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दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे के तरीके पर सवाल

टीएमसी के पूर्व राज्य सभा सांसद दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफा देने के तरीके को लेकर पार्टी ने राज्य सभा के सभापति से जांच कराने की मांग की है.

टीएमसी के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी टीएमसी के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शुक्रवार (12 फरवरी) को टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी ने राज्य सभा की कार्यवाही के दौरान ही इस्तीफा दे दिया
  • टीएमसी नेताओं का कहना है कि जब पार्टी ने उनका नाम वक्ता के रूप में प्रस्तावित नहीं किया था तो फिर उन्हें बोलने का मौका क्यों दिया गया
  • टीएमसी नेता इस प्रकरण के लिए भाजपा को जिम्मेदार बता रहे हैं

टीएमसी के पूर्व राज्य सभा सांसद दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफा देने के तरीके को लेकर पार्टी ने राज्य सभा के सभापति से जांच कराने की मांग की है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि जब पार्टी ने उनका नाम वक्ता के रूप में प्रस्तावित नहीं किया था तो फिर उन्हें आखिर बोलने का मौका क्यों दिया गया.

विदित हो कि शुक्रवार (12 फरवरी) को टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी ने राज्य सभा की कार्यवाही के दौरान ही इस्तीफा दे दिया. संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार है जब किसी मौजूदा सांसद ने कार्यवाही के दौरान ही बतौर सदस्य और पार्टी प्रतिनिधि के रूप में इस्तीफा दिया हो.

टीएमसी के राज्य सभा के व्हीप सुखेंदु शेखर राय ने राज्य सभा के सभापति को पत्र लिख कर कहा है कि बजट पर बोलने के लिए टीएमसी ने दिनेश त्रिवेदी का नाम प्रस्तावित नहीं किया था. दूसरी बात यह है कि राज्य सभा में उनके बैठने का स्थल गैलरी में निर्धारित किया गया था. ऐसे में उन्हे मुख्य सदन (राज्य सभा) में आने की और फिर टीएमसी के कोटे के लिए निर्धारित समय में बोलने का मौका आखिर कैसे मिला और किसने कहने पर ऐसा हुआ इसकी जांच की जाए. राय कहते हैं, "यह कोई साधारण वाकया नहीं है. न ही इस तरह की परंपरा लोकतंत्र के लिए उचित है.” टीएमसी के एक अन्य नेता कहते हैं कि इस्तीफा देना था तो चेयरमैन के कक्ष में जाकर इस्तीफा दिया जा सकता था. सदन की कार्यवाही इस्तीफा देने के लिए नहीं होती है बल्कि चर्चा और अपनी बात कहने के लिए होती है. यदि यह परंपरा बनी तो फिर तो आने वाले दिनों में विधानसभाओं में भी ऐसा होने लगेगा. लिहाजा इस पूरे प्रकरण की जांच होनी चाहिए.

बहरहाल, टीएमसी नेता इस प्रकरण के लिए भाजपा को जिम्मेदार बता रहे हैं. दूसरी तरफ राज्य सभा सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि सदन में कौन बोलेगा और किसे मौका दिया जाएगा यह आसन तय करता है. इसलिए यदि दिनेश त्रिवेदी को बोलने का मौका दिया गया तो इसमें कुछ गलत नहीं है.

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