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इकोनॉमिकमःकर्ज नहीं मर्ज, बशर्ते...

कर्ज लेना बुरा नहीं. कर्ज का प्रबंधन आना जरूरी है. अच्छा कर्ज आपकी आर्थिक स्थिती को मजबूत बनाता है, जबकि बुरा कर्ज वित्तीय संकट का कारण बनता है.

सोच-समझकर लिया गया कर्ज बुरा नहीं सोच-समझकर लिया गया कर्ज बुरा नहीं

घर में बड़े समझाते हैं कर्ज लेना बुरी बात है. उधार लेकर घी पीने जैसी कहावतें भी बन गईं. कर्ज हमेशा जरूरत पर ही लिया जाता है फिर चाहे वह दोस्त से लिया गया हो या किसी बैंक से. बड़े शहरों में क्रेडिट कार्ड का चलन जोरों पर है. वह भी एक तरह का कर्ज ही है. बिजली का बिल हो या फिल्म का टिकट, रेस्त्रां में खाने पीने भुगतान करना हो या ऑनलाइन शॉपिंग क्रेडिट कार्ड ही युवाओं का सबसे पसंदीदा विकल्प है. ऐसे में अगर कर्ज लेना वाकई गलत है तो क्या करोड़ों लोग जानबूझकर गलती कर रहे हैं?

कर्ज दरअसल खरीदारी की ताकत देता है. मसलन, क्रेडिट कार्ड में कोई पैसा नहीं भरा होता लेन देन केवल भरोसे पर टिका होता है कि जो खरीदारी कर रहा है वह समय रहते तय नियम शर्तों के साथ अपनी देनदारी चुका देगा. यानी सरल भाषा में समझें तो कर्ज खपत बढ़ाने में बेहद उपयोगी है. देश में ज्यादातर वित्तीय सलाहकार भी कर्ज से बचने की सलाह देते हैं. मेरा मत इससे भिन्न है. अच्छा कर्ज लेने में बुराई नहीं. बुरे कर्ज से बचना जरूरी है.

कर्ज लेना अगर वाकई इतनी बुरी बात है तो क्यों भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कटौती कर कर्ज लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है? क्यों घर, गाड़ी से लेकर बच्चे की पढ़ाई तक के लिए कई तरह के कर्ज उत्पाद बाजार में तैर रहे हैं? यानी कर्ज लेना बुरा नहीं बल्कि अपनी आर्थिक स्थिती को समझते हुए कर्ज लेना चाहिए. अच्छे और बुरे कर्ज में अंतर कर पाना जरूरी है. अच्छे कर्ज आपकी आर्थिक स्थिती को बेहतर बनाते हैं, जबकि बुरे कर्ज आपको वित्तीय संकट में फंसा देते हैं.

अब बड़ा सवाल अच्छे और बुरे कर्ज में अंतर कैसे करें? इसका सबसे सीधा और सरल तरीका यह है कि चाहत और जरूरत में अंतर करना सीख लें. या कर्ज का उपयोग किस काम के लिए कर रहे हैं यह जानना बेहद जरूरी है. कर्ज लेकर महंगे फोन खरीदना, पार्टी करना, घूमना खराब हो सकता है. लेकिन किसी अच्छे बिजनेस के लिए, घर खरीदने के लिए अगर आप कर्ज ले रहे हैं तो यह आपकी आर्थिक स्थिती को संकट में नहीं डालेगा.

कर्ज लेते समय यह ध्यान रखें कि आपके पास इसको चुकाने की पुख्ता योजना है. कर्ज जिस दर पर मिल रहा है वह तर्कसंगत है, ऐसा तो नहीं आपकी मजबूरी का फायदा उठाकर कर्ज देने वाला आपको औने-पौने दर पर कर्ज दे रहा. कर्ज का समझदारी से इस्तेमाल ही दरअसल वित्तीय साक्षरता की सीढ़ी है. कई बार लोग अपनी हैसियत से बड़ा घर मोटे कर्ज की सहायता से ले लेते हैं लेकिन कर्ज की किश्त हर महीने चुकाते चुकाते उनका वित्तीय संतुलन ही बिगड़ जाता है और जीवन शैली को प्रभावित करता है. ऐसे ही निर्णयों से आपका अच्छा कर्ज बुरे कर्ज में बदल जाता है. इसी तरह महंगी गाड़ी, महंगे गहने आदि भी आपकी आर्थिक स्थिती के कई बार सही नहीं होते हैं.

कर्ज का बेहतर प्रबंधन आपको सुरक्षा देता है. मसलन, क्रेडिट कार्ड आपको 45 दिनों के लिए मुफ्त कर्ज देता है. आप पूरे महीने के अपने सभी खर्चें क्रेडिट कार्ड से करके 45 दिन बाद अपनी सैलरी से क्रेडिट कार्ड का बिल भर सकते हैं. इस तरह पूरे महीने आपके खाते में नकदी बनी रहेगी और क्रेडिट का इस्तेमाल आपके सिबिल स्कोर को भी सुधारने में मदद करेगा.

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