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पुस्तक समीक्षाः स्त्री मन के ऊहापोह की कहानियां हैं खाली तमंचा में 

स्त्री मन की पीड़ा और उसके अंदर के असमंजस को पेश करने वाली कहानियों का संग्रह है, भूमिका द्विवेदी अश्क का कथा संग्रह, खाली तमंचा तथा अन्य कहानियां

खाली तमंचा तथा अन्य कहानियां खाली तमंचा तथा अन्य कहानियां

मंजीत ठाकुर

इन दिनों फेमिनिज्म का बड़ा जोर है. खासकर मीटू आंदोलन के बाद दुनिया भर में इसकी चर्चा हुई है. फेमिनिज्म भले ही नया आंदोलन नहीं है पर इसने मीटू अभियान के बाद नई शक्ल अख्तियार जरूर की है और सोशल मीडिया पर इस पर चर्चा होती ही रहती है. लेकिन उन सबसे परे जमीनी हकीकत में स्त्री का दर्द कम ही उभर पाता है. ऐसे में स्त्री मन की पीड़ा और उसके अंदर के असमंजस को पेश करने वाली कहानियां दिखती हैं, मशहूर कथाकार भूमिका द्विवेदी अश्क के कथा संग्रह 'खाली तमंचा तथा अन्य कहानियां' में. 

इस संग्रह में ग्यारह कहानियां हैं और इस कहानियों में पात्र अलग-अलग भले हों, पर उनका संघर्ष एक-सा है. 

भूमिका द्विवेदी अश्क हर उम्र की महिला पात्रों के जरिए स्त्री विमर्श को उकेरती हैं. जाहिर है, इस वजह से कुछ कहानियां एकरंगी भी लगती हैं. पर, हर कहानी औरत की उस लड़ाई का किस्सा है कि किस तरह पितृसत्तात्मक खांचे में कोंच दी गई औरत अपने अस्तित्व के लिए छटपटाती है. 

संग्रह की पहली ही कहानी 'राजदारी' बेमेल ब्याह के नतीजे में कम उम्र स्त्री के ब्याह और अपने ही सौतेले बेटे के साथ हमबिस्तर होने का किस्सा है. अब इसको बगावत माना जाए या अपने हिस्से का प्रेम पाने की कोशिश, यह पाठकों पर है. 

इसी तरह 'खाली तमंचा' में खलनायक किस्म के पिता की बेबस बेटी अपनी मां की मार-कुटाई का बदला लेने के लिए तमंचा पाने की कोशिश करती है.

खाली तमंचा, लेडी पिकासो, और दांव में भूमिका द्विवेदी अश्क अपने बेहतरीन लेखकीय रूप में नजर आती हैं. 

इस संग्रह की सबसे शानदार कहानी 'दांव' है, जिसमें बुजुर्ग राजनेता की भोग्या बनी स्त्री उसकी हत्या करके खुद पर हुए हर अत्याचार और शोषण का बदला लेती है, पर नए परिस्थितियों में वह पुरुषों का इस्तेमाल करना भी सीख लेती है. 

लेकिन इस संग्रह में कुछ कमजोर कहानियां भी हैं. मसलन, 'दस रुपए का तेजपत्ता' और 'भगवान सत्यनारायण का प्रसाद' जैसी कहानियां शिल्प और कथ्य के लिहाज से थोड़ी बासी लग सकती हैं. 

भूमिका की कहानियों में बेवजह के भाषायी चमत्कार का आडंबर भले नहीं है, पर विषय प्रासंगिक है. 

सहज भाषा भूमिका की ताकत है. उनकी भाषा में ज्यादा छल छद्म नहीं है. सरल और छोटी पंक्तियां, जो कहानी को ग्राह्य बनाती हैं. और सरल होना इन कहानियों की ताकत है. कोई जबरिया नारेबाजी नहीं, कोई फतवा नहीं, महज कहानी है. पर हर कहानी संदेश में पगी हुई.

इन कहानियों के जरिए भूमिका आज के दौर में स्त्री की मुक्त होने की बेचैनी और पितृसत्ता की जंजीरों से बाहर निकलने की कसमसाहट को पेश करती हैं. 

किताबः खाली तमंचा तथा अन्य कहानियां (कहानी संग्रह)

लेखिकाः भूमिका द्विवेदी अश्क

प्रकाशकः हिंद पॉकेट बुक्स

कीमतः 175 रुपए 

 

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