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पीएम मोदी के दावे को झुठलाती रिपोर्ट

2 अक्तूबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती नदी के किनारे यह ऐलान किया था कि भारत खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त हो गया है. लेकिन यह रिपोर्ट कुछ और ही कहती है? 

खुले में शौच से क्या वाकई मुक्त हो गया भारत खुले में शौच से क्या वाकई मुक्त हो गया भारत

नेशनल सैंपल सर्वे आफिस (एनएसएसओ) के ताजा संस्करण के मुताबिक 71.3 फीसद ग्रामीण घरों और 96.2 फीसद शहरी घरों में शौचालय है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दावा कर चुके हैं कि भारत खुले में शौच से मुक्त हो चुका है. तो सवाल उठता है कि ग्रामीण भारत में बाकी के 28.7 फीसद लोग शौचालय के लिए कहां जाते हैं?

'ड्रिंकिंग वाटर, सैनिटेशन, हाइजिन ऐंड हाउसिंग कंडीशन' शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में 'शौचालय' के सवाल के जवाब के सामने यह भी लिखा गया है कि सवाल पूछने से पहले हो सकता है कि सैंपल में शामिल लोगों को यह बताया गया हो कि उन्हें सरकारी शौचालय मिलने की उम्मीद है, इसलिए पक्षपात होने की पूरी संभावना है. 50.9 फीसद ग्रामीण इलाकों में और 49.9 फीसद शहरी इलाकों में फ्लश का इस्तेमाल किया जाता है.

एनएसएसओ की रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि 51 फीसद ग्रामीण और 49 फीसद शहरी इलाकों के घर के शौचालय सेप्टिक टैंक से जुड़े हैं. लेकिन सेप्टिक टैंक की क्षमता और उनकी डिजायन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. ऐसी कई रिपोर्ट सामने आईं जिनके मुताबिक सेप्टिक टैंक कुछ ही महीनों में ओवर फ्लो होने लगते हैं.

सर्वे के दौरान ग्रामीण इलाकों में 4.5 फीसद घरों और शहरी इलाकों में 2.1 फीसद घरों में लैट्रीन के आसपास पानी का स्रोत मौजूद नहीं था.यह भी एक बड़ा कारण है कि शौचालय बन जाने के बाद भी लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं.

इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें जब लोगों से यह पूछा गया कि वे शौचालय घर में होते हुए भी इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करते? जवाब था, पानी की किल्लत. पानी के संकट की वजह से 3.5 फीसद ग्रामीण इलाकों और 1.7 फीसद शहरी इलाकों के लोग शौचालय होने के बाद भी इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं.

2 अक्तूबर, 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती नदी के किनारे यह ऐलान किया था कि भारत खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त हो गया है. लेकिन यह रिपोर्ट कुछ और ही कहती है? 

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