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चुनाव नतीजों से पहले भावी रणनीति तय करेगा संघ

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ 19 मई को आखिरी चरण के वोटिंग के बाद अगले दिन 20 मई को अपना फीडबैक भाजपा के साथ साझा करेगा. इसी फीडबैक के आधार पर संघ 3 ट्रैक रणनीति तय करेगा.

फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ 19 मई को आखिरी चरण के वोटिंग के बाद अगले दिन 20 मई को अपना फीडबैक भाजपा के साथ साझा करेगा. इसी फीडबैक के आधार पर संघ 3 ट्रैक रणनीति तय करेगा.

संघ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 6 चरणों की वोटिंग के बाद संघ को जो फीडबैक मिला है वह भाजपा को मिले फीडबैक से मेल नहीं खा रहा है. भाजपा अपने फीडबैक में जहां यह दावा कर रही है कि इस बार 2014 के 282 सीटों से ज्यादा पर पार्टी अपनी जीत हासिल करेगी वहीं संघ का आंकलन है कि 2014 के मुकाबले भाजपा को काफी संख्या में सीटों का नुकसान हो रहा है. 

संघ ने 2014 और 2009 के लोकसभा चुनाव आंकड़ों का विश्लेषण किया है. इसके मुताबिक 2014 में भाजपा ने 282 सीटें जीती थी जिनमें 239 सीटों पर जीत का अंतर, तीसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी को मिले वोट से कम था. मसलन पहले नंबर पर रहते हुए भाजपा ने 100 वोट हासिल किए और तीसरे नंबर पर रहते हुए किसी दल ने 40 वोट हासिल किए तो दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशियों को 60 से अधिक वोट हासिल हुए. इस लिहाज से 239 सीटों पर विपक्षी दलों के गठबंधन और जहां सीधा टक्कर कांग्रेस या अन्य दलों से है वह सीट भाजपा के हाथों से निकल जाए इसकि संभावना अधिक है.

ऐसे में तीन विकल्प को लेकर संघ मंथन कर रहा है. पहले विकल्प के तहत एनडीए का सरकार मोदी के नेतृत्व में बनाने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों को अपने खेमें में करने की कोशिश करना. इस काम को करने के लिए किसी वरिष्ठ नेता को जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव संघ दे सकता है. विकल्प दो के रूप में यदि अन्य दल आने को राजी नहीं होते है उस दशा में मोदी और शाह को इस बात के लिए संघ राजी कर सकता है कि वह अपनी जगह नेतृत्व पार्टी के किसी अन्य नेता को सौंपने पर राजी हो. 

मोदी और शाह को राजी करने के लिए संघ के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी को जिम्मेदारी दी जा सकती है. तीसरे विकल्प के रूप में संघ इस बात के लिए मोदी और शाह को राजी करने की कोशिश करेगा कि यदि विपक्ष में बैठने के अलावा अन्य विकल्प नहीं बचते हैं तो फिर नेता प्रतिपक्ष  और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मोदी और शाह की जोड़ी की जगह किसी अन्य नेता को जिम्मेदारी सौंपी जाए.

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