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छत्तीसगढ़ः कांग्रेस को मिल गया जीत का मंत्र !

विधानसभा में जन घोषणापत्र बना था जीत मंत्र, पर क्या लोकसभा में भी चलेगा जादू...

2019 के चुनाव के लिए तैयार चुनावी रणनीति 2019 के चुनाव के लिए तैयार चुनावी रणनीति

छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव की तैयारियों में कांग्रेस जुट गई है. विधानसभा चुनाव में दमदार जीत का फार्मूला मिलने से पार्टी का उत्साह सातवें आसमान पर है. हाल ही में रायपुर के एक होटल में बैठक हुई. इस बैठक में प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत प्रदेश के कई मंत्री और नेता शामिल हुए. कई घंटों की मशक्कत के बाद विधानसभा चुनाव में जीत का मंत्र साबित हुआ 'जन घोषणा पत्र' फिर से बनाने का निर्णय लिया गया है.

दरअसल विधानसभा चुनाव में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने वाले टी.एस. सिंहदेव के नेतृत्व में बनीं कई टीमों ने घर-घर जाकर घोषणा पत्र तैयार किया था. किसान, महिलाएं, आदिवासियों, युवाओं के मुद्दों को इसमें शामिल किया गया था. इस घोषणा पत्र को जन घोषणा पत्र का नाम दिया गया था. कर्ज माफी का वादा भी इसी घोषणा पत्र में शामिल किया गया था. सरकार में आते ही कांग्रेस ने सबसे पहले कर्ज माफ कर घोषणा पत्र का पहला वादा पूरा कर जनता को संदेश दे दिया कि नई सरकार अपने घोषणा पत्र को लेकर गंभीर है. लेकिन इस पूरे फार्मूले के सूत्रधार टी.एस.सिंहदेव का इस बैठक में न रहना कुछ सवाल भी खड़े करता है, इस बार क्या जन घोषणा पत्र बनाने का कार्यभार किसी और को सौंपा जा सकता है? मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल टी.एस.बाबा ने आखिर इस बैठक से दूरी क्यों बनाई? खैर, कांग्रेस के भीतर क्या पक रहा है ये तो पता नहीं. लेकिन भाजपा को इस मंत्र की काट जल्द खोजनी होगी क्योंकि इस राज्य में अपनी 10 सीटें बचाने के लिए भाजपा उतरेगी.

11 लोकसाभा सीटों वाले छत्तीसढ़ में केवल एक सीट 2014 के चुनाव में कांग्रेस को मिली थी जबकि बाकी सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी. 2009 में भी कांग्रेस के पास केवल एक सीट थी जबकि 2004 में दो सीटें कांग्रेस के पास थीं.

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