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हर तरह के किरदार निभाना चाहती हैं अलाया एफ

जवानी जानेमन से फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाली अलाया एफ किसी किसी रोल में टाइप्ड होने की जगह हर तरह के किरदार निभाना चाहती हैं.

बॉलीवुड अभिनेत्री अलाया एफ बॉलीवुड अभिनेत्री अलाया एफ

विषकन्या फेम पूजा बेदी की बेटी अलाया एफ भी बॉलीवुड में अपना करियर बनाने आ गई हैं. उनकी पहली फिल्म जवानी जानेमन है जिसमें उन्होंने सैफ अली खान और तब्बू के साथ अपनी चुनौतीपूर्ण भूमिका अदा की है. मुंबई में अलाया ने नवीन कुमार के साथ बातचीत में अपनी फिल्म और अपने परिवार के बारे में जो कहा वो यहां पेश है-

आप जवानी जानेमन से करियर की शुरुआत कर रही हैं. कैसा महसूस कर रही हैं?

मैं बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड हूं और काफी नर्वस भी हूं. मैंने इस फिल्म का बहुत इंतजार किया है. इसके लिए मैंने बहुत मेहनत की है.

आपका रोल आपके मन के हिसाब से है या मार्केट के हिसाब से?

दोनों के हिसाब से. बहुत ही मजेदार फिल्म है. लेकिन माइंडलेस भी नहीं है. इमोशनल है, हैप्पी है, सब कुछ है. मेरा कैरेक्टर जो है वो मुझसे काफी मिलता जुलता है. जो मेरे लिए प्लस पाइंट है. क्योंकि, मेरी पहली फिल्म में दर्शक मेरे कैरेक्टर को ही नहीं बल्कि मुझे भी देख पाएंगे. सैफ अली खान, तब्बू और चंकी पांडे जैसे सीनियर ऐक्टर्स के बीच मैं सबसे जूनियर आर्टिस्ट हूं इस फिल्म में. सबके साथ मेरा बहुत अच्छा अनुभव रहा है.

सैफ अली खान के साथ आपका क्या रिलेशन है इस फिल्म में?

मैं उनकी बेटी हूं. उन्हें पता नहीं है कि उनकी एक बेटी है. एक दिन वो एक क्लब में होते हैं और उन्हें एक खूबसूरत लड़की दिखती है और उनके पास जाते हैं और हाय बोलते हैं. फिर पता चल जाता है कि वो लड़की उसकी बेटी है. उसके बाद जो कुछ होता है वो फिल्म में दिखेगा. बेटी की वजह से उनमें काफी बदलाव आता है.

आपके पास प्लस पाइंट है कि आप पूजा बेदी की बेटी हैं, कबीर बेदी और प्रोतिमा बेदी की नातिन हैं. दर्शक आपकी तुलना भी करेंगे. इसका कोई प्रेशर है आप पर?

मैं हमेशा खुद पर प्रेशर डालती हूं ताकि किसी और के प्रेशर से मुझे कोई तकलीफ न हो. दूसरे लोग मुझे प्रोत्साहित भी करते रहते हैं. फिर भी एक समय में प्रेशर आ जाता है. लेकिन मैं अपनी ऐक्टिंग पर फोकस करती हूं. मैं कैमरा के सामने कैसी दिख रही हूं, फ्रेम कैसा लग रहा है. मैं अच्छी ऐक्टिंग कर लूं, यह कोशिश होती है. अब दर्शकों पर है कि वो मुझे पसंद करते हैं या नहीं. उम्मीद तो है कि वो मुझे पसंद करेंगे. अगर नहीं भी करेंगे या नकारात्मक संकेत आया तो भी बस मैं अपना काम करूंगी.

आपने पहले ही फैसला कर लिया था कि आपको ऐक्टिंग ही करनी है?

मुझे डाइरेक्टर बनना था. न्यूयार्क में जब मैं डाइरेक्शन का कोर्स कर रही थी तब अचानक से मैंने अपना फैसला बदला और फिर ऐक्टिंग का कोर्स शुरू किया. मैंने मुंबई में भी ट्रेनिंग ली और चार साल बाद मैं ऑडिशन देने लगी. फिर मुझे जावानी जानेमन फिल्म मिली.

ऐक्टिंग के लिए मम्मी ने आपको अलग से कोई नुस्खा बताया?

मम्मी, पापा, नाना सबने मुझसे एक ही चीज कहा कि मेहनत करो. ईमानदारी से काम करो. और हमेशा तैयार रहो.

आपकी मम्मी बोल्ड ऐक्टिंग के लिए जानी जाती हैं. क्या फिल्म में आपका भी बोल्ड कैरेक्टर है?

देखिए, मेरा कैरेक्टर काफी स्वीट एंड इनोसेंट है. इंडिपेंडेंट है, मैच्योर है. यह थोड़ा ग्लैमरस है. लेकिन बोल्ड.. फिल्म देखिए.  

आप नई पीढ़ी की कलाकार हैं. आज तरह-तरह के सब्जेक्ट पर फिल्में बन रही हैं. आपके लिए फिल्मों के चयन में सब्जेक्ट का कितना महत्व होता है?

सच में सब्जेक्ट तो बहुत महत्वपूर्ण है. बॉलीवुड फिल्मों में मसाला होता है. लेकिन  उसमें भी सब्जेक्ट होता है. मुझे तो सब कुछ करना है. आज कल तो कंटेंट इज किंग. अगर स्क्रिप्ट अच्छी है तो अच्छी फिल्म बनेगी वर्ना अच्छी फिल्म बनेगी ही नहीं. बड़े से बड़े स्टार भी सब्जेक्ट के बिना चल नहीं पाते हैं. आज छोटी फिल्में भी कंटेंट के बल पर अच्छा बिजनेस करती हैं.

सैफ और तब्बू काफी सीनियर ऐक्टर हैं. उनके साथ जब आपने पहला सीन शूट किया तब आपका क्या रिएक्शन था?

शुरू में मैं बहुत घबराई हुई थी. लेकिन वो इतने अच्छे इंसान हैं और इतने बेहतरीन ऐक्टर्स हैं कि उन्होंने मुझे कभी ऐसा नहीं देखा कि हम सीनियर हैं और तुम जूनियर हो. तुम्हें कुछ नहीं आता है. हमेशा ऐसा था कि हमदोनों इस फिल्म में ऐक्टर्स हैं. और बस हम अच्छी ऐक्टिंग करने वाले हैं. और एक अच्छी फिल्म बनाने वाले हैं. एक पाइंट के बाद जरूरी है भूलने को कि ये सैफ सर हैं, ये तब्बू मैम हैं. मैंने यह कोशिश की कि ये हैं मम्मी और ये हैं पापा. और उन्होंने इसे आसान बनाया था.

आपके बारे में कहा जाता है कि आप बहुत सकारात्मक सोच वाली हैं. टैटू भी आपने हाथ पर बनाया है?

कोई इंसान पॉजिटिव हो सकता है तो क्यों नहीं. दुनिया में काफी सैडनेस हैं. बहुत कुछ इस दुनिया में होता है जो पोजेटिव नहीं है. तो क्यों न हमेशा चेहरे पर खुशी रखी जाए. हां, मैं खुद को पोजेटिव लोगों के बीच ही रखती हूं. निगेटिव तो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है.

आपके परिवार की पृष्ठभूमि जिस तरह की है वो आपके जीवन में बाधा बनती है या आप अपनी राह चलती हैं. जैसे आपकी मम्मी की लाइफ, कबीर बेदी की लाइफ मैं उसकी बात कर रहा हूं. वो आपको कहीं से तकलीफ पहुंचाती है?

परिवार है तो कुछ न कुछ होता रहता है. लेकिन हमारी फैमिली काफी हैप्पी और पोजेटिव है. मेरे मम्मी-पापा का डिवोर्स हुआ था. लेकिन मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मेरे मम्मी-पापा में डिवोर्स हो रहा है. दोनों बहुत खुश थे. दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे.

हैं अभी तक. मेरे पापा मेरे से बहुत क्लोज हैं. मेरी मॉम बहुत क्लोज हैं. मेरे पापा ने दोबारा शादी की थी, मैं उनसे बहुत प्यार करती हूं. उनके बच्चों से मैं बहुत ज्यादा प्यार करती हूं. जो भी उनकी लाइफ में होता है मैंने कभी भी उसे नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा है. सब खुश हैं तो मैं भी खुश हूं. अगर वो खुश नहीं हैं तो मैं खुश नहीं हूं.

लाइफ का गोल क्या है?

ऐक्टिंग के मद्देनजर अगर बात करूं तो मुझे बहुत अच्छा काम करना है. अलग-अलग तरह के रोल करने हैं. मुझे बहुत जिम्मेदार रोल मॉडल बनना है. आम जिंदगी में मुझे बस खुश रहना है.

किस तरह का रोल करना चाहती हैं?

बहुत लोग पूछते है यह सवाल. लेकिन ईमानदारी से कहूं तो मेरे पास इसका जवाब है ही नहीं. मुझे सब कुछ करना है. और मैं करूंगी.

बतौर हीरोइन आप कोई ऐसी फिल्म करना चाहेंगी जिसका निर्देशन आपकी मम्मी करें?

मम्मी डाइरेक्शन कहां से करेंगी. इसके लिए तो बहुत ट्रेनिंग लगता है. और यह मम्मी के लिए संभव नहीं है.

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