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आइआरसीटीसी की कामयाबी बदलते वक्त के साथ बाजार बदलने की जरूरत बताती है

हाल में आए इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज़्म कॉरपोरेशन(आइआरसीटीसी) के आइपीओ ने निवेशकों को मालामाल कर दिया. 100 फीसदी से ज्यादा प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए इस शेयर ने तीन महीने में भी पैसे तीन गुने पर दिए. ऐसे समय में जब कंपनियां बाजार में आइपीओ लाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहीं, तब एक सरकारी कंपनी के आइपीओ की यह सफलता कई इशारे करती है.

आइआरसीटीसी का लोगो आइआरसीटीसी का लोगो

 

आर्थिक विकास दर पिछली पांच तिमाहियों से ढलान पर है, कोर सेक्टर और औद्योगिक उत्पादन के ताजा आंकड़े आगे भी गिरावट के संकेत दे रहे हैं, कॉर्पोरेट टैक्स में मिली राहत से कंपनियों के मुनाफे भले बढ़ गए हों लेकिन खपत घटने कीचिंता कार से बिस्कुट तक सभी कंपनियों को सता रही है, कर्ज सस्ता होने के बाद भीक्रेडिट ग्रोथ नकारात्मक है और निजी निवेश बढ़ने के आसार अभी नजर नहीं आ रहे. इस घोर नकारात्मक आर्थिक माहौल के बाद भी शेयर बाजार ऊंचाई पर है. आज के इकोनॉमिकम में बात आइपीओ बाजार पर.

(आइआरसीटीसी) केआइपीओ ने निवेशकों को मालामाल कर दिया. 100 फीसदी से ज्यादा प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए इस शेयर ने तीन महीने में भी पैसे तीन गुने पर दिए. ऐसे समय में जब कंपनियां बाजार में आइपीओ लाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहीं, तब एक सरकारी कंपनी के आइपीओ की यह सफलता कई इशारे करती है.

डीमार्ट के बाद आइआरसीटीसी के आइपीओ की सफलता यह बताती है कि अच्छे कैश इन्फ्लो वाली कंपनियां अभी भी निवेशकों की पहली पसंद हैं.

बीते एक दशक में अर्थव्यवस्था की सूरत कई मायनों में बदल गई, लेकिन निवेश के लिए वे कंपनियां नहीं मिल रहीं जिनकों हम अपनी जिंदगी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे. अमेरिका के बाजार में फेसबुक, ट्विटर, गूगल इसलिए बड़ा मुनाफा कमा रहीं, क्योंकि बाजार में सही समय पर पूंजी जुटाने के लिए बाजार में आईं और निवेशकों ने अर्थव्यवस्था के बदलते परिदृश्य में निवेश की कंपनियां भी बदली. लेकिन भारत के बाजार में ऐसा नहीं है. ओला – उबर को हम ऑटो इंडस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देख रहे, लेकिन निवेश के लिए अभी भी बाजार में पुरानी ऑटो कंपनियां हैं. इसी तरह गोल्ड को पछाड़कर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं (मोबाइल) देश में दूसरी सबसे ज्यादा आयात होने वाली चीज हो गई, लेकिन निवेश के लिए बाजार में कोई मोबाइल कंपनी उपलब्ध नहीं है. व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जो देश में राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था तक दखल रखते हैं भारतीयों की पहुंच से दूर हैं. ऐसे उदाहरण और भी हैं.

सेबी में 37 आइपीओ को मंजूरी दी. कुछ कंपनियां बाजार में समय रहते दस्तक नहीं दे पाईं. 30 हजार करोड़ के करीब 30 आइपीओ बाजार में आने को तैयार हैं. लेकिन सबको ऐसा ही रिस्पॉन्स मिले यह जरूरी नहीं इसके लिए डीमार्ट और आइआरसीटीसी जैसे बिजनेस मॉडल और कैश फ्लो होना जरूरी हैं.

बाजार के नियामक को भी इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है कि जो कंपनियां बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं या किसी नई तकनीक के बल पर बाजार में क्रांतिकारी बदलाव लाती हैं तो उन्हें बाजार से पैसा जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. एक स्टार्टअप अगर मजबूत बिजनेस मॉडल के दम पर फंडिंग ला सकता है तो क्यों नहीं निवेशक अपनी पूंजी उसमें निवेश कर सकते हैं. दलील यह दी जा सकती है कि छोटे निवेशकों की पूंजी के लिए बड़ा जोखिम होगा. तो मौजूदा बाजार में छोटे निवेशकों की पूंजी कहां सुरक्षित है

आइएलऐंडएफएस, यस बैंक, दीवान हाउसिंग, रिलायंस कम्युनिकेशन जैसी न जाने कितनी कंपनियां हैं तो निवेशकों की बचत लील गईं. अगर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के चाकू उनके लिए तेज किए जाएं तो नए और छोटे खुद कायदे में रहेंगे.

बाजार को बढ़िया रिटर्न देने के लिए तैयार करना मौजूदा वक्त में इसलिए भी जरूरी है क्योंकि निवेशकों के लिए विकल्प सीमित हो रहे हैं. सस्ते कर्ज के दौर में बैंक बचत पर मोटा ब्याज देने में असमर्थ हैं और प्रॉपर्टी बाजार का हाल भी पिछले चार-पांच वर्षों से बेहाल है.

(शुभम शंखधर इंडिया टुडे के एसोसिएट एडिटर हैं)

 

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