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भाजपा का महामंथन 21 फरवरी को

प्रधानमंत्री की मौजूदगी में भाजपा के पदाधिकारियों की मैराथन बैठक दिल्ली में होगी. इसमें सियासी मुद्दों पर होगी वृहत चर्चा और 2022 तक के विधानसभा चुनावों के लिए खाका खींचा जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी के साथ जे.पी. नड्डा और अमित शाह प्रधानमंत्री मोदी के साथ जे.पी. नड्डा और अमित शाह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान आंदोलन समेत विभिन्न मसलों को लेकर इस बैठक में मंथन होगा
  • बैठक में भाजपा के सभी प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और सचिवों की मौजूदगी होगी
  • बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा करेंगे और प्रधानमंत्री मोदी दिन भर की बैठक में उपस्थित रहेंगे

किसान आंदोलन, कोरोना कालखंड और उससे पहले सीएए, एनआरसी तथा चीन के घुसपैठ के आलोक में बने सियासी माहौल के बीच भाजपा की स्थिति क्या है, कहां कमी रह गई और उसे कैसे दूर किया जाए, इसको लेकर पार्टी का एक दिवसीय महामंथन दिल्ली में 21 फरवरी को होगा. बैठक में भाजपा के सभी प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और सचिवों की मौजूदगी होगी. बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिन भर की बैठक में उपस्थित रहेंगे.

बैठक में मुख्य चर्चा सियासी स्थिति को लेकर होगी. सूत्रों का कहना है कि मौजूदा किसान आंदोलन और कोरोना की वजह से लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था पार्टी की बड़ी चिंता है. पार्टी के कॉडर और भाजपा समर्थकों के बीच क्या संगठन के कामकाज को लेकर नाखुशी है, यह जानने की कोशिश होगी. पार्टी की चिंता इस बात को लेकर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ही एक मात्र ऐसा फैक्टर है जिसके जरिए भाजपा को उन राज्यों में भी विगत वर्षों में सफलता मिली है जहां पार्टी काफी कमजोर स्थिति में थी. जहां तक संगठन की बात है तो आम मतदाता उससे ज्यादा भरोसा पीएम पर कर रहे हैं. मतलब साफ है कि युवाओं, महिलाओं, दलितों और पिछड़े का अटूट भरोसा सिर्फ प्रधानमंत्री में है न कि संगठन (भाजपा) पर है. इस खामी को कैसे पाटा जाए और इसके लिए क्या करने की जरूरत है, इस बात को लेकर चर्चा होगी.

पार्टी के एक पदाधिकारी का कहना है, "2017 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के बाद जिन राज्यों में भी चुनाव हुए वहां भाजपा चाहे जीती हो या हारी हो, विपक्ष ने मजबूत टक्कर भाजपा को दिया है. यह स्थिति तब है जब विपक्ष इतिहास में शायद सबसे कमजोर कालखंड से गुजर रहा है. इसका मतलब साफ है कि चुनावी सफलता, सिर्फ नेतृत्व (पीएम) के नाम पर मिल रहा है. संगठन को इस बात पर सोचना होगा."

अमूमन भाजपा में इस तरह की चर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी में होती है. लेकिन सितंबर 2018 के बाद से पार्टी की न तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी या राष्ट्रीय परिषद् की बैठक हुई है, जबकि पार्टी सविधान के मुताबिक, हर तीन महीने में इस तरह की बैठक की जरूरत है. चूंकि जे.पी. नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से अभी तक राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है, इसलिए पदाधिकारियों की बैठक को ही विस्तारित बैठक के रूप में आहूत करने का फैसला हुआ है.

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