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सबरंग

शरमन जोशी

हर धर्म का सम्मान करना चाहिए: शरमन जोशी

27 अगस्त 2020

फिल्म 'ग्राहम स्टेंस-एक अनकही सच्चाई' में शरमन जोशी ने एक खोजी पत्रकार की भूमिका निभाई है. इस फिल्म में शरमन ने किस तरह से सच्चाई को पेश किया है, उस बारे में उनसे बातचीत के मुख्य अंश.

आपटा स्टेशन

बॉलीवुड को इसलिए पसंद है आपटा स्टेशन

31 जुलाई 2020

बॉलीवुड के लिए मध्य रेलवे का आपटा स्टेशन सबसे ज्यादा पसंदीदा रेलवे स्टेशन है. यहां दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का वह लोकप्रिय ट्रेन का सीन फिल्माया गया था जिसमें अमरीश पुरी काजोल से कहते हैं, "जा सिमरन जा जी ले अपनी जिंदगी."

पंडित पारसनाथ (फोटोः नवीन कुमार)

अवसाद मिटाने की दवा है संगीत: पंडित पारसनाथ

04 जुलाई 2020

बनारस घराने के युवा बांसुरी वादक पंडित पारसनाथ का विश्वास है कि संगीत अवसाद मिटाने की दवा है. इसमें बांसुरी की धुनें भी हैं जो संगीत प्रेमियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.

फोटोः इंडिया टुडे

स्मृतिशेषः मां से किया वादा ताउम्र निभाया सुशांत सिंह राजपूत ने

18 जून 2020

इस इंडस्ट्री का दस्तूर है कि जब कोई ऐक्टर एक फिल्म की वजह से दूसरे प्रोड्यूसरों को निराश करता है तो उसके करियर को तबाह करने वाले भी खड़े हो जाते हैं और इसका कड़वा अनुभव सुशांत को हुआ होगा, इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता है. लेकिन सुशांत कमजोर नहीं थे.

धारावाहिक बुनियाद के सेट पर रमेश सिप्पी (फोटोः इंडिया टुडे)

धारावाहिक ‘बुनियाद’ आधुनिक भारत के एक अहम कालखंड का दस्तावेज है

13 जून 2020

अगर किसी को 20वीं सदी के शुरुआत से लेकर देश की आज़ादी और बंटवारे की कहानी समझनी हो तो ‘बुनियाद’ उसके लिए ज़रूरी धारावाहिक है.

गीतकार योगेश नहीं रहे

स्मृतिशेषः गीतकार योगेश ने ठीक लिखा था, जिंदगी कैसी है पहेली

30 मई 2020

गीतकार योगेश के गीत अपनी ख़ूबसूरत ज़बान, इमैज़िनेशन और बेहतर सोच के साथ बिल्कुल अलग नज़र आते हैं. उनके गीतों में एक ऐसा जीवन दर्शन है जो दुखी मन पर मरहम लगाता है. लोगों को जीने की प्रेरणा देता है. अंधेरों में रोशनी की लकीर खींच देता है.

गीतकार योगेश नहीं रहे

स्मृतिशेषः जिंदगी और रिश्तों के मुकम्मल जहां थे योगेश

30 मई 2020

जिंदगी कैसी है पहेली...गीत लिखने वाले गीतकार योगेश सामान्य जिंदगी जीते हुए बेहद खुश थे. उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं थी. क्योंकि, उन्होंने जिंदगी और रिश्तों को ताउम्र जिया और यही उनके लिए मुकम्मल जहां था

साहित्य वार्षिकी में गीतकार योगेश

स्मृतिशेषः गीतकार योगेश के लिए सलिल दा की धुनें जलेबी-सी होती थीं

29 मई 2020

गीतकार योगेश नहीं रहे. 2017 की इंडिया टुडे साहित्य वार्षिकी में उनका एक साक्षात्कार हमने प्रकाशित किया था. पेश हैं उसके कुछ अंशः

फोटोः राजेंद्र शर्मा

88 साल की उम्र में संकटमोचक मंदिर में अपनी हाजिरी लगा गईं गिरिजा देवी

17 मई 2020

88 साल की उम्र में संकट मोचक मंदिर में अपनी हाजिरी लगा गयी गिरिजा देवी

व्हाट्सएप किताबें

कोरोना युग माने व्हाट्सऐप बुक

13 मई 2020

हिंदी के सबसे बड़े प्रकाशकों में शुमार राजकमल प्रकाशन ने 25 मार्च यानि पहला लॉकडाउन शुरू होते ही लेखकों के फेसबुक लाइव सत्र शुरू कर दिए थे और अब तक 128 लेखकों/ वक्ताओं के 172 लाइव शो हो चुके हैं. इनमें कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल, मंगलेश डबराल से लेकर अभिनेता-नाटककार सौरभ शुक्ल और पुराने ज़माने की पॉप गायिका उषा उथुप भी शामिल थीं.

फोटोः राजकमल प्रकाशन

लॉकडाउन में आखिरकार वक्त आया किताबों का

05 मई 2020

40 दिनों के बाद अब पाठक अपनी पसंद की किताब ख़रीद सकते हैं. इसकी पहल राजकमल प्रकाशन ने की है. ऑनलाइन और ऑफलाि दोनों तरह की बिक्री शुरू हो गई है