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किताबें

नरेन्द्र कोहली के उपन्यास 'सुभद्रा' का लोकार्पण

डॉ. नरेन्द्र कोहली के उपन्यास ‘सुभद्रा’ का हुआ विमोचन 

10 जनवरी 2021

डॉ. नरेंद्र कोहली का 81वां जन्मदिन उनके पाठकों के लिए सौगात लेकर आया था. उस रोज इस डिजिटल गोष्ठी में नरेन्द्र कोहली के नवीनतम उपन्यास 'सुभद्रा' का लोकार्पण किया गया.

खाली तमंचा तथा अन्य कहानियां

पुस्तक समीक्षाः स्त्री मन के ऊहापोह की कहानियां

31 दिसंबर 2020

स्त्री मन की पीड़ा और उसके अंदर के असमंजस को पेश करने वाली कहानियों का संग्रह है, भूमिका द्विवेदी अश्क का कथा संग्रह, खाली तमंचा तथा अन्य कहानियां

कुलदीप कुमार की पुस्तक बिन जिया जीवन

बिन जिया जीवन: अपने दौर की काव्य-कथा

12 अगस्त 2020

कुलदीप कुमार के इस कविता संग्रह में जिंदगी के विशाल फलक की कविताएं हैं, जो हमें अपने दौर के कई तरह के यथार्थ से रू-ब-रू कराती हैं.

पेरियार की किताब सच्ची रामायण

पेरियार की किताब के बाद राजकमल लाएगा हर दस दिन पर दो नई किताबें

22 जुलाई 2020

लॉकडाउन के बाद के दौर में राजकमल प्रकाशन समूह पाठकों के साथ जुड़े रहने की हरसंभव कोशिश कर रहा है. इसने नई किताबों के प्रकाशन की शुरुआत कर दी है और सबसे पहले पेरियार की दो किताबों को पाठकों के बीच पेश किया है.

वैधानिक गल्प का कवर (राजकमल प्रकाशन)

पुस्तक समीक्षाः जन के खिलाफ लामबंद तंत्र का किस्सा है वैधानिक गल्प

20 जून 2020

यह वक्त, जिसे हम हड़बड़ियों में मुब्तिला लोगों का दौर कह सकते हैं, अधिकतर संजीदा लेखक या अप्रासंगिक होते जा रहे हैं या फिर समयबद्ध क्षरण का, विचारों को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखने के लिए उसका दस्तावेजीकरण जरूरी है. वैधानिक गल्प नामक उपन्यासिका इस कोशिश में खड़ी नजर आती है.

किताब

टेलीग्राम के सहारे एक युग का वर्णन

23 मई 2020

अनिल उन कवियों में से हैं जो बहुत ही विनम्र ढंग से काव्य कर्म को बहुत ही गंभीरता से लेते हैं. उन्हें पता है कि कवि को कहां से खड़ा होकर इस संसार और जीवन को देखना है. वह प्रचलितब अर्थों में प्रतिरोध के कवि नहीं है लेकिन गंभीर हाथों में उनकी पक्षधरता हर कविता में दिखाई पड़ती है.

नृत्यांगना सितारा देवी

लॉकडाउन डायरीः एक सितारे की तरह थीं सितारा देवी

08 मई 2020

सितारा देवी ने शंभु महाराज और पंडित बिरजू महाराज के पिता अच्छन महाराज से भी नृत्य की शिक्षा ग्रहण की. 10 वर्ष की उम्र होने तक वह एकल नृत्य का प्रदर्शन करने लगीं.

फोटोः राजकमल प्रकाशन

पुस्तक समीक्षाः विधाओं से परे अनहद रचनात्मकता की मिसाल है ग्लोब से बाहर लड़की

23 अप्रैल 2020

प्रत्यक्षा की किताब 'ग्लोब के बाहर लड़की' को विधाओं के खांचे में नहीं बांधा जा सकता है. पर इसको पढ़कर आप प्रत्यक्षा के रचना संसार में विचर सकते हैं जहां की दीवारें पारदर्शी हैं. यह किताब रचनात्मकता के एक नए अंदाज का आगाज है, जिसको आने वाले वक्त में कई लेखक आगे बढ़ा सकते हैं.

 बिसात पर जुगनू

पुस्तक समीक्षाः दो युगों की अंतर्कथा है बिसात पर जुगनू

16 अप्रैल 2020

यह उपन्यास चीन के केंटन , चांदपुर और पटना के त्रिभुज में फैला है. कथा की शुरुआत फतेह अली खान के रोजनामचे से शुरू होती है. फिर ली ना के भारत आने की कथा और अंत उसे चीन लौटने की घटना से होता है. बीच मे 1857 के विद्रोह की घटना का भी जिक्र है और इसमे बहादुर शाह जफर बेगम हजरत महल और बाबू वेरा कुंवर सिंह की भी चर्चा है।कोलकाता जरनल की कतरने भी बीच बीच मे हैं.

उपन्यासः मोती मानूस चून

पुस्तक समीक्षाः माटी मानुष चून प्राकृतिक अंदेशों के भविष्य का उपन्यास है

16 अप्रैल 2020

जिस तेजी के साथ हम पर्यावरण की अनदेखी कर रहे हैं और समझने को तैयार नहीं है उसे देखते हुए हम अपना भविष्य लगभग तय कर चुके हैं. इसी भविष्य की कहानी है माटी, मानुष, चून. 2074 की कहानी कहता ये उपन्यास फरक्का बांध के टूटने से आई प्रलय के साथ शुरू होता है. और फिर गंगा पथ पर विकास दिखाते विनाश को खोल कर रख देता है.

मेकिंग ए पोएम का कवर

विषम परिस्थितियों में साहस देने वाली किताब है मेकिंग ए पोएम

31 मार्च 2020

विहांग नाइक की कविताएं ज़मीनी स्तर पर सरल और सहज भाव से भरी-पूरी हैं. उनकी रचनाओं में मार्मिकता केंद्रीय विषय है और पाठक को अपनी ओर खींचती है