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सर्बानंद सोनोवाल को अदालत ले जाऊंगाः ‘भारत का दुश्मन’ बताए जाने पर बदरुद्दीन अजमल

एआइयूडीएफ प्रमुख ने एक खास बातचीत में असम चुनाव अभियान में उठ रहे विभिन्न विवादास्पद मुद्दों पर अपनी बेबाक राय जाहिर की. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें क्यों लगता है कि भाजपा उनमें बहुत दिलचस्पी रखती है.

बदरुद्दीन अजमल (फोटोः विक्रम शर्मा) बदरुद्दीन अजमल (फोटोः विक्रम शर्मा)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बदरुद्दीन अजमल असम विधानसभा चुनाव अभियान में इकलौते सबसे बड़े मुद्दे के रूप में उभरे हैं
  • भाजपा का दावा है कि वे असम की संस्कृति और सभ्यता के लिए खतरा हैं
  • असम की आबादी 40 फीसद मुसलमान वोटों को एकजुट करने के लिए कांग्रेस ने अजमल से हाथ मिलाया है

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) के प्रमुख और असम से लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल असम विधानसभा चुनाव अभियान में इकलौते सबसे बड़े मुद्दे के रूप में उभरे हैं. भाजपा का दावा है कि वे असम की संस्कृति और सभ्यता के लिए खतरा हैं. असम की आबादी 40 फीसद मुसलमान वोटों को एकजुट करने के लिए कांग्रेस ने इत्र व्यापारी से राजनेता बने अजमल से हाथ मिलाया है. डिप्टी एडिटर कौशिक डेका के साथ खास बातचीत में अजमल ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी, विभिन्न विवादास्पद मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी और ‘‘देश का दुश्मन’’ कहे जाने पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का वादा किया. बातचीत के प्रमुख अंशः

सवालः आप विधानसभा चुनाव में मुख्य मुद्दे के रूप में उभरे हैं. भाजपा का दावा है कि आप असम के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. वे लोगों से पूछ रहे हैं कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहते हैं या बदरुद्दीन अजमल को. मोदी के विकल्प के रूप में पेश किए जाने पर आपको कैसा लगता है?

जवाबः मैं मामूली इनसान हूं. मैं यही सवाल अपनी रैलियों में आए लोगों से पूछता हूं. वे कहते हैं कि वे अजमल को चाहते हैं. यह लोगों की आवाज है. इस बार कोई मोदी लहर नहीं है. भाजपा नेता चिंतित और कुंठित हैं. हमने उनके कामकाज का हिसाब मांगा. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के वादे के मुताबिक कितने अवैध बांग्लादेशियों को स्वदेश भेजा? हमने महंगाई का मामला उठाया. हमने असम में सड़क, बाढ़ और भूमि के कटाव का सवाल उठाया. हमने औद्योगिकरण के बारे में पूछा. इन सारे सवालों का जवाब बदरुद्दीन अजमल है. (असम के वित्त मंत्री) हिमंत बिस्व सरमा जब सुबह में उठते हैं तो अजमल के बारे में सोचते हैं. जब वे मंजन करते हैं तो अजमल के बारे में सोचते हैं. जब उनकी बीवी उन्हें नाश्ता देती हैं तो वे अजमल के ख्याल में गुम होते हैं. वह इसलिए कि भाजपा ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके बारे में वे बात कर सकें. वे मेरे नाम का जाप करते रहते हैं. सरमा मुझे मुगल बताते हैं. मैं मुगल कैसे हो सकता हूं? उन्होंने पीएचडी कर रखी है लेकिन उन्हें इतिहास की खास जानकारी नहीं है. 

 

सवालः मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आपको ‘भारत का दुश्मन’ करार दिया है.

जवाबः मुख्यमंत्री को फौरन अपना इस्तीफा दे देना चाहिए अलबत्ता हुकूमत में उनके चंद ही रोज बाकी हैं. मैं यहां असम में बैठा हूं. मैं संसद में जाता हूं. अगर मैं देश का दुश्मन हूं तो वे मुझे आजादी के साथ घूमने-फिरने क्यों दे रहे हैं? केंद्रीय गृह मंत्रालय मुझे गिरफ्तार क्यों नहीं करवा देता? मतदान के बाद मैं मुख्यमंत्री को अदालत में घसीटूंगा. मैं उनको छोड़ूंगा नहीं.

 

सवालः हिमंत बिस्व सरमा का दावा है कि आपने मुस्लिम महिलाओं से 10 बच्चे जनने को कहा है.

जवाबः मैंने ऐसा कभी नहीं कहा. मैं उन्हें सबूत दिखाने की चुनौती देता हूं कि मैं ऐसा कोई बयान दे रहा हूं.

 

सवालः सरमा का कहना है कि वे आधुनिक शिक्षा का समर्थन करते हैं, लेकिन आप मदरसा शुरू करना चाहते हैं. 

जवाबः मैं आधुनिक शिक्षा का समर्थन करता हूं. अजमल फाउंडेशन ने अस्पताल बनाए हैं और डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, आइएएस और आइपीएस अधिकारी तैयार किए हैं. मैंने आज तक एक भी मदरसा कायम नहीं किया है. मैं किसी भी मदरसे के गवर्निंग बॉडी में नहीं हूं. सरमा जबरन मदरसे बंद करना चाहते हैं. मैं इसके खिलाफ हूं. ऐसा भारत के किसी भी सूबे में नहीं हुआ है. ऐसा मुझे और मुसलमानों को उकसाने के लिए किया गया ताकि वे मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए सांप्रदायिक मुद्दा लपक सकें. जब हिमंत बिस्व सरमा कांग्रेस में थे तब वही मदरसों और कुरान की तारीफ के कसीदे पढ़ते नहीं थकते थे. अब वे आरएसएस और वीएचपी की भाषा बोल रहे हैं क्योंकि वे मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. लेकिन मुझे ऐसा होने की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आती.?

 

सवालः सरमा का यह भी कहना है कि सत्रों और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की भूमि पर अवैध आप्रवासियों के कब्जे के पीछे आप ही हैं.

जवाबः यह अतिक्रमण कब शुरू हुआ? यह अतिक्रमण तब भी जारी रहा जब वे तीन बार लगातार मंत्री रहे. उनकी सरकार ने इन लोगों को संरक्षित वन क्षेत्र में बसा दिया. बाढ़ और भूमि कटाव की वजह से जमीन गंवाने वाले लोगों को राज्य में अलग-अलग जगहों पर बसा दिया गया. इस सबके लिए कौन जिम्मेदार है? हम कोई गैर कानूनी काम नहीं करते हैं. चालीस साल पहले जो हुआ, उसके लिए भी मुझे ही दोषी ठहराया जाता है. असम के लोग सरमा के फरेब को समझ सकते हैं. वे लोगों को सिर्फ बेवकूफ बनाना जानते हैं. जिन चार मंत्रालयों को उन्होंने संभाला, उनका काम सामने रखने की बजाए वे बस मेरा नाम जपते हैं. वे बार-बार कहते हैं कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, हालांकि मैंने पहले ही साफ कर दिया है कि मैं मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता.

 

सवालः आप मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनना चाहते?

जवाबः मुझे नहीं लगता कि मैं असम का मुख्यमंत्री बनने के काबिल हूं.

 

सवालः आप नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ क्यों हैं? अगर मुसलमानों को इसके प्रावधानों में शामिल कर लिया जाएगा तो क्या आप इसका समर्थन करेंगे?

जवाबः सीएए भारत के संविधान के खिलाफ है. कोई धर्म के आधार पर कानून नहीं बना सकता. इसके अलावा, असम में इससे असमी लोगों की भाषाई पहचान को खतरा है. हम अपनी भाषा को लेकर बहुत संवेदनशील हैं. सीएए असमिया लोगों को अपने ही राज्य में अल्पसंख्यक बना देगा. हम अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने के लिए अपनी जान देने को तैयार हैं.

 

सवालः आप असमी पहचान पर जोर दे रहे हैं, लेकिन कई लोग आपको असमी नहीं मानते हैं. आपकी धार्मिक पहचान पर राजनीति की जा रही है. आपकी पहली पहचान क्या है?

जवाबः मैं पहले असमी हूं और फिर मुसलमान.

 

सवालः अगर आठ पार्टियों का महाजोट सत्ता में आई तो एआइयूडीएफ की तीन प्राथमिकताएं क्या होंगी?

जवाबः सारी पार्टियां मिलकर प्राथमिकताएं तय करेंगी. हमने पहले ही एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम जारी कर दिया है. जहां तक हमारी पार्टी की बात है तीन प्राथमिकताएं होंगी अवैध घुसपैठ रोकना, बाढ़ रोकना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना.

 

सवालः अवैध घुसपैठ के मामले की वजह से असम में एनआरसी अपडेट किया गया. अब, भाजपा ने नया और सुधरा हुआ एनआरसी लाने का वादा किया है.

जवाबः मेरा मानना है कि हर संभव बढ़िया एनआरसी न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की निगरानी में बनाया गया. इस एनआरसी को स्वीकार कर असम को आगे बढ़ना चाहिए. हिमंत बिस्व सरमा ने अब आरोप लगाया है कि एनआरसी तैयार करने के लिए राज्य के समन्वयक प्रतीक हजेला ने असम सरकार को बेवकूफ बनाया. कोई अफसर इतने होशियार मंत्री को बेवकूफ कैसे बना सकता है? आपको (सरमा को) यह एहसास कब हुआ कि हजेला ने आपको बेवकूफ बनाया? आपको तब एहसास हुआ जब एनआरसी का नतीजा आपके अफसाने के मुताबिक नहीं था. इसीलिए आप नया एनआरसी चाहते हैं क्योंकि आप कुछ लोगों को जबरन बांग्लादेशी साबित करना चाहते हैं. यह महज भाजपा की ख्वाहिश है, असम के लोगों की नहीं.

 

सवालः असम में मियां समुदाय के लिए अलग संग्रहालय बनाने की मांग पर आपका रवैया क्या है? अपनी अलग पहचान साबित करने के लिए कुछ युवा मुस्लिम लेखकों के मियां भाषा में कविता लिखने के बारे में आपका क्या कहना है?

जवाबः मैं मियां संग्रहालय की मांग का समर्थन नहीं करता. इस मांग से सरमा को ध्रुवीकरण का एक और मुद्दा मिल गया. जहां तक मियां भाषा में कविता करने का मामला है, तो इसके समर्थन या विरोध में मेरे पास कुछ भी कहने को नहीं है. लोगों के पास किसी भी भाषा में लिखने की आजादी है. लेकिन इसे धार्मिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.

 

सवालः एक ओर जहां भाजपा नेताओं ने राज्य में मोदी बनाम अजमल बना दिया है, वहीं आप गमोसा को बढ़ावा देने के मामले में प्रधानमंत्री को टक्कर दे रहे हैं. क्या यह असमी पहचान का प्रदर्शन है या प्रधानमंत्री मोदी को टक्कर?

जवाबः मैं अपनी असमी पहचान जाहिर करता हूं. मैं मोदी के दिल्ली आने से पहले से ही गमोसा का इस्तेमाल करता रहा हूं. उनसे कोई मुकाबला नहीं है. भाजपा ही उन्हें मेरे मुकाबले करने की कोशिश कर रही है.

 

सवालः इस चुनाव में महाजोट को आप कितनी सीटें दे रहे हैं?

जवाबः 101 से ज्यादा सीटें.

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