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बेबाक

फोटोः राजेंद्र शर्मा

स्मृतिशेषः नहीं रहे गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल गुलजार देहलवी

13 जून 2020

देश के बडे उर्दू शायर गुलजार देहलवी 94 साल की उम्र में कोरोना को हराने के बाद शुक्रवार को जिंदगी से हार गए. पांच दिन पहले ही उन्होंने कोरोना को हराया था. गुलजार देहलवी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल थे और लोग कहते हैं कि संपूर्ण सिंह कालरा यानी गीतकार गुलजार ने अपना तखल्लुस उन्हीं से लिया है


आइसीएमआर के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव (फोटोः एएनआइ)

नजरियाः कोरोना का कहर के खिलाफ ढाल बना आइसीएमआर

11 जून 2020

कोरोना का कहर के खिलाफ ढाल बना आइसीएमआर, संस्थान को चिंता यही थी कि जानें बचायी जाएं, बता रहे हैं आइसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव


फोटो सौजन्यः यूट्यूब

कला और साहित्य के अद्भुत संगम हैं प्रयाग शुक्ल

28 मई 2020

लॉकडाऊन के दिनों में अपनी पुत्री के निधन से दुखी प्रयाग शुक्ल की रचनात्‍मकता में कही कोई कमी नहीं आई है. वे हर रोज रेखाकंन कार्य कर लॉकडाऊन का समय बिता रहे हैं.

फोटोः इंडिया टुडे

कोरोना संकट के दौर में परिवहन के लिए साइकिल मुफीद साधन है

23 मई 2020

कोरोना काल में साइकिल की सवारी सस्ती और सुलभ होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी मुफीद होगी. पर सरकारों ने नगर नियोजन में साइकिलों के बारे में बहुत कम सोचा है. चमक-दमक के पीछे भागने वाला भारतीय मध्य वर्ग वैसे भी साइकिलों पर चलना हेठी समझता है.

प्रतिनिधि तस्वीर

मदर्स डेः क्या आज की मां खुद को बच्चों के लिए कुर्बान करेगी?

10 मई 2020

50 से लेकर 90 के दशक तक माताएँ जिन्होंने एक कुर्बान जीवन जीकर सब कुछ सिर्फ अपने बच्चों के लिए किया या नई सदी की माताएँ जो अब ख़ुद के लिए भी सपने देखती हैं. भारतीय परंपरा में माताओं को यही सिखाया जाता है कि बच्चों को हमेशा ख़ुद से पहले रखना चाहिए. असल में यह सिखाया जाता है कि ख़ुद को भुलाकर बच्चों के लिए जीना चाहिए. पर क्या मैं, या मेरी तरह इस सदी की सैकड़ों अन्य माताएँ एक कुर्बान माँ बन पाएंगी?

फोटोः इंडिया टुडे

लॉकडाउन डायरीः कोरोना संकट छूटे और हासिल का हिसाब-किताब

10 मई 2020

कोविड-19 महामारी ने सभी को व्यक्तिगत या वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक अपनी गिरफ्त में ले लिया है - लोगों ने अपनी नौकरी खो दी, कई शादियां स्थगित कर दी गईं, यात्राएँ रुक गईं, मेल-मुलाकात बंद हो गई, घर-परिवार के दौरे छूट गए, बचपन घर की चहारदीवारी में कैद है. तो क्या हर तरफ शून्य है...केवल शून्य ! नहीं .


डेनामर्क में कोरोना संकट

लॉकडाउन डायरीः कोरोना संकट से यूं निपट रहा डेनमार्क

30 मार्च 2020

डेनमार्क की सरकार ने कोरोना प्रभावित फ्रीलांसरों और कलाकारों की भी सहायता की. कल्चरल मिनिस्ट्री ने गायकों, कलाकारों और लेखकों को उनके प्रोग्राम केंसल होने की वजह से जो उन्हें आर्थिक हानि हुई, उसकी भरपाई की। रेडियों और टीवी चैनलों को आदेश दिए गये कि केवल स्थानीय कलाकारों के ही कार्यक्रम प्रस्तुत करके उन्हें प्रमोशन दे.

कोरोना संकट

लॉकडाउन डायरीः जीवन स्थायी है तो अपनी ऊर्जा जिंदगी को दें

06 मई 2020

जीवन मृत्यु से बिंधा हुआ है. हर क्षण हम मृत्यु से मिल रहे हैं. हम और हमारे प्रिय सभी. पर इन दो अवस्थाओं के एक साथ हमसे मुख़ातिब होते हुए भी हमें जीवन से संवाद स्थापित करना है. हमें अपना चुनाव सावधानी से करना है. क्योंकि मृत्यु शायद विचारों की ही तरह क्षणिक है. वह आती है, जाती है. जीवन स्थाई है. तुम्हारा या मेरा जीवन नहीं, पर जीवन स्थाई है.

गिरिजा देवी और उनकी शिष्या सुनंदा

ठुमरी क्वीन गिरिजा देवी को ऐसे मिली थी उनकी सबसे प्रिय शिष्या, सुनंदा

01 मई 2020

शास्त्रीय संगीत की साम्राज्ञी पदम विभूषण गिरिजा देवी बताया करती थीं कि उनके गुरु सरजू प्रसाद मिश्रा ने दीक्षा के समय गंगा जल हाथ में लेकर सौगन्ध दिलाई थी कि वह अपना ज्ञान उसे ही देंगी जो पात्र होगा.गिरिजा देवी अक्सर कहती थीं सारा जीवन संगीत को ही ओढ़ना बिछाना ,खाना पीना समझ कर जिया. अब भला उसे किसी ऐरे गैरे को क्यों दूं.

फोटोः इंडिया टुडे

स्मृतिशेषः आखिरी पल में भी हंसाते रहे ऋषि

30 अप्रैल 2020

'मेरा नाम जोकर' का युवा राजू (ऋषि कपूर) जीवन के आखिरी पल में भी अपने आस पास के लोगों को हंसाता रहा. जिंदादिल जिंदगी जीने का मंत्र देने वाले 'मुल्क' के इस ऋषि को हंसते हुए विदा करने की बात उनके परिवार के लोगों ने भी की. यह सच है कि ऋषि के शरीर के अंदर वो राजू आखिरी समय तक था और उसी राजू ने उनसे कहलवाया कि जिंदगी का शो अभी भी जारी है.

फोटोः इंडिया टुडे

अपनी औकात को ताउम्र याद रखना चाहते थे इरफान

29 अप्रैल 2020

इरफान खान इस दुनिया में नहीं रहे. मेरा ऐसा दोस्‍त चला गया, जिसे दि‍न में कॉल करो तो कहता था शूटिंग पर हॅं भाई, रात में बात करते है. ऐसा कभी नहीं हुआ कि रात में मैंने काल कि‍या हो. रात को घर पहुंच कर इरफान ही कॉल करता था. दुनिया इरफान को बतौर एक बेहतरीन एक्‍टर जानती है. वह जितने बड़े एक्‍टर थे, उससे कहीं बड़े मनुष्‍य थे