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इकोनॉमिकमः बाजार में LIC के शेयर बिकने से क्या होगा?

आंकड़ों से निकलकर जरा हकीकत से रू-ब-रू होइए. एलआइसी की लिस्टिंग का मतलब केवल सरकार की हिस्सेदारी बिकने और शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने भर से नहीं है. एलआइसी के बाजार में सूचीबद्ध होने से दरअसल कई ऐसे रहस्यों से पर्दा उठेगा जो सालों से दबे है.

एलआइसी एलआइसी

बजट की बड़ी घोषणाओं में एलआइसी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने का ऐलान भी था. सरकार की सबसे कीमती कंपनी में हिस्सेदारी बेचने के दम पर ही सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए विनिवेश का लक्ष्य 2 लाख करोड़ से ज्यादा का रखा. इसका बड़ा हिस्सा एयर इंडिया और एलआईसी से ही आने की उम्मीद है. हालांकि विनिवेश के मोर्चे पर सरकार का प्रदर्शन मौजूदा वित्त वर्ष में खराब रहा. 105000 करोड़ का लक्ष्य मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार की ओर से रखा गया था. लेकिन अब तक करीब 18000 करोड़ रुपए की सरकार के खाते में आए हैं. बजट में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए लक्ष्य घटाकर 65000 करोड़ कर दिया गया है.

आंकड़ों से निकलकर जरा हकीकत से रू-ब-रू होइए. एलआइसी की लिस्टिंग का मतलब केवल सरकार की हिस्सेदारी बिकने और शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने भर से नहीं है. एलआइसी के बाजार में सूचीबद्ध होने से दरअसल कई ऐसे रहस्यों से पर्दा उठेगा जो सालों से दबे है. मसलन, कितनी ऐसी कंपनियां हैं जो बाजार में डूब रहीं और एलआइसी निवेशकों की गाढ़ी कमाई उसमें झोंक रही है? शेयर बाजार एलआइसी का दखल कितना है और घाटे मुनाफे का गणित क्या है? आदि

क्या कुछ बदल जाएगा एलआइसी की लिस्टिंग में

·   शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों को हर छोटी, बड़ी जानकारी एक्सचेंज को देनी होती है. ऐसे में एलआइसी की हर गतिविधि की जानकारी शेयरधारकों के सामने आएगी.

·   सरकारी कंपनियों को साधने के लिए सरकार एलआइसी का प्रयोग करती है. मसलन, डूबते आइडीबीआइ बैंक को एलआइसी के मत्थे मड़ना. शेयरधारकों के प्रति जवाबदेही तय होने के बाद सरकार सवाल पूछे जा सकते हैं और आवाज उठाई जा सकती है.  

·    एलआइसी की कोई भी स्कीम लंबी अवधि में निवेशकों को औसत पांच फीसदी से ज्यादा रिटर्न नहीं देती. बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न पर सकारात्मक असर पड़ेगा.

·   एलआइसी भी अन्य कंपनियों की तरह तिमाही नतीजे जारी करेगी. जहां, घाटे मुनाफे का आंकड़ा जनता के सामने होगा. निवेशक यह जान पाएंगे कि उनका निवेश कहां लगाया जा रहा है और कैसे उसका इस्तेमाल किया जा रहा है.

·   एलआइसी भी नियामक की निगेहबानी में आएगी, जो व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में मददगार होगा.

यानी कुल जमा बात अगर सरकार अगले साल एलआइसी को बाजार में सूचीबद्ध करा पाती है (जिसकी उम्मीद फिलहाल कम है) तो यह साहस वाला कदम होगा. लंबे समय से इक्ट्ठी हो रही कीचड़ की सफाई हो सकेगी. लोगों के रिटायरमेंट के पैसा और ज्यादा सुरक्षित हो सकेगा. ऐसे में सरकार को देश नहीं बिकने दूंगा जैसे जुमलों में फंसाकर - बहाना मत दीजिए कि वे अपने पैर पीछे खींच सकें. क्योंकि नुकसान हमारा ही है.

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