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बचत पर कैंची

बजट पेश होने से एक हफ्ते पहले सरकार ने छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में 10 आधार अंक की कटौती की है. यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड, किसान विकास पत्र, सुकन्या समृद्धि योजना, पोस्ट ऑफिस में सावधि जमा समेत विभिन्न छोटी बचत योजनाओं पर जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान मिलने वाला ब्याज कम हो जाएगा.

फोटो सौजन्यः बिजनेस टुडे फोटो सौजन्यः बिजनेस टुडे

बजट पेश होने से एक हफ्ते पहले सरकार ने छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में 10 आधार अंक की कटौती की है. यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड, किसान विकास पत्र, सुकन्या समृद्धि योजना, पोस्ट ऑफिस में सावधि जमा समेत विभिन्न छोटी बचत योजनाओं पर जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान मिलने वाला ब्याज कम हो जाएगा. सरकार हर तिमाही छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले रिटर्न की समीक्षा करती है. 

ब्याज दरों में इस कटौती के पीछे मुख्य वजह बैंकों पर कर्ज सस्ता करने का दवाब है. रिजर्व बैंक की ओर से नीतिगत दरों में तीन कटौतियों के बाद भी बैंक कर्ज की दर में बड़ी कटौती नहीं कर पाए. इसकी वजह बैंकों के डूबे हुए कर्ज के कारण खस्ताहाल बैलेंसशीट है. अर्थव्यवस्था में गहराती मंदी के मर्ज को दूर करने का इकलौता विकल्प सरकार को खपत बढ़ाना नजर आ रहा है. कर्ज सस्ता होने पर खपत बढ़ सकती है.

बैंकों के पास कर्ज देने के लिए फंड जुटाने का सबसे बड़ा स्रोत आम जनता की बचत है. छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर कम होने के बाद बैंक भी अपने सावधि जमा पर ब्याज दरें कम कर पाएंगे. मसलन, 1 साल से लेकर तीन या पांच साल तक की एफडी. इससे बैंकों के लिए फंड की लागत कम होगी और कर्ज देने की दर घटाने का भी रास्ता खुलेगा. 

लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि ऐसे समय में जब बचत दो दशक के निचले स्तर पर है सरकार की ओर से बचत पर रिटर्न की दर घटाने का कदम कितना कारगर साबित होगा. सरकार का यह कदम लोगों को बचत के विभिन्न विकल्पों के प्रति हतोत्साहित करेगा. अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात में कर्ज लेने वालों की संख्या में कितनी बढ़ोतरी होती है यह देखने वाली बात होगी. हां यह तय है कि सरकार के इस कदम से आम जनता की बचत पर कैंची चलना तय है.

(शुभम शंखधर इंडिया टुडे में असोसिएट एडिटर हैं और आर्थिक मामलों पर लिखते हैं)

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