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भाजपा को राज्यों में बड़ी जीत की दरकार

साल 2017 के बाद विधानसभा चुनाव में नहीं चली भाजपा की सुनामी. कमजोर विपक्ष के बावजूद कांटे के टक्कर में मिली हार-जीत.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साल 2018 से लेकर 2020 तक कुल 18 राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए हैं
  • इन विधानसभा चुनावों में भाजपा 10 राज्यों में चुनाव हार गई
  • हालांकि कर्नाटक और मध्य प्रदेश में भाजपा विपक्षी दलों की सरकार गिराकर सत्ता में आने में सफल रही

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में केंद्र की सत्ता में आई भाजपा ने इसके बाद होने वाले विधानसभा के चुनावों में बड़ी सफलता हासिल की थी. यह सिलसिला 2017 तक चला, लेकिन उसके बाद से भाजपा विधानसभा चुनावों में बड़ी (एकतरफा) जीत हासिल नहीं कर पाई है. अलबत्ता, लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत का अपना जलवा कायम रखा है.

साल 2018 से लेकर 2020 तक कुल 18 राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए हैं जिसमें भाजपा 10 राज्यों में चुनाव हारी. यह अलग बात है कि बाद में कर्नाटक और मध्य प्रदेश में भाजपा विपक्षी दलों की सरकार गिराकर सत्ता में आने में सफल रही. जिन राज्यों में भाजपा ने जीत हासिल की थी उनमें भी हरियाणा में पार्टी बहुमत से दूर रह गई थी. मेघालय, मिजोरम और नगालैंड में भाजपा को दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाना पड़ा. वहीं, छत्तीसगढ़, दिल्ली और राजस्थान में भाजपा को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा. 2020 में भाजपा बिहार के चुनाव में किसी तरह से जद (यू) के साथ गठबंधन कर सरकार बना पाई और विपक्षी दलों ने उसे कांटे का टक्कर दी.

बीते रविवार को दिल्ली के एनडीएमसी सेंटर में जब भाजपा पदाधिकारियों की बैठक हुई तो इसमें भी इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर मंथन किया गया. सूत्रों का कहना है कि भाजपा के तमाम विस्तार के बाद भी पार्टी विधानसभा चुनावों में उन राज्यों में जीत से दूर रह जाती है जहां विपक्ष के पास कद्दावर स्थानीय नेता है. मसलन, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, दिल्ली जैसे राज्य इस बात की गवाही देते हैं. ऐसे में बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी जैसी कद्दावर नेता को पछाड़ना आसान काम नहीं है. इसलिए भाजपा की कोशिश है कि बंगाल के चुनाव को ममता बनाम मोदी किया जाए. चूंकि प्रधानमंत्री का क्रेज देश भर में है और जहां भी मोदी बनाम अन्य के चेहरे पर चुनाव हुए हैं वहां भाजपा ने जीत हासिल की है. कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, बिहार, ओडिशा या महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भाजपा मोदी का चेहरा आगे कर चुनाव नहीं लड़ी थी. इन राज्यों में भाजपा ने स्थानीय नेताओं का चेहरा सामने रखा था. ऐसे में इन राज्यों में भाजपा ने जहां जीत हासिल की, वहां भी विपक्षी खेमा बराबरी का टक्कर देने में कामयाब रहा. बंगाल के संदर्भ में भाजपा की सबसे बड़ी चिंता इसी बात की है.

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