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नीरव मोदी घोटाले से उभरने में पीएनबी को लगेगा वक्त

पंजाब नेशनल बैंक को नीरव मोदी घोटाले से काफी नुक्सान हुआ. यह नुक्सान छवि का भी था और नकद का भी. घोटाले से हुए घाटे को अपने मुनाफे में से करीब 14.3 हजार करोड़ रु. को प्रोवजनिंग करनी थी. इसलिए इसमें बैंक को काफी वक्त लगना तय है.

पीएनबी पीएनबी

नीरव मोदी घोटाले के असर से उभरने में पंजाब नेशनल बैंक को अभी कम से कम दो तिमाही का वक्त और लगेगा. घोटाले से हुआ घाटा झेलने के लिए बैंक को अपने मुनाफे में से कुल 14356 करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग करनी थी. प्रोविजनिंग बैंक की ओर से ऐसे कर्ज के बदले की जाती है जिनके डूबने की आशंका होती है. इस प्रक्रिया में बैंक अपने मुनाफे में से घाटे की भरपाई करता है. नीरव मोदी घोटाले में प्रोविजनिंग की रकम बैंक को एक तिमाही में होने वाली आय के बराबर है. ऐसे में इतनी बड़ी प्रोविजनिंग के लिए एक साल का वक्त लगना स्वाभाविक है. बीती दो तिमाहियों में बैंक 63 फीसदी हिस्से की प्रोविजनिंग कर चुका है. मौजूदा कारोबार साल की पहली तिमाही में बैंक को 940.01 करोड़ रुपए का घाटा हुआ. वहीं पिछली तिमाही में बैंक को 13416.91 करोड़ का घाटा हुआ था.

तिमाही आय के बराबर प्रोविजनिंग की राशि

तिमाही बैंक की कुल आय (करोड़ रुपए में)

जून 2018--- 15,072.41

मार्च 2018--- 12,945.68

दिसंबर 2017 15,257.50

सितंबर 2017 14,205.31

जून 2017 14,468.14

अब तक 63% प्रोविजनिंग

बीती दो तिमाहियों में पीएनबी ने कुल 14356 करोड़ रुपए में से 63 फीसदी हिस्से की प्रोविजनिंग कर ली है. इस तिमाही में बैंक की ओर से कुल 5135 करोड़ की प्रोविजनिंग की गई, जिसमें से 1864 करोड़ रुपए का राशि नीरव मोदी फ्रॉड केस की शामिल है. वहीं मार्च तिमाही में बैंक ने 7178 करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग की थी, जो कुल 14356 करोड़ रुपए की रकम का 50 फीसदी है. बचे हुए हिस्से की प्रोविजनिंग बैंक आने वाली दो तिमाहियों में कर सकती है. 

बैंक तलाश रहा आय के अन्य रास्ते

नीरव मोदी और देश का दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक को नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के घोटाले के कारण अपना पुराना मुख्यालय बेचने पर मजबूर होना पड़ा. इसके अलावा बैंक पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस कंपनी में भी अपनी 4 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगा. खर्चों पर अंकुश लगाने के लिए बैंक ने विदेशों में (सिडनी, ढाका, दुबई और शंघाई) 4 ऑफिस बंद किए हैं. साथ ही जून तिमाही में कंपनी ने इक्विटी बेचकर 167 करोड़ रुपए जुटाए हैं. बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 में नॉन-कोर एसेट बेचकर 8600 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है. 

घोटाला खुलने के बाद नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के ठिकानों से संपत्ति जब्त होने की खबरें जरूर आईं. लेकिन उनकी असली बाजार भाव अभी भी पहेली बना हुआ है. नतीजे से यह साफ है कि अब तक बैंक की झोली में वसूली से कुछ नहीं आया है. 

दर्द अभी बाकी है

बैंक में जमाकर्ताओं का पैसा निश्चित तौर पर सुरक्षित है लेकिन शेयरधारकों को बीते 6 महीनो में भारी नुकसान उठाना पड़ा है. बीते 6 महीनों में बैंक का शेयर भाव टूटकर आधा रह गया है. बैंक को अभी संभलने में कम से कम दो तिमाही और लगेंगी. एक्सकॉर्ट सिक्योरिटीज के हेड (रिसर्च) आसिफ इकबाल का कहते हैं कि ‘बैंक आय बढ़ाने के लिए अपने कोर बिजनेस के साथ साथ अन्य विकल्पों को भी तलाश रही है. लेकिन जब घाटे के लिए की जाने वाली प्रोविजनिंग की राशि बड़ी है, जिसके लिए बैंक आने वाली दो तिमाहियों में शामिल करेगा. अन्य विकल्पों से कितनी आय मिलती है यह देखना बाकी है. ऐसे में बैंक को पुरानी स्थिति में वापस लौटने में कम से कम दो तिमाही का वक्त लगेगा’’ सरकार की ओर से पूंजीकरण, बैंक के कोर बिजनेस में सुधार और अन्य विकल्पों से बड़ी राशि जुटा लेने पर ही बैंक का जोर होगा.

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