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डॉक्टरों की दोतरफा लड़ाई, एक तरफ कोरोना तो दूसरी तरफ पगलाई भीड़

डॉक्टर्स एक तरफ जहां सुरक्षा उपकरणों (पीपीई और थ्री लेयर मास्क) की कमी से जूझ रहे हैं तो दूसरी तरफ बिना इन सुरक्षा उपकरणों के इलाज कर रहे डॉक्टरों की संक्रमण के चलते मौत होने पर अंतिम संस्कार रोकने के लिए आक्रामक हो रही भीड़.

फोटो साभार-इंडिया टुडे फोटो साभार-इंडिया टुडे

चेन्नई में कोविड-19 से एक डॉक्टर की मौत के बाद उन्हें दफनाने ले जा रही एंबुलेंस और साथी डॉक्टरों पर भीड़ का हमला, इससे पहले आंध्र प्रदेश और मेघालय में भी तकरीबन यही वाकया हुआ था. डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मियों पर हिंसा के मामले तो रोज की खबर बन गए हैं तो दूसरी तरफ सरकार से पीपीई किट और सुरक्षा उपकरण की गुहार लगाते डॉक्टरों का धैर्य अब चुकने लगा है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने एक बार फिर डॉक्टरों को हिंसा से बचाने के लिए 'स्पेशल सेंट्रल लॉ' लाने की मांग की है. साथ ही देशभर के डॉक्टरों से 22 अप्रैल को मोमबत्ती जलाकर इन घटनाओं के खिलाफ विरोध जताने और 23 तारीख को हाथों में काली पट्टी बांधकर काम करने की अपील की है.

जिंदा डॉक्टरों पर हिंसा की खबरों के बाद अब मृत डॉक्टरों पर भी भीड़ का आतंक

तमिलनाडु में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के पूर्व स्टेट प्रेसीडेंट डॉ रविशंकर चेन्नई में अपोलो हास्पिटल के एक डॉक्टर की कोविड-19 की वजह से हुई मौत और उसके बाद उनके अंतिम संस्कार को न होने देने के लिए अमादा भीड़ की कहानी कुछ यूं बयां करते हैं, '' डॉक्टर के पार्थिव शरीर को ले जा रही एंबुलेंस पर आसापास की भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया. पत्थर फेंके जा रहे थे. एंबुलेंस पूरी तरह क्षति ग्रस्त हो गई. साथ गए उनके एक सहयोगी डॉक्टर ने लोगों से निवेदन किया कि वे उन्हें डॉक्टर के शरीर को ले जाने दें. लेकिन भीड़ उन पर भी टूट पड़ी. किसी तरह पुलिस को बुलाया गया, पुलिस के आने के बाद ही उनका अंतिम संस्कार हो पाया. यह पहला वाकया नहीं है, इससे पहले आंध्र प्रदेश में भी कोरोना की वजह से संक्रमित हुए डॉक्टर की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को रोकने के लिए भीड़ ऐसे ही हमला बोला था. मेघालय में भी इसी तरह की एक घटना सामने आई.'''

डॉ. रविशंकर कहते हैं, बिना सुरक्षा उपकरण के हम लोग लगातार महामारी का इलाज कर रहे हैं. मार्च के पहले से अंतिम हफ्ते तक तो पीपीई किट और मास्क कुछ ही डॉक्टरों को नसीब हुआ. उसके बाद भी लगातार हम सुरक्षा उपकरण मां ही रहें पर सरकार के कान में जूं नहीं रेंग रही. दूसरी तरफ जिस जनता का हम इलाज कर रहे हैं वह भी पगलाई भीड़ सी हम पर टूट पड़ रही है. आखिर डॉक्टर की सुरक्षा कौन तय करेगा.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसीडेंट डॉ. राजन शर्मा कहते हैं, कोई डॉक्टरों को मार रहा है तो कोई इलाज करते-करते मर जाने वाले डॉक्टर का अंतिम संस्कार तक नहीं होने दे रहा. क्या इस रवैए के बीच डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मी अपना काम कर पाएंगे? अपना फर्ज निभा पाएंगे? हरियाणा और यूपी सरकार ने एक दिशानिर्देश जारी कर दिया कि कोई भी डॉक्टर अपने क्लीनिक में सामान्य जुखाम-खांसी के मरीज का इलाज न करें...इलाज करने पर प्रशासन एफआइआर की धमकी दे रहा है. रोज नए दिशानिर्देश कभी ये करो, कभी ये न करो..डॉक्टरों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं. आखिर सरकार डॉक्टरों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहती है?

आइएमए ने डॉक्टर्स के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए की 'स्पेशल सेंट्रल लॉ' की मांग

डॉ. राजन शर्मा ने एक बार फिर डॉक्टर्स के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए 'स्पेशल सेंट्रल लॉ' की मांग की है. इससे पहले कलकत्ता में एक एक डॉक्टर्स पर हुए हमले के दौरान भी इस लॉ की मांग तेजी से उठी थी. डॉक्टरों के राष्ट्रीय संगठन ने 22 अप्रैल की रात 9 बजे व्हाइट अलर्ट का आह्वाहन किया है. देशभर के अस्पताल और क्लीनिक के डॉक्टर्स और अन्य स्वास्थयकर्मी इस दौरान मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. और अगर तब भी नहीं पूरी हुई मांग तो 23 अप्रैल को हाथों में काली पट्टी बांधकर करेंगे काम. हालांकि लगातार हो रहे डॉक्टरों पर हमलों और लॉकडाउन के उल्लंघन के मामलों की समीक्षा के लिए केंद्रीय मंत्रियों की 6 सदस्यीय टीम गठित की जा चुकी है.

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