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हंसाने वाले वरूण शर्मा को किस चीज से लगता है डर

फुकरे से अपनी सफलता की गाड़ी पर सवार वरूण कॉमेडी के लिए टाइपकास्ट होने से बोर नहीं होते हैं. बतौर वरूण, 'मैं तब तक बोर नहीं हो सकता जब तक ऑडिएंस को मुझसे हंसी का डोज मिल रहा है. मुझे भी अच्छा लग रहा है कि मैं रेगुलर बेसिस पर कास्ट हो रहा हूं कॉमेडी जोनर में. मेरे लिए जरूरी है रेगुलर बेसिस पर कास्ट होना, टाइपकास्ट होना बाद में होगा. मैं भी इस चीज को इंज्वाय करता हूं.

अभिनेता वरुण शर्मा अभिनेता वरुण शर्मा

फुकरे का चूचा यानी वरूण शर्मा एक बार फिर छिछोरे बनकर दर्शकों को हंसाएंगे. मुंबई में नवीन कुमार से बातचीत के दौरान 'छिछोरे' के अलावा अन्य मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी. पेश हैं मुख्य अंश-

मुंबई. दुनिया को हंसाने वाले वरूण शर्मा को डर भी लगता है. उनका यह डर थोड़ा अलग है. वे कहते हैं, 'मैं अपने चाहने वालों की उस उम्मीद को टूटने नहीं देना चाहता जो उन्होंने मुझसे लगा रखी है यानी वो हंसना चाहते हैं. मेरी भी यह कोशिश है कि जब भी वो मुझे देखें तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट हो.' फुकरे का चूचा यानी वरूण शर्मा अर्जुन पटियाला और खानदानी शफाखाना के बाद छिछोरे फिल्म में अपने रोचक किरदार के साथ एक बार फिर दर्शकों को हंसाने वाले हैं.. वे कहते हैं, 'मेरे कैरेक्टर का नाम ही सेक्सा है और यह सेक्सा ऐसी हरकतें करता है जिससे लोग हंस-हंसकर लोटपोट हो जाएंगे.' दंगल फेम निर्देशक नितेश तिवारी ने इस फिल्म का निर्देशन किया है. इसमें सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर भी हैं. श्रद्धा की अभी साहो रिलीज हुई है और लोग उन्हें पसंद कर रहे हैं. इसका फायदा छिछोरे को मिल सकता है. वरूण ने छिछोरे में नितेश से अभिनय की अलग विधा भी सीखी है.

वरूण का मानना है कि अभिनय में कॉमेडी जोनर सबसे कठिन है. लोगों को लगता है कि हंसाना सबसे आसान है. लेकिन यह सबसे मुश्किल काम होता है. आज ऐसा समय है कि हर कोई परेशान है और हर कोई दूसरे को परेशान भी कर देता है. हम अपनी जद्दोजहद में और जिंदगी की भाग-दौड़ में भी लगे रहते हैं. इससे धैर्य कम हो गया है. उसमें किसी को आप थोड़े समय के लिए हंसा सकते हैं तो बहुत अच्छा है. लेकिन कॉमेडी फिल्म में एक बंदा हंसाने का काम अकेला नहीं कर सकता. टीम का सही होना बहुत जरूरी है. मैं कितना भी अच्छा सीन कर दूं, अगर सामने से रिएक्शन नहीं आया तो वो सीन आपको बोर कर देगा. एक्शन के साथ टाइमिंग मैच करना जरूरी है.

फुकरे से अपनी सफलता की गाड़ी पर सवार वरूण कॉमेडी के लिए टाइपकास्ट होने से बोर नहीं होते हैं. बतौर वरूण, 'मैं तब तक बोर नहीं हो सकता जब तक ऑडिएंस को मुझसे हंसी का डोज मिल रहा है. मुझे भी अच्छा लग रहा है कि मैं रेगुलर बेसिस पर कास्ट हो रहा हूं कॉमेडी जोनर में. मेरे लिए जरूरी है रेगुलर बेसिस पर कास्ट होना, टाइपकास्ट होना बाद में होगा. मैं भी इस चीज को इंज्वाय करता हूं. हंसाना अच्छा लगता है. लोगों को मुस्कुराते देखना अच्छा लगता है.' वैसे, वरूण ऐसी स्क्रिप्ट के भी इंतजार में रहते हैं जो अलग जोनर की हो. वे कहते हैं, 'मैं अलग शेड वाली एक फिल्म में काम कर रहा हूं जिसका नाम है रूह अफजा. यह एक हॉरर कॉमेडी है. इसमें कॉमेडी तो है ही, अलग जोनर भी साथ है हॉरर का. डराते-डराते हंसाएंगे और हंसाते-हंसाते डराएंगे.'

वरूण बताते हैं कि फुकरे से पहले उन्होंने कभी भी कॉमेडी करने का प्रयास नहीं किया था. क्योंकि इससे पहले वे चंडीगढ़ में अश्वत्थामा और अंधायुग जैसे गंभीर नाटक करते थे. पांच साल तक थिएटर करने के बाद फुकरे के ऑडिशन के समय पहली बार कॉमेडी करने का प्रयास किया था. जब फिल्म देखी तो उन्हें लगा कि वे लोगों को हंसा सकते हैं. वे कहते हैं, 'जिंदगी में ऐसा चेंज आया कि फुकरे के बाद जोनर ही कॉमेडी बन गया. लेकिन मैं थिएटर को मिस करता हूं. मौका मिला तो कभी एक प्ले जरूर करूंगा.'

'कॉमेडी के लिए किसी की नकल की जरूरत नहीं है.' वरूण आगे कहते हैं, 'अब सिचुएशनल कॉमेडी है. मैं चार्ली चैप्लिन को बहुत पसंद करता हूं. मैंने उनकी सारी फिल्में देखी है. लेकिन मेरे अभिनय में उनकी छाप नहीं मिलेगी.' बतौर वरूण, 'मैं जब भी कोई भी सीरीज देखता हूं तो उसमें कॉमेडी नहीं देखता हूं. मैं थ्रिलर, डार्क ऐसी चीजें देखता हूं. थ्री पर्सेंट, ब्लैक मिरर मेरा पसंदीदा शो है. स्टैंडअप कॉमेडी नहीं देखता हूं. मुझे क्या हंसाता है यह पता नहीं. मैं बहुत सोचता हूं कि यहां तक आने में जो समय लगा है उसकी वैल्यू है.' वरूण को स्टारडम से यह नुकसान हुआ है कि अब उन्हें स्ट्रीटफूड गाड़ी में बैठकर खाना पड़ता है. 

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