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दिलीप कुमार: एक प्यार का नगमा है...

दिलीप कुमार और सायरा बानो की मोहब्बत की तरह दूसरी मिसाल बॉलीवुड में देखने को नहीं मिलती.

दिलीप कुमार और सायरा बानो दिलीप कुमार और सायरा बानो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 7 जुलाई 2021 को सुबह साढ़े सात बजे हिंदुजा अस्पताल में दिलीप कुमार अल्लाह को प्यार हो गए
  • सायरा बानो बीमार दिलीप साहब के साथ साए की तरह रहीं और उनकी सेवा खुद करती रहीं
  • सायरा तो छोटी उम्र से ही दिलीप साहब को प्यार करती थीं और अपने से 22 साल बड़े दिलीप से निकाह कर लिया था

हिंदी फिल्मों में दिलीप कुमार ने जिस तरह के किरदार निभाएं, उससे उनकी छवि ट्रेजडी किंग की बन गई. सिनेमा के सफेद परदे से बाहर निजी जिंदगी में भी वो ट्रेजडी किंग से कम नहीं रहे. मुगले आजम फिल्म में सलीम (दिलीप कुमार) और अनारकली (मधुबाला) के प्यार की कहानी तो सबको पता है. लेकिन निजी जिंदगी में दिलीप और सायरा के मोहब्बत को जिंदाबाद कहना पड़ता है. जिंदगी के तमाम उतार-चढ़ाव के बीच प्यार की मिसाल वाली इस जोड़ी ने हैरत में तबसे डाल रखा था जब दिलीप कुमार अचानक से बीमार हो गए. दुखद स्थिति तब आती थी जब दिलीप कुमार तबियत बिगड़ने पर इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल होते थे और अस्पताल के बाहर अफवाहों को पंख लग जाते थे कि दिलीप अल्लाह को प्यारे हो गए. इसके बाद सायरा अस्पताल से ही सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर करतीं जिसमें दिलीप साहब अपनी बेगम सायरा के साथ मुस्कुराते हुए दिखते थे. फिर उनके चाहने वाले लोग यह कहने से नहीं चूकते थे कि सायरा को अपनी मोहब्बत के बल पर दिलीप साहब को नई जिंदगी दिलाने में कामयाबी मिलती थी.

दिलीप कुमार और सायरा बानो की मोहब्बत की तरह दूसरी मिसाल बॉलीवुड में देखने को नहीं मिलता. इन दोनों के प्यार में कुछ अलग ही कुदरती मिश्रण रहा है जो प्यार करने वालों को प्रेरित करता है. ऐसे कई मौके आए जब जिंदगी और मौत के खेल में सायरा ने मौत को गच्चा देने में कामयाबी पाई. ऐसे में लोगों को सती सावित्री और सत्यवान की कहानी जेहन में आती है. दिलीप साहब 98 वां वसंत देख पाए. लेकिन 7 जुलाई 2021 को सुबह साढ़े सात बजे हिंदुजा अस्पताल में दिलीप साहब अल्लाह को प्यार हो गए. सायरा तो छोटी उम्र से ही दिलीप साहब को प्यार करती थीं और अपने से 22 साल बड़े दिलीप से निकाह कर लिया. निकाह तो एक सामाजिक रस्म है. लेकिन हर हाल में प्यार में एक-दूसरे के साथ रहना बड़ी बात है. सायरा बानो बीमार दिलीप साहब के साथ साए की तरह रहीं और उनकी सेवा खुद करती रहीं. तभी तो 98 वें साल में भी दिलीप साहब के चेहरे पर नूर झलक रहा था.

इसमें कोई दो राय नहीं कि दिलीप कुमार और सायरा बानो दो जिस्म एक जान थे. दिलीप अपनी बेगम सायरा का हाथ हमेशा पकड़े रहते थे जिससे उन्हें संबल मिलता था. और तो और दिलीप, सायरा के हर अल्फाज को समझते थे, उनकी रूह और आहट को पहचानते थे. इंडस्ट्री और बाहरी लोगों की बातों को सायरा ही उन्हें बताती थीं और फिर ट्रेजडी किंग अपना जवाब देते थे. सायरा ने दिलीप को दुनिया से कभी काटकर नहीं रखा बल्कि वो हर तरह की गतिविधियों से उन्हें अवगत कराती थीं. सायरा ने कहा था कि वो दिलीप साहब को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती हैं और एक प्रेमिका कैसी हो यह भी सायरा ने साबित कर दिखाया है.

सायरा ने 12 साल की उम्र में ही दिलीप को अपना दिल दे दिया था और 22 साल की सायरा ने 44 साल के दिलीप से शादी रचा ली. सायरा के परिवार की तरफ से थोड़ा विरोध था. लेकिन सायरा ने अपनी जिद्द से दिलीप को पा लिया. प्यार एकतरफा नहीं था बल्कि दोनों तरफ से था. दिलीप में मोहब्बत सायरा ने ही जगाया था. खूबसूरत सायरा के प्यार को देखकर दिलीप ने उनसे शादी करने का फैसला ले लिया. दिलीप ने अपने दिमाग में सायरा के बाद किसी और से निकाह करने का ख्याल नहीं किया और सायरा ने भी बीबी और प्रेमिका दोनों का किरदार निभाया. कहते हैं कि सायरा के प्यार में कुछ अलग तरह की ताकत है जो दिलीप साहब के लिए दवा का ही काम करती थी.

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