scorecardresearch
 

एसजेवीएन ने अंतरराष्ट्रीय बोली प्रतिस्पर्धा में पड़ोसी देशों की कंपनियों को पछाड़ दिया

सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) ने अंतरराष्ट्रीय बोली प्रतिस्पर्धा में पड़ोसी देशों की कंपनियों को पछाड़ते हुए नेपाल में दूसरी परियोजना हासिल कर ली है.

एसजेवीएन और इनवेस्टमेंट बोर्ड नेपाल के बीच एमओयू हस्ताक्षर समारोह एसजेवीएन और इनवेस्टमेंट बोर्ड नेपाल के बीच एमओयू हस्ताक्षर समारोह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लोअर अरुण हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए एसजेवीएन और इन्वेस्टमेंट बोर्ड ऑफ नेपाल के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ
  • नेपाल में एसजेवीएन की यह दूसरी परियोजना है
  • इससे पहले उसने संखुवासभा जिले में 900 मेगावाट की अरुण 3 पनबिजली परियोजना हासिल की

नेपाल में 679 मेगावाट की लोअर अरुण हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निष्पादन के लिए सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) और इन्वेस्टमेंट बोर्ड ऑफ नेपाल (आइबीएन) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ. एसजेवीएन भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के तहत आने वाली एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम है.

नेपाल में एसजेवीएन की यह दूसरी परियोजना है. इससे पहले उसने संखुवासभा जिले में 900 मेगावाट की अरुण 3 पनबिजली परियोजना हासिल की. अरुण 3 परियोजना का क्रियान्वयन एसजेवीएन के पूर्ण स्वामित्व वाली एसजेवीएन अरुण 3 पावर डेवलपमेंट कंपन‌ी लिमिटेड (एसएपीडीसी) कर रही है, जो नेपाल में निगमित है. एसजेवीएन लिमिटेड को यह परियोजना भी नेपाल सरकार की अंतरराष्ट्रीय बोली प्रतिस्पर्धा में हासिल हुई. यह बिल्ड ओन ऑपरेट ऐंड ट्रांसफर (बीओटी) आधार पर तैयार की जा रही है, जिसमें निर्माण के पांच साल को छोड़कर 25 वर्ष तक ऑपरेट करने की छूट है.

अरुण 3 परियोजना की नींव 11 मई, 2018 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने संयुक्त रूप से रखी थी. अरुण 3 पनबिजली परियोना नेपाल में सबसे बड़ी है और भारत द्वारा नेपाल करीब 7,000 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा निवेश है. इस परियोजना से दोनों पड़ोसी देशों के बीच मित्रता प्रगाढ़ करने में बहुत मदद मिलेगी और नेपाल के आर्थिक पुनरुत्थान और विकास को गति भी मिलेगी. इस परियोजना का निर्माण कार्य जोर-शोर से चल रहा है. इस परियोजना से 400 किलोवाट की दोहरी सर्किट पारेषण लाइन के जरिए बिहार में सीतामढ़ी में बिजली लाई जाएगी और उसका भी निर्माण एसएपीडीसी कर रही है.

सितंबर 2019 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने नेपाल की अपनी यात्रा के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री को लोवर अरुण पनबिजली परियोजना (679 मेगावाट) के लिए राजी कर लिया, जो अरुण 3 पनबिजली परियोजना की क्षमताओं पर आधारित है. इसके लिए एसजेवीएन का पनबिजली के क्षेत्र में पुराना रिकॉर्ड है, जो नेपाल में अरुण 3 पनबिजली परियोजना के निर्माण कार्य से ही जाहिर है.

आर.के. सिंह के नेतृत्व में ऊर्जा मंत्रालय ने पनबिजली क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इन उपायों में बड़ी पनबिजली परियोजनाओं को अक्षय ऊर्जा परियोजना घोषित करना, टैरिफ को तर्कसंगत बनाना, परियोजना की कारगर आयु 40 वर्ष तक बढ़ाना, कर्ज चुकाने की अवधि को 18 वर्ष तक बढ़ाना, बुनियादी ढांचा और बाढ़ सीमित करने के कार्यों के लिए वित्तीय मदद तथा पनबिजली खरीद की आवश्यकता इत्यादि शामिल हैं. इसके अलावा, ऊर्जा मंत्रालय ने पनबिजली परियोजनाओं में समय तथा लागत कम करने के लिए दिशानिर्देश जारी किया गया है.

इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय शांति और उत्पादन सुविधाओं के अधिकतम उपयोग के माध्यम से पड़ोसी देशों के लिए क्षेत्रीय पावर ग्रिड और ऊर्जा बाजार तैयार करने का प्रयास कर रहा है.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें