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डॉ. नरेन्द्र कोहली के नए उपन्यास ‘सुभद्रा’ का हुआ विमोचन 

डॉ. नरेंद्र कोहली का 81वां जन्मदिन उनके पाठकों के लिए सौगात लेकर आया था. उस रोज इस डिजिटल गोष्ठी में नरेन्द्र कोहली के नवीनतम उपन्यास 'सुभद्रा' का लोकार्पण किया गया.

नरेन्द्र कोहली के उपन्यास 'सुभद्रा' का लोकार्पण नरेन्द्र कोहली के उपन्यास 'सुभद्रा' का लोकार्पण

मंजीत ठाकुर

डॉ. नरेंद्र कोहली का 81वां जन्मदिन उनके पाठकों के लिए सौगात लेकर आया था. 6 जनवरी की शाम का आयोजन एक 'अभिनन्दन पर्व'  का था. इस डिजिटल गोष्ठी में नरेन्द्र कोहली के नवीनतम उपन्यास 'सुभद्रा' का लोकार्पण भी किया गया. इस अवसर पर आयोजित विशेष चर्चा में वाणी प्रकाशन ग्रुप के प्रबन्ध निदेशक और वाणी फाउंडेशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी, वरिष्ठ लेखक प्रेम जनमेजय और वरिष्ठ पत्रकार वर्तिका नन्दा वक्ता के तौर पर शामिल हुए.
 
कार्यक्रम की शुरुआत में ही अरुण माहेश्वरी ने डॉ. कोहली का परिचय ऐसे साहित्यकार के रूप में दिया जिनका लेखन 'बन्दिशों' से दूर है. 
इस बात में दो राय नहीं है कि डॉ. नरेन्द्र कोहली का भारतीय लेखकों में अपनी एक खास जगह है और हिन्दी साहित्य में उनकी पहचान अप्रतिम कथा-लेखक के रूप में है जिन्होंने मिथकीय पात्रों को एक नई ध्वनि और नई रोशनी में पेश किया है.

वरिष्ठ लेखक प्रेम जनमेजय ने कहा कि वर्ष 1960 में पहली प्रकाशित कहानी से लेकर अब तक विभिन्न विधाओं में उनकी 92 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है, और इसलिए कोहली एक युग प्रवर्तक साहित्यकार हैं.

वरिष्ठ पत्रकार वर्तिका नन्दा के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. कोहली ने कहा, “कई बार ऐसा भी होता है कि जिन पात्रों को हम रच रहे होते हैं वे हमारे आस-पास ही होते हैं। जैसे कृष्ण की बातें और घटनाएँ जो हमें बार-बार याद दिलाती हैं कि मैं हूँ. सारे चरित्रों के साथ रहना पड़ता है और यह मेरे स्वभाव में है.”

कोहली ने साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं (उपन्यास, व्यंग्य, नाटक, कहानी) एवं गौण विधाओं (संस्मरण, निबन्ध, पत्र आदि) और आलोचनात्मक साहित्य में अपनी लेखनी चलाई है. हिन्दी साहित्य में ‘महाकाव्यात्मक उपन्यास’की विधा की शुरुआत का श्रेय भी नरेन्द्र कोहली को ही जाता है.

पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक समाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के सामने पेश करना भी कोहली की अपनी खासियत है. 


नरेन्द्र कोहली सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है. इस लिहाज से उनके नए उपन्यास सुभद्रा की ओर भी पाठकों का ध्यान जाएगा और उम्मीद होगी कि अपनी खास शैली में कोहली सुभद्रा के माध्यम से कुछ खास ही कोण पर निशाना साध रहे होंगे. 
 

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