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बिहार चुनाव से पहले सुर्खियों में मछली और मखाना

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के लिए ‘एम’ फैक्टर महत्वपूर्ण है.

नीतीश कुमार और जे.पी. नड्डा (प्रतीकात्मक फोटो) नीतीश कुमार और जे.पी. नड्डा (प्रतीकात्मक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नड्डा बिहार के दरभंगा में मखाना उत्पादकों से मिलेंगे
  • भाजपा का फोकस इस बार ग्रामीण क्षेत्रों पर है
  • महिला वोटरों को भी साधने की चुनौती भाजपा के सामने है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 10 सितंबर को बिहार में मछली उत्पादन को दोगुणा करने की बात कर रहे थे, उसके तुरंत बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने अपने दो दिवसीय बिहार दौरे को अंतिम रूप दिया. नड्डा बिहार के दरभंगा में मखाना उत्पादकों से मिलेंगे और अगले दिन मुजफ्फरपुर में छोटे-मोटे व्यावसायिक गतिविधयों से जुड़ी महिलाओं से मिलेगें. अर्थात् चुनाव की दृष्टि से मछली, मखाना और महिला ('एम' फैक्टर) भाजपा के लिए काफी महत्व रखता है.

उत्तरी-पूर्वी बिहार में मछली और मखाना व्यवसाय में तकरीबन सभी गांव जुड़े हुए हैं. बिहार विधानसभा के पिछले चुनाव में ग्रामीण इलाकों में भाजपा को जोरदार झटका लगा था. भाजपा ने कुल 53 सीटें जीती थी जिनमें 41 सीट पूर्ण और आंशिक शहरी क्षेत्र के थे. ग्रामीण इलाकों में भाजपा को महज 12 सीटें मिली थी. यह आलम तब रहा जब पिछले चुनाव में भाजपा को 24 फीसद वोट मिले थे. लिहाजा पार्टी इस बार ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस कर रही है.

सूत्रों का कहना है कि भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है कि नीतीश कुमार के शराबबंदी के फैसले की वजह से बड़ी तादाद में महिला वोटर नीतीश के साथ गई थीं. लेकिन पिछले पांच साल के दौरान बिहार में शराबबंदी के बावजूद बड़ी आसानी से शराब मिल जा रहा है. महिला वोटर इससे नाराज हैं. लिहाजा महिला वोटरों को साधने की चुनौती भाजपा के सामने है. इसी को ध्यान में रखते हुए नड्डा 12 सितंबर को मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड के मणिकपुर में पद्मश्री से सम्मानित राजकुमारी देवी उर्फ किसान चाची से मिलेंगे. इसके जरिए नड्डा यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि भाजपा महिला उद्यमियों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और केंद्र की सरकार इस पर विशेष ध्यान दे रही है. प्रदेश भाजपा के महासचिव देवेश कुमार कहते हैं कि बिहार की महिलाएं खासकर युवा लड़कियां खुद के दम पर उद्योग, कारोबार की दिशा में बढ़ने में सक्षम हैं और बढ़ रही है. किसान चाची इसका उदाहरण हैं. केंद्र और बिहार की सरकार इनके मदद के लिए तत्पर है.

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