scorecardresearch
 

तेलंगाना ने शुरू की घर पर ‘प्रसादम्’ डिलिवरी सेवा

केसीआर सरकार ने यादगिरिगुट्टा में भव्य मंदिर के उद्घाटन से पहले विभिन्न मंदिरों में चढ़ावे की होम डिलिवरी सर्विस शुरू की.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राज्य में 10 लोकप्रिय मंदिरों के प्रसादम् की होम डिलिवरी सर्विस शुरू कर दी गई है
  • प्रसाद में सूखे मेवे शामिल होंगे और श्रद्धालु निकटतम डाक घर में जरूरी शुल्क अदा करने के बाद इसे बुक कर सकते हैं
  • केसीआर को उम्मीद है कि नया यादगिरिगुट्टा में श्री लक्ष्मी नरसिंह मंदिर पर्यटन का बड़ा केंद्र होगा

राज्य सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर श्रद्धालुओं को तेलंगाना के प्रमुख मंदिरों में ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था करने के बाद 10 लोकप्रिय मंदिरों के प्रसादम् की होम डिलिवरी सर्विस शुरू कर दी गई है. राज्य के धर्मादा विभाग के मंत्री ए. इंद्रकरण रेड्डी का कहना है, ‘‘हमने इस अद्वितीय सेवा के लिए इंडिया पोस्ट के साथ हाथ मिलाया है.’’ होम डिलिवरी सर्विस 27 मार्च को औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई.

प्रसाद में सूखे मेवे शामिल होंगे और श्रद्धालु निकटतम डाक घर में जरूरी शुल्क अदा करने के बाद इसे बुक कर सकते हैं. राज्य में कहीं भी इसे तीन दिन के अंदर डिलिवर कर दिया जाएगा और सेवा शुल्क के तौर पर इंडिया पोस्ट 100 रु. लेगा. रेड्डी का कहना है, ‘‘हमें उम्मीद है कि हम देशभर के 1,60,000 डाकघरों के जरिए इस सेवा को देशभर में पहुंचा देंगे.’’ हिंदू धार्मिक और धर्मादा विभाग ने इसके लिए इंडिया पोस्ट के साथ समझौता प्रपत्र (एओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस सेवा में यादगिरिगुट्टा का श्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर, भद्राचलम का श्री सीताराम रामचंद्र स्वामी मंदिर, बसारा का श्री गंगा सरस्वती मंदिर, कोंडागट्टू का अंजनेया स्वामी मंदिर, कोमुरावेल्ली का श्री मल्लिकाअर्जुन स्वामी मंदिर, सिकंदराबाद के श्री उज्जैनी महाकाली मंदिर और गणेश मंदिर, बालकमपेट का येल्लम्मा-पोचम्मा मंदिर और हैदराबाद में कर्मनघाट का श्री हनुमान मंदिर शामिल हैं.

धर्मादा विभाग ने 7 अप्रैल, 2020 को श्रद्धालुओं के लिए 12 मंदिरों में ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था शुरू की थी. समाज के रूढ़िवादी वर्ग को छोड़कर, जो इसे स्थापित धार्मिक विधानों का प्रहसन मानते हैं, पूजा के इस नए तरीके को व्यापक स्वीकार्यता हासिल हो गई. अब जो श्रद्धालु मंदिर नहीं जा सकते वे टी ऐप फोलियो मोबाइल ऐप के जरिए और डाकघरों के जरिए अरिजीत सेवा के लिए भी बुकिंग कर सकते हैं (जिससे उन्हें अपने ईष्ट देव ऑनलाइन नजर आएंगे). जो लोग ऑनलाइन ‌अरिजीत सेवा करना चाहते हैं, उन्हें अपने नाम और गोत्र बताने होंगे, फिर उसी के मुताबिक पूजा होगी. पूजा या सेवा की पुष्टि के लिए मोबाइल पर एक टेक्स्ट मेसेज भेज दिया जाएगा. राज्य इन सेवाओं को 15 दूसरे मंदिरों में भी लागू करना चाहता है. अभी तक टी ऐप्प फोलियो में 22 मंदिरों को शामिल कर लिया गया है.

विश्लेषकों मानना है कि इस तरह की पहल की वजहें कुछ और हैं. मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 2014 में पद संभालने के साथ ही यादगिरिगुट्टा में श्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर का कायाकल्प करने और उसे विकसित करने के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी. दरअसल, सबसे अमीर हिंदू मंदिर—तिरुमला में श्री वेंकटेश्वर मंदिर—भाषाई आधार पर राज्य के पुनर्गठन के समय आंध्र प्रदेश के हिस्से में चला गया. केसीआर बार-बार जिन जगहों पर जाते हैं उनमें यादगिरिगुट्टा शामिल है. उन्होंने पिछले छह साल के दौरान इस मंदिर के रिडिजाइन और माहौल की खुद ही निगरानी की है.

राज्य इस परियोजना पर जमकर पैसा खर्च कर रहा है. 1.5 एकड़ के पठार यादगिरिगुट्टा में सदियों तक नरसिंह का एक छोटा गुफा मंदिर था और हनुमान की मूर्ति थी. इस छोटे से मंदिर में हैदराबाद के श्रद्धालु एक ही दिन में जाया-आया करते थे. 1970 और 1980 के दशक में इसकी लोकप्रियता बढ़ी क्योंकि वहां एक भविष्यवक्ता था लेकिन इसे तिरुमला जितनी लोकप्रियता कभी हासिल नहीं हुई.

जीणोद्धार के बाद यह मंदिर मई में उद्घाटन के लिए तैयार है. अब यह गुफानुमा मंदिर चार एकड़ के प्लेटफॉर्म पर है और इसके लिए मूल पठार के चारों ओर कंक्रीट को जमाकर चौड़ा कर दिया गया है. जब तक इसे पूरा किया जाएगा (जो संभवतः अगले साल होगा) तब तक राज्य इस परियोजना पर 1,000 करोड़ रुपए खर्च कर चुका होगा. केसीआर को उम्मीद है कि नया यादगिरिगुट्टा में श्री लक्ष्मी नरसिंह मंदिर पर्यटन का बड़ा केंद्र होगा. राज्य के बाहर रहने वाले तेलंगाना वासियों समेत जो लोग तीर्थयात्रा नहीं कर पाएंगे, उनके लिए स्पीड पोस्ट की सेवा हमेशा उपलब्ध रहेगी.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
ऐप में खोलें×