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क्रिप्टोकरेंसी पर पाबंदी को लेकर क्यों चिंतित हैं निवेशक

क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों में घबराहट फैली हुई है और उनमें चर्चा है कि केंद्र सरकार इसके ट्रेड पर पाबंदी के लिए संसद में एक विधेयक लेकर आ रही है.

प्रतीकात्मक इलस्ट्रेशन (सिद्धांत जुमडे) प्रतीकात्मक इलस्ट्रेशन (सिद्धांत जुमडे)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल मुद्रा है जिसका इस्तेमाल सामान और सेवा खरीदने में किया जा सकता है
  • इसका हिसाब-किताब मजबूत क्रिप्टोग्राफी से सुरक्षित ऑनलाइन सौदे के रूप में रहता है
  • हालांकि ज्यादातर देश ऐसी डिजिटल मुद्राओं को वैध नहीं मानते हैं

क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों में घबराहट फैली हुई है और निवेश को लेकर है उनमें चर्चा है कि केंद्र सरकार इसके ट्रेड पर पाबंदी के लिए संसद में एक विधेयक लेकर आ रही है. क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग में कीमतों के उतार-चढ़ाव की अटकलें सीएफडी (कांट्रैक्ट फॉर डिफरेंस) ट्रेडिंग अकाउंट के माध्यम से एक्सचेंज में लगाई जाती हैं तथा इसी से खरीद-बिक्री होती है. सीएफडी दो पक्षों के बीच एक तरह का कांट्रैक्ट होता है जिसमें खरीदार बेचने वाले को कांट्रैक्ट के समय की कीमत और मौजूदा कीमत के बीच के अंतर वाली रकम का भुगतान करता है. खबरें ये भी हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की देखरेख में भारत अपनी डिजिटल करेंसी लाने जा रहा है. लेकिन इसमें अभी लंबा समय लगेगा.  

अमेरिका की पर्सनल फाइनेंस फर्म नर्डवालेट के मुताबिक, क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल मुद्रा है जिसका इस्तेमाल सामान और सेवा खरीदने में किया जा सकता है. लेकिन इसका हिसाब-किताब मजबूत क्रिप्टोग्राफी से सुरक्षित ऑनलाइन सौदे के रूप में रहता है. हालांकि ज्यादातर देश ऐसी डिजिटल मुद्राओं को वैध नहीं मानते हैं पर इनका उपयोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने में हो रहा है. क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन नामक तकनीक पर काम करती है. ब्लॉकचेन एक केंद्रीकृत तकनीक है जिसके जरिये कंप्यूटर पर इसके सौदों को दर्ज किया जाता है. सार्वजनिक तौर पर करीब 6,700 विभिन्न तरह की क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग हो रही है. मार्केट रिसर्च वेबसाइट कॉइनमार्केटकैप के मुताबिक, सभी तरह की क्रिप्टोकरेंसी की अनुमानित कीमत 16 खरब डॉलर से अधिक है. इसमें से सबसे लोकप्रिय डिजिटल करेंसी बिटकॉइन की कीमत 969.6 अरब डॉलर है. बिटकॉइन की स्पॉट प्राइस पहली बार 16 फरवरी को 50 हजार डॉलर के स्तर से ऊपर पहुंच गई थी. 24 फरवरी को बिटकॉइन की कीमत 50,584.50 डॉलर थी. बिटकॉइन की खरीद अनेक क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के जरिये की जा सकती है. इसमें एक डिजिटल वॉलेट बनाया जाता है जिसमें करेंसी रखी जाती है. एक बिटकॉइन की कीमत ज्यादा होने की वजह से इसे हिस्सों में भी एक्सचेंज से खरीदा जा सकता है.  

एशिया में भारत, चीन के बाद बिटकॉइन ट्रेडिंग, संख्या और रकम दोनों के लिहाज से दूसरा प्रमुख देश है. इस उद्यम से जुड़े लोग बताते हैं कि भारत में करीब 75 लाख लोगों ने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है. 2015-20 के बीच भारत में करीब 10,017 बिटकॉइन की ट्रेडिंग हुई जिसकी कीमत 9.47 करोड़ डॉलर थी. यह एशिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा बिटकॉइन कारोबार है. चीन में 18.1 करोड़ डॉलर कीमत के 20,553 बिटकॉइन की ट्रेडिंग हुई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2020 में भारत में 7,236.50 बिटकॉइन की ट्रेडिंग हुई जो कि 2019 के मुकाबले 234 प्रतिशत ज्यादा है. बिटकॉइन ट्रेडिंग में अमेरिका दुनिया में नंबर एक है.  

क्रिप्टोकरेंसी के वर्गीकरण में वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ अपनी एक राय रखते हैं. कई कहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी को वैध मुद्रा के तौर पर अनुमति देने से समस्याएं उत्पन्न होंगी. देश नहीं चाहेंगे कि उनकी सार्वभौम मुद्राओं की जगह कोई क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन का जरिया बने. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने हाल में एक टीवी डिबेट में कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी को एक परिसंपत्ति के तौर पर तो मान्यता दी जाती है लेकिन मुद्रा के रूप में नहीं. उन्होंने डिजिटल करेंसी की भी वकालत की. उन्होंने कहा, “ये समय कागज से डिजिटल करेंसी की ओर जाने का है. सरकार को डिजिटल रुपए के लिए उचित मॉडल बनाना चाहिए.”  

2014 से चीन का केंद्रीय बैंक क्रिप्टोकरेंसी बनाने की संभावनाएं टटोल रहा है लेकिन वहां भी बिटकॉइन एक्सचेंज और क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म पर पाबंदी लगी हुई है. हाल की रिपोर्ट बताती हैं कि आखिरकार चीन की नीति सरकारी क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च करने के पक्ष में हो गई है. इस संबंध में चीन ने एक नया कानून भी बनाया है. इस साल जनवरी में चीन ने 30 लाख ई-युआन का इलेक्ट्रॉनिक कैश शेनझेन के करीब 1,00,000 लोगों को जारी किया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिजिटल कैश को डिजिटल करेंसी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट (डीसीईपी) कहा गया और इसे चीन के केंद्रीय बैंक से मान्यता हासिल है. इससे ग्लोबल फाइनेंस सिस्टम में डॉलर के दबदबे को भी चुनौती मिलने की उम्मीद दिखती है.  

भारत में विशेषज्ञ कहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी के फायदे बहुत हैं. जेबपे के सीईओ राहुल पगदिपति कहते हैं कि बिटकॉइन ने विकेंद्रीकृत, तिहरी एंट्री वाली अकाउंटिंग और वैल्यू ट्रांसफर सिस्टम शुरू किया है जिससे भ्रष्टाचार और महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी. इस पर पाबंदी से भारत में ब्लॉकचेन स्टार्टअप के निवेश पर भी पाबंदी लग जाएगी, वेंचर कैपिटलिस्ट अपनी दुकान बंद करने या विदेश जाने के लिए मजबूर हो जाएंगे. कॉइनडीसीएक्स के सुमित गुप्ता का मानना है कि इसे वैल्यू स्टोर के तौर पर अनुमति देनी चाहिए और लोगों को इसमें निवेश की भी मंजूरी होनी चाहिए. इंडस्ट्री के लोग अनुमान जताते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी 340 स्टार्टअप के साथ 10 खरब डॉलर का उद्योग है. 

महामारी के दौरान जब करोड़ों लोगों को घर से काम करने पर बाध्य होना पड़ा तो अनेक लोगों को एक ही चीज से मजबूती मिली और वह है क्रिप्टोकरेंसी. सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआइ की ओर से क्रिप्टोकरेंसी पर लगी पाबंदी को हटा दिया है और इससे देश के क्रिप्टो एक्सचेंजों ने राहत की सांस ली है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कुछ महीनों के भीतर ही वजीरएक्स और कॉइनडीसीएक्स जैसे भारतीय क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंजों में भारी संख्या में क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग देखी गई.

अनुवादः मनीष दीक्षित

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