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योगी सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी शिक्षकों के दस्तावेज की जांच का आदेश दिया है. आने वाले दिनों में यह कार्य सरकार के लिए बेहद चुनौती भरा होने वाला है.

फोटोः इंडिया टुडे फोटोः इंडिया टुडे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी शिक्षकों के दस्तावेज की जांच का आदेश दिया है. आने वाले दिनों में यह कार्य सरकार के लिए बेहद चुनौती भरा होने वाला है.

माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाले लाखों अभ्यíथयों के अभिलेख सुरक्षित रखे जाते हैं. बोर्ड प्रशासन ने 2003 से 2019 तक के सभी अभिलेख वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है, ताकि इन वर्षो का कोई अभ्यर्थी, अभिभावक या शैक्षिक संस्था उसे देख सकती है, डाउनलोड व सत्यापित कर सकती है. अगस्त 2017 में बोर्ड प्रशासन ने शासन को प्रस्ताव भेजा था कि वर्ष 1975 से 2002 तक के सभी अभिलेख डिजिटाइज करके वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए.

लाखों लोगों को इससे लाभ होना था इसलिए शासन ने सहमति दी. यह कार्य एक साल में पूरा करने की तैयारी हुई, लेकिन पहले मुख्यालय पर ही अभिलेख डिजिटाइज करने के लिए संस्था नहीं मिल रही थी, जब मिली तो उसने कार्य के लिए बड़ा बजट मांगा. शासन से बजट अब तक स्वीकृत नहीं हुआ.

इससे अभिलेखों का रखरखाव करना मुश्किल है. अब सीएम के निर्देश पर शिक्षकों के पुराने रिकॉर्ड खंगालने में देरी और दिक्कत होगी. चुनौती और भी है. यूपी बोर्ड मुख्यालय प्रयागराज में 1984 तक के सारे रिकॉर्ड उपलब्ध हैं. 1984 के बाद से हाईस्कूल व इंटर के दस्तावेज प्रयागराज, वाराणसी, बरेली व मेरठ क्षेत्रीय कार्यालयों पर उपलब्ध हैं. रिकॉर्ड अलग जगह होने से लोगों को उसे पाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

यूपी बोर्ड ने 2003 के बाद से रिजल्ट ऑनलाइन कर दिया है. बहुत कोशिशों के बाद अब जाकर बीएसए यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्रों का सत्यापन ऑनलाइन करवाने लगे हैं. यही हाल आईसीएसई व सीबीएसई का है.

दस्तावेजों के सत्यापन के लिए संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यालय को डाक से प्रमाणपत्रों को भेज कर सत्यापन मांगा जाता है. इसमें कई विवि सत्यापन में देरी करने के लिए चर्चित हैं. ये सत्यापन की फाइलें दबाएं रहते हैं. कई मामलों में तो डाक ही गायब कर दी जाती है. अभ्यर्थी डाक की जगह अपने हाथ से ही सत्यापित प्रति लेकर पहुंच जाते हैं. लिहाजा फर्जीवाड़े की काफी गुंजाइश रहती है. कभी कभी तक डाक वापस आती नहीं, बाबू का पटल या बीएसए का जिला बदल जाता है और सत्यापन पूरा होता ही नहीं.

अभ्यर्थियों की मांग है कि शिक्षक भर्ती हो या अन्य भर्तियां, सभी के शैक्षिक गुणांक एक पोर्टल पर चयन सूची में नाम के आगे लिखे जाएं. पारदर्शिता के चलते इसे पब्लिक डोमन में किया जाए ताकि चयनित अभ्यर्थी के आसपास के लोग इसे देख सकें. इससे अभ्यर्थी फर्जी प्रमाणपत्र लगाने में डरेंगे और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी.

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