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कालेश्वरम प्रोजेक्टः लिफ्टिंग ए रिवर

कालेश्वरम प्रोजेक्ट की भव्यता और तकनीक से प्रभावित होकर कोंडापल्ली राजेंद्रा श्रीवत्सा ने ‘लिफ्टिंग ए रिवर’ नामक डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाई है.

कालेश्वरम प्रोजेक्ट कालेश्वरम प्रोजेक्ट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कालेश्वरम प्रोजेक्ट ने तेलंगाना के सूखा प्रभावित इलाकों की समस्या को हल किया है
  • इस प्रोजेक्ट के ज़रिए गोदावरी नदी पर समुद्रतल से 600 मीटर ऊपर भीमकाय पंपिंग मशीन स्थापित की गई है
  • इस पर ‘लिफ्टिंग ए रिवर’ नाम की इस फिल्म को बनाने में करीब 3 साल का समय लगा

तेलंगाना के सूखा प्रभावित इलाकों की समस्या अब खत्म हो गई है. इस समस्या के हल के लिए गोदावरी नदी पर दुनिया के सबसे बड़े लिफ्ट इरीगेशन प्रोजेक्ट को तैयार किया गया है. इस विशालकाय कालेश्वरम प्रोजेक्ट के ज़रिए गोदावरी नदी पर समुद्रतल से 600 मीटर ऊपर भीमकाय पंपिंग मशीन स्थापित की गई है. इन पंपों के ज़रिए गोदावरी नदी का पानी जलाशयों एवं नहरों में जमा किया जाता है. खास है कि इस पानी से न केवल सूखाग्रस्त इलाकों में निरंतर पानी भेजा रहा है, वल्कि आसपास मौजूद तलाबों और झीलों को भी पुनर्जीवित किया जा रहा है. विश्व के सबसे बड़े लिफ्ट इरीगेशन प्रोजेक्ट “कालेश्वम प्रोजेक्ट” का निर्माण भारतीय कंपनी मेघा इंजीनियरिंग ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (एमईआइएल) ने किया है. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एमईआइएल ने 15 विशालकाय पंपिंग स्टेशन तैयार किए, जिसमें कुल मिलाकार 104 पंपों की पंपिंग क्षमता 5,159 मेगावाट है. पंपों के ज़रिए नदी के पानी को इस्तेमाल करने का ऐसा नज़ारा दुनिया में कहीं देखने को नहीं मिलेगा.

कालेश्वरम प्रोजेक्ट की भव्यता और तकनीक से प्रभावित होकर नामचीन डॉक्युमेंट्री मेकर कोंडापल्ली राजेंद्रा श्रीवत्सा ने इस विषय पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया. ‘लिफ्टिंग ए रिवर’ नाम की इस फिल्म को बनाने में करीब 3 साल का समय लगा. इस फिल्म में कालेश्वरम प्रोजेक्ट के हर फेज़ को कैप्चर किया गया है.

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