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पलायनः 6 लाख लोग वापस पहुंचे हैं बुंदेलखंड में

बुंदेलखंड में 14 जिले हैं. दो राज्यों में फैले इस इलाके में गरीबी के कारण लोग पलायन कर जाते हैं. महामारी फैली तो ये लोग अब वापस लौट रहे हैं. अनुमान है कि करीब 6 लाख मजदूर बुंदेलखंड और यहां से जुड़े इलाकों में लौटे हैं

फोटोः संतोष पाठक फोटोः संतोष पाठक

बुंदेलखंड के जिन मजदूरों को अपने घर जाना था और ऐसे में न सिर्फ निजी वाहन चालकों बल्कि सरकारी बसों में भी उनको आर्थिक चपत लगाई गई. बांदा के जौरही गांव के मनीष प्रजापति कहते हैं वह अपनी तीन साथियों के साथ दिल्ली से गाजियाबाद तक पैदल ही पहुंच गए. वहां एक एंबुलेंस से कानपुर छोडऩे के लिए 10 हजार रुपए की बात तय हुई. ये उनकी पूरी कमाई थी जो घर जाने के लिए देने को वह राजी हो गए, लेकिन एंबुलेंस उनको इटावा में छोड़कर चली गई. वह यहां फंस गए और पैसे भी चले गए.

इसके साथ ही सरकारी रोडवेज बसों का संचालन कर मजदूरों को गांव तक छोडऩे की बात तो हुई, लेकिन इसमें भी उनको पूरा किराया देना पड़ा. भरतकूप मथुरा से झांसी पहुंचे बांदा के अधांव गांव के धनंजय यादव रोडवेज बस की टिकट दिखाते हुए कहते हैं. उनसे 1200 रुपए लिए गए हैं. हमारे एक साथी के पास पैसे नहीं थे तो उसे बस ने बीच रास्ते में ही उतार दिया.

करीब 6 लाख लोग वापस पहुंचे हैं बुंदेलखंड में

बुंदेलखंड में 14 जिले हैं. दो राज्यों में फैले इस इलाके में गरीबी के कारण लोग पलायन कर जाते हैं. महामारी फैली तो ये लोग अब वापस लौट रहे हैं. अनुमान है कि करीब 6 लाख मजदूर बुंदेलखंड और यहां से जुड़े इलाकों में लौटे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता रामबाबू तिवारी कहते हैं कि जिन गांव के घरों में ताले लटके थे वे अब खुल रहे हैं. पलायन से वापसी का आंकड़ा 6 लाख से भी आगे जाएगा. उनका कहना है कि बांदा के गांवों में लगातार मजदूरों का पहुंचना जारी है.

नहीं हो रही जांच

मजदूरों के लौटने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उनके स्वास्थ्य परीक्षण की है. जो मजदूर आए हैं उनको बिना परीक्षण के वापस घर भेजा जा रहा है. झांसी जिले में जिन स्कूलों को आइसोलेशन सेटर में बदलने की बात कही गई वहां कुछ भी इंतजाम नहीं हैं. प्रशासन ने यहां कई गंभीर चूक की हैं, जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण गांव तक पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है.

झांसी के कमिश्रर ने तो लिखित आदेश जारी कर बसों के जरिए मजदूरों को उनके घर तक भेजे जाने की बात कही है, जबकि लॉक डाउन में सरकार ने जो जहां है उसे वहीं रोके जाने की बात कही. यही नहीं झांसी के जिलाधिकारी आंद्रा वामसी इस आपात स्थिति में जनता से दूरी बनाकर अपने ऑफिस में ही कैद हैं. उनके सीयूजी मोबाइल नंबर को उनका अर्दली चला रहा है. ऐसे में आम लोगों को उनकी ओर से मदद की उम्मीदें टूट सी गईं हैं.

किसानों के सामने भी है समस्या

लॉक डाउन होने के बाद किसानों के सामने भी बड़ी चुनौती है. रबी की फसल पककर तैयार है. ऐसे में फसल काटने के लिए मजदूरों के लिए जद्दोजहद जारी है. किसान नेता और विधायक जवाहर लाल राजपूत ने किसानों की परेशानी पर सरकार को पत्र तक भेजा है, इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को फसल कटाई में पूरी छूट दिए जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन किसान नेता शिवनारायण परिहार कहते हैं, "मजदूर स्वयं कोरोना की दहशत से डरे हुए हैं और वह कटाई से बच रहे हैं. जो कटाई कर रहे वह अलग अलग खेत बांटकर कटाई को तैयार हैं. ऐसे में देरी होने पर फसल खेत में ही झडऩे लगी है."

सरकार की मदद ही है उम्मीद

संक्रमण की आपात स्थिति के बीच सरकार की ओर से कई घोषणाएं तो की गईं है लेकिन वह जनता तक पहुंचकर कितना राहत देगी यह देखने की बात होगी. सरकार ने मनरेगा मजदूरों के बैंक अकाउंट में राहत धनराशि भेजे जाने का ऐलान कर दिया है, लेकिन यह धनराशि ऐक्टिव मजदूरों के लिए ही होगी. झांसी जिले में 2 लाख 87 हजार मजदूर हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 1 लाख 64 हजार मजदूरों को ही खाने पीने के लिए तीन महीने तक पैसा मिलेगा.

ये वो मजदूर हैं जो दो साल से मजदूरी करने के लिए एक्टिव बताए गए. ऐसा ही सभी जिलों में है. यानी, सरकारी राहत के पैमाने में 50 प्रतिशत मजदूर ही शामिल हो सकेंगे.

न जांच हो रही, न इलाज

बुंदेलखंड पहुंचे मजदूरों की जांच करने का कोई इंतजाम नहीं है. यहां जिलों में एक या दो कोरोना की जांच के लिए गन मौजूद हैं. यह नाकाफी हैं. इसी दबाव में प्रशासन ने बिना जांच के लिए मजदूरों को उनके गांव व घरों में रवाना कर दिया है. इससे गांव में भी टकराव देखने को मिल रहा है. ग्रामीण इस बीमारी पर इतने जागरुक हैं कि वह बाहरी मजदूरों को अपने गांव के बाहर स्कूल में ही रखना चाहते हैं. लेकिन प्रशासन इस पर ज्यादा फिक्रमंद नहीं दिखता.

खाने-पीने के इंतजामों में भी जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है. प्रशासनिक अधिकारियों की जगह समाजसेवी खाने-पीने की सामग्री गरीबों तक पहुंचाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

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