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मामा का ‘नाम बदलो अभियान’

हफ्ते भर के भीतर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में दो जगहों के नाम बदलने की घोषणा कर डाली.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (पीटीआइ) मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (पीटीआइ)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुख्यमंत्री ने होशंगाबाद और नसरुल्लागंज का नाम बदलने का ऐलान कर दिया है
  • होशंगाबाद का नाम 15वीं सदी के मालवा के सुल्तान होशंग शाह के नाम पर है जिसका मुख्यालय मांडू था
  • नसरुल्लागंज का नाम नसरुल्ला खां के नाम पर रखा गया जो कि भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खां के बड़े भाई थे

हफ्ते भर के भीतर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (सीएम) शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में दो जगहों के नाम बदलने की घोषणा कर डाली. दोनों ही जगहों का नामकरण इतिहास के मध्य काल और शुरुआती आधुनिक काल में हुआ था. शुक्रवार को नर्मदा जयंती के मौके पर नर्मदा नदी के किनारे होशंगाबाद में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मौजूद लोगों से पूछा कि क्या वे चाहते हैं कि शहर का नाम बदलकर नर्मदापुरम रखा जाए? भीड़ ने हामी की प्रतिक्रिया दी और चौहान ने कहा कि वे इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे. होशंगाबाद संभागीय मुख्यालय है और उत्तर-दक्षिण रेलमार्ग का महत्वपूर्ण स्टेशन है. इसके लिए अनेक स्तरों पर आवश्यक बदलाव करने होंगे.  

रविवार को सीएम ने अपने पुत्र कार्तिकेय की तरफ से नसरुल्लागंज में आयोजित प्रेम सुंदर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के समापन समारोह में हिस्सा लिया और घोषणा की कि नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरुंदा किया जाएगा. सीएम ने यहां भी वही ‘लोकतांत्रिक’ अपनाई जो उन्होंने होशंगाबाद में अपनाई थी. उन्होंने भीड़ से पूछा कि क्या वे नाम बदलना चाहते हैं और भीड़ की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर इसकी घोषणा कर दी. क्रिकेट टूर्नामेंट का नाम सीएम के माता-पिता के नाम पर है और नसरुल्लागंज शहर उनके विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बुधनी में आता है.  

हालांकि शहरों के नाम बदलना कोई नई बात नहीं है और ये पिछले कुछ समय से राजनीतिक एजेंडा भी बन गया है लेकिन नामकरण का जो वक्त चुना गया वह दिलचस्प है. आखिर चौहान ने अभी क्यों इन मांगों को पूरा करने का समय चुना? पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने हाल ही में भोपाल के नजदीक एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट हलाली डैम का नाम बदलने की मांग की थी. भारती ने कहा, नाम छल-कपट का प्रतीक है. इतिहास के मुताबिक, मॉडर्न प्रिंसली स्टेट ऑफ भोपाल के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने काफी संख्या में अपने दुश्मनों को नदी के किनारे मार डाला था और इसे हलाली नाम दिया.  

एक भाजपा नेता ने यह दावा करते हुए कि इस कदम से उमा भारती की मांगें पूरी होंगी, कहा, “उमा भारती ने इससे पहले राज्य में शराबबंदी और कुछ स्थानों के नाम बदलने की मांग की थी. सीएम ने घोषणा की थी कि शराबबंदी कोई हल नहीं है, राज्य को पूर्णतया नशामुक्ति की दिशा में काम करना होगा. नाम बदलने की मांग पर सीएम ने कदम उठाया है और दो शहरों के नाम बदल भी दिए हैं.”  
राजनीति पर नजर रखने वालों को लगता है कि नाम बदलना शिवराज सिंह का उन मुद्दों पर रुख सख्त कर लेना है जिनकी पिछले कार्यकाल में उन्होंने अनदेखी की थी. चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश उन पहले राज्यों में था जिन्होंने धर्मांतरण रोधी कानून बनाया, जिसे बोलचाल में लव जिहाद कानून भी कहा जाता है. हालांकि लाडली लक्ष्मी और किसानों को रियायत देने जैसी योजनाएं उनके मौजूदा कार्यकाल में नदारद हैं जो उनकी लोकप्रियता का आधार रहीं. इन्हीं के आधार पर सीएम खुद को प्रदेश के बच्चों का मामा कहलाना पसंद करते थे.  

भोपाल का नाम राजा भोज के नाम पर भोजपाल करने की मांग समय समय पर भाजपा नेता उठाते रहते हैं. साथ ही भोपाल में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की भी मांग उठती रही है. अपने पिछले कार्यकाल में चौहान ने घोषणा की थी कि वे रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार को लिखेंगे और अब इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है और ये किसी प्राइवेट कंपनी की तरफ से विकसित किया गया पहला रेलवे स्टेशन होगा. हुजूर क्षेत्र के विधायक रामेश्वर शर्मा ने मांग की है कि ईदगाह हिल्स का नाम गुरु नानक टेकरी रखा जाए.  

होशंगाबाद का नाम 15वीं सदी के मालवा के सुल्तान होशंग शाह के नाम पर है जिसका मुख्यालय मांडू था. नसरुल्लागंज का नाम नसरुल्ला खां के नाम पर रखा गया जो कि भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खां के बड़े भाई थे. चौहान के पिछले कार्यकाल में होशंगाबाद संभागीय मुख्यालय का नाम बदलकर नर्मदापुरम किया गया था. हालांकि राजस्व संभाग का नाम इसलिए नहीं बदला जा सका क्योंकि ज्यादातर दस्तावेजी काम जिला स्तर पर होता है.   

कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता कहते हैं, “भारत में ब्रिटिश, फ्रेंच और पुर्तगाली समेत सभी तरह के विदेशी शासक आए. मेरा सवाल भाजपा से यह है कि सिर्फ मुस्लिम नाम क्यों बदले जा रहे हैं? नाम बदलकर भाजपा बहुसंख्यक मतों को अपने तरफ करने का प्रयास कर रही है. ये सब असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हो रहा है क्योंकि उनका कोई हल भाजपा के पास नहीं है. जबकि नाम बदलने में भी करोड़ों रुपए का खर्च आता है.” 

अनुवादः मनीष दीक्षित

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