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अयोध्या में क्यों नाराज हैं संत?

अयोध्या में क्यों नाराज हैं संत? मंदिर निर्माण की सुगबुगाहट के बीच संतों की आपसी कलह भी सामने आने लगी है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई) प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई)

कोरोना संकटकाल के बीच राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से पहले के कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है. परिसर के समतलीकरण का काम 11 मई से शुरू हो चुका है.

जून के पहले सप्ताह से काम में और तेजी आएगी, क्योंकि निर्माण एजेंसी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के विशेषज्ञ परिसर पहुंचने लगे हैं. एजेंसी के स्टाफ के लिए परिसर में कैंप कार्यालय का निर्माण भी शुरू हो गया है.

मंदिर निर्माण की सुगबुगाहट के बीच संतों की आपसी कलह भी सामने आने लगी है. शनिवार को आनन-फानन में दिगम्बर अखाड़ा में राम मंदिर आन्दोलन से जुड़े संतों की बैठक बुलाई गयी. बैठक में संत समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा गया कि संतों को बिना भरोसे में लिए ही राम जन्मभूमि परिसर में कार्य कराया जा रहा है.

संतों का आरोप था अयोध्या में इमरजेंसी लगा दी गयी है कि मंदिर परिसर में कोई बिना इजाजत के जा भी नहीं सकता है. बैठक की अध्यक्षता दिगम्बर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने की. बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास ने कहा कि रामजन्मभूमि परिसर में क्या हो रहा है और क्या नहीं, इस बारे में न संतों को बताया गया और न ही कोई राय ली गयी.

असल में फरवरी में राममंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट के गठन के बाद से अयोध्या में संत नाराज चल रहे हैं. दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास इस पूरे प्रकरण में सबसे मुखर हैं.

सुरेश दास का कहना है कि श्री राममंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पुराने संतों को शामिल न करके सरकार ने भेदभाव किया है. अयोध्या में साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. वी. एन. अरोड़ा कहते हैँ “ अयोध्या के बहुत से संत इस बात से खुश हैं कि सरकार ने तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ऐसे लोगों को रखा है जिनका सियासत से कोई नाता नहीं है. चूंकि मंदिर निर्माण की तैयारियां शुरू हो रही हैँ ऐसे में संत अपनी उपस्थिति दिखाने के लिए भी विवाद को हवा देने की कोशिश कर रहे हैं.”

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