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महिलाओं के लिए सैनेटरी नैपकिन का एक और विकल्प आया

पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक साधनों से अलग मेन्सट्रुअल कप ज्यादा हाइजीनिक है. खास बात ये है कि इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है. ये भारत में भी उपलब्ध है.  

महिलाओं की जिंदगी बनेगी आसान महिलाओं की जिंदगी बनेगी आसान

तकनीक ने महिलाओं को कई सहूलियतें दी हैं. सेनिटरी पैड्स, टैंपून जैसे उत्पादों ने महिलाओं की जिंदगी लगातार आसान बनाई है और अब इसी सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए आया है मेन्सट्रुअल कप. पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक साधनों से अलग मेन्सट्रुअल कप ज्यादा हाइजीनिक है. खास बात ये है कि इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है. ये भारत में भी उपलब्ध है. 

यह सौ प्रतिशत मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन से बना है. बेल या घंटी के आकार का यह कप पीरियड्स के दौरान वजाइना के भीतर सेट कर दिया जाता है. इसे इस तरह से बनाया गया है कि पीरियड्स के  दौरान साइकिल चलाने, दौड़ने, उछलने, कूदने में आपको जरा भी दिक्कत न आए.

इसे देश में लांच करने वाली कंपनी डीईए कॉर्प के संस्थापक अमोल प्रकाश माने कहते हैं, ‘‘मेन्सट्रुअल कप बनाने के पीछे औरतों को आर्थिक और शारीरिक रूप से ज्यादा सशक्त बनाने का ही ख्याल मेरे दिमाग में था.'' इस कप को कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है, हर कप की उम्र तकरीबन 10 साल है, लिहाजा ये किफायती भी लगता है. 

ये पर्यावरण अनुकूल भी होते हैं. माने के मुताबिक, औसतन हर औरत अपनी पूरी जिंदगी में 16,000 पैड्स का इस्तेमाल करती है. इन पैड्स को नष्ट होने में सालों लगते हैं, जबकि एक कप को 10-12 सालों तक इस्तेमाल किया जा सकता है. कप दो साइज में उपलब्ध है. पहला छोटे आकार का जिसका ब्यास 41 मिलीमीटर और बड़े कप का आकार 45 मिलीमीटर है.

तीस से कम उम्र की महिलाएं जिन्होंने बच्चों को जन्म नहीं दिया है वे छोटे कप का इस्तेमाल कर सकती हैं. कप शरीर के आकार के हिसाब से खुद ही एडजस्ट होकर खून एकत्र करता है न कि खून को एब्जार्ब करता है. बहरहाल, जिन महिलाओं को सिलिकॉन से एलर्जी है वे डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका इस्तेमाल करें. लेकिन इतना तो तय है कि मेन्सट्रुअल कप के रूप में महिलाओं को एक और विकल्प मिल गया है. 

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