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अपनी औकात को ताउम्र याद रखना चाहते थे इरफान

इरफान खान इस दुनिया में नहीं रहे. मेरा ऐसा दोस्‍त चला गया, जिसे दि‍न में कॉल करो तो कहता था शूटिंग पर हॅं भाई, रात में बात करते है. ऐसा कभी नहीं हुआ कि रात में मैंने काल कि‍या हो. रात को घर पहुंच कर इरफान ही कॉल करता था. दुनिया इरफान को बतौर एक बेहतरीन एक्‍टर जानती है. वह जितने बड़े एक्‍टर थे, उससे कहीं बड़े मनुष्‍य थे

फोटोः इंडिया टुडे फोटोः इंडिया टुडे

राजेन्‍द्र शर्मा

इरफान खान इस दुनिया में नहीं रहे. मेरा ऐसा दोस्‍त चला गया, जिसे दि‍न में कॉल करो तो कहता था शूटिंग पर हॅं भाई, रात में बात करते है. ऐसा कभी नहीं हुआ कि रात में मैंने काल कि‍या हो. रात को घर पहुंच कर इरफान ही कॉल करता था. दुनिया इरफान को बतौर एक बेहतरीन एक्‍टर जानती है. वह जितने बड़े एक्‍टर थे, उससे कहीं बड़े मनुष्‍य थे

संघर्ष के दिनों में इरफान अपनी पत्‍नी सुतापा के साथ दिल्‍ली में द्वारिका में किराये के एक कमरे में रहते और नाटक किया करते थे. ऐसी स्थिति में कमरे का किराया तयशुदा समय पर अदा करना हर बार मुश्‍कि‍ल होता. एक बार तो तीन महीने गुजर गये कमरे के किराये की व्‍यवस्‍था ही नही पायी. मकान मालिक भला आदमी, पर किया क्‍या जायें.

हार-थककर एक दिन इरफान और सुतापा की गैर-मौजदूगी में मकान मालिक ने दिन में कमरे का ताला तोडा. सारे सामान को करीने से कोरोगोटिड बक्‍सों में पै‍क कर कमरे के बाहर रख ताला लगा दिया. रात में इरफान और सुतापा जब लौटे तो अवाक. मकान मालिक ने कहा कि तीन महीने का किराया भी माफ, बस आप मुझे मुक्‍त कीजिये. आपका सामान पैक करा दिया गया है, इसे ले जाइये.

इरफान और सुतापा दोनों परेशान. रात के दस बजे का समय. इस समय कहां जायें, क्‍या करें. इसी उधेडबुन में इरफान ने कथाकार उदय प्रकाश को फोन किया और अपनी व्‍यथा बताकर किराये पर कमरे की व्‍यवस्‍था करने का आग्रह किया. इरफान उदय प्रकाश की कहानियों के, कविताओ के दीवाने थे.

उदय प्रकाश की एक-एक कहानी पर, एक-एक कविता पर घंटों बात करने की कूव्‍वत रखते थे. उदय प्रकाश ने इरफान की बात सुनी और कहा कि रात के दस बजे किराये के कमरे की व्‍यवस्‍था कैसे हो सकती है. तुम एक काम करो, अपना सारा सामान ऑटो या टाटा 407 में लेकर वैशाली ( गाजियाबाद) में मेरे घर आ जाओ.

इस बीच इरफान से बात करने के बाद उदय प्रकाश ने अपनी पत्‍नी कुमकुम को सारी बात बताई. दोनों ने उसी समय विचार किया गया कि यहां आने के बाद दो-चार रोज में किराये का कोई कमरा मिल जायेगा तो महीने दो महीने बाद यही स्थि‍ति होगी. दोनों ने फैसला किया कि जब तक इरफान समर्थ नहीं हो जाता, तब तक क्‍यों न फलैट के ऊपर बनी बरसाती इरफान को रहने के लिए दे दी जाये, कम से कम किराये का झमेला तो नहीं रहेगा .

इरफान के पास उदय प्रकाश के प्रस्‍ताव को मानने के अलावा कोई विकल्‍प नही था. सारा सामान एक छोटे ट्रक में लादकर द्वारिका से इरफान और सुतापा वैशाली ( गाजियाबाद) आ रहे थे, उधर अपनी योजना के मुताबिक उदय प्रकाश और उनकी पत्‍नी झाडू लेकर बरसाती की सफाई कर रहे थे ताकि रहने लायक हो जाये.

कथाकार उदय प्रकाश की उस बरसाती में इरफान और सुतापा मुम्‍बई जाने तक रहे .

वर्ष 2012 में कथाकार उदय प्रकाश के जीवन के साठ साल पूरा करने पर सहारनपुर से प्रकाशित साहित्‍यि‍क पत्रिका शीतलवाणी ने उदय प्रकाश पर केन्द्रित अंक निकालने की योजना बनाई. इस विशेषांक के सिलसिले में उदय प्रकाश से कई बार हुई बातचीत में उदय प्रकाश ने इरफान खान का विस्‍तार से जिक्र करते हुए बताया कि इरफान बहुत उम्‍दा इंसान है. दिल्‍ली जब भी आता है, कितनी भी व्‍यस्‍तता क्‍यों न हो, उनके घर जरुर आता है.

उदय प्रकाश ने यह भी बताया कि उन्‍होंनें जितना लिखा है, वह सब इरफान ने पढा है. इस अंक के लिए इरफान से भी लिखवाया जा सकता है .

इरफान से फोन पर बात की गयी. बातचीत के प्रारम्‍भ में मैंने ही इरफान से कहा कि उदय प्रकाश आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे और बता रहे थे कि आप उनकी बहुत इज्‍जत करते हैं, दिल्‍ली आने पर उनके घर जरुर जाते हैं. यह सुनते ही इरफान ने एकदम यारबाशी वाले लहजे में कहा, "उदय प्रकाश जी की मैं बहुत इज्‍ज्‍त करता हूं, लेकिन मैं उनके घर इसलिए नहीं जाता कि मैं उनकी इज्‍जत करता हूं, दिल्‍ली आने पर हर बार मैं वैशाली जाकर उस बरसाती, जिसमें मैंने बहुत समय बिताया, को निहारता हूं. वह बरसाती मुझे मेरी औकात से बावस्‍ता कराती है, जिसे मैं ताउम्र याद रखना चाहूंगा."

उदय प्रकाश पर लेख लिखना है उन्‍हें. यह सुनकर बड़े साफ शब्‍दों में इरफान ने कहा था कि भाई, उदय प्रकाश मेरे हीरो हैं, उनकी एक-एक कहानी को मैंने सौ-सौ बार पढ़ा है पर लिखने के मामले में मेरा हाथ बहुत तंग है. तुम रिकॉर्ड कर लो, मैं जितना चाहो, बोल सकता हूं.

इस बातचीत के बाद उस समय आईबीएन 7 से जुडे पत्रकार धीरज सार्थक को उनसे बातचीत को रिकार्ड करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गयी. लगभग एक सप्‍ताह तक इरफान रात में डेढ बजे स्‍वयं फोन करते. उदय प्रकाश के लिक्‍खे के बारे में बेबाकी से बोलते. इधर धीरज सार्थक उसे रिकॉर्ड करते जिसे बाद में लिप्‍यांतरण कर शीतलवाणी के उदय प्रकाश पर केन्द्रित अंक में प्रकाशित किया गया.

(यहां व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं उनसे इंडिया टुडे की सहमति आवश्यक नहीं है)

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