कूल से संबंध रखनेवाले, एक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, पारसी खाने के शौक़ीन रतन लूथ के साथ मिलकर किया है. यह प्रदर्शनी 29 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा.

इन तस्वीरों को शांतनु ने पांच से छह सालों के बीच न सिर्फ मुंबई बल्कि सूरत, उडवादा, कोलकाता जैसे कई शहरों में अपने कैमरे में कैद किया है. वे कहते हैं, "पारसी लोग बेहद ख़ुशमिजाज़ होते हैं.

उन्हें समर्पित ये मेरी दूसरी प्रदर्शनी है. इतने सालों में उनसे जुड़ी तस्वीरों को खींचते वक्त मुझे उ‌नके साथ बातचीत करने के कई‌ मौके हासिल हुए, जिनसे मुझे समझ आया कि वे बेहद मददगार किस्म के लोग होते हैं और वे अपने मन में कभी भी दूसरों के लिए दुर्भावना नहीं पालते हैं."

परवेज़ दमानिया भी कहते हैं, "मुझे हमेशा से ही पारसी समुदाय के प्रति आकर्षण रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मेरा ताल्लुक भी उसी समुदाय से है. इस प्रदर्शनी के आयोजन का मक़सद लोगों को पारसियों की जीवन-शैली और कम संख़्या में होकर भी भारत के विकास में दिए गए उनके बहुमूल्य योगदान से अवगत कराना है.''

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