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विराट कोहली है क्रिकेट का नया दबंग!

वन डे की अपनी ताबड़तोड़ पारियों से दिल्ली के विराट कोहली ने क्रिकेट की दुनिया में मचाया कोहराम. दुनिया के कई गेंदबाजों की नींद हराम. क्या वे होंगे भारत के नए कप्तान?

विराट कोहली विराट कोहली

एशिया कप के लिए ढाका पहुंचने के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा कई घंटे तक पाकिस्तानी फिरकी गेंदबाज सईद अजमल के वीडियो देखते रहे. इस चक्कर में उन्होंने दिन का खाना और एक अभ्यास सत्र भी छोड़ दिया.

जब 18 मार्च को पाकिस्तानी क्रिकेटरों ने ड्रेसिंग रूम में इकट्ठा होकर अपने पूर्व कोच बॉब वूल्मर को याद करते हुए विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत के हाथों हुई हार का बदला लेने की कसम खाई, तो कोहली ने शर्मा के कान में चुपके से कहा, ‘हमने तो (इस मैच के लिए) अपना होमवर्क कर लिया है.’ लेकिन पाकिस्तान ने जब 329 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया तो कप्तान महेंद्र सिंह धोनी समेत दूसरे खिलाड़ियों को भी एहसास हो गया कि लक्ष्य उतना आसान नहीं. ऊपर से जब सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर पारी की दूसरी ही गेंद पर पगबाधा आउट होकर बिना खाता खोले लौट पड़े तो उस वक्त स्टेडियम में पसरा खौफनाक सन्नाटा अपने आप में बहुत कुछ बयान कर रहा था.

लेकिन यहीं विश्व क्रिकेट का एक ऐतिहासिक पल आकार ले रहा था. दूसरे छोर पर खड़े क्रिकेट के 'भगवान' सचिन तेंडुलकर का साथ देने उतरे, दिल्ली के 23 वर्षीय युवा क्रिकेटर कोहली. भारत का खाता खुले बगैर एक विकेट गिर जाने के बावजूद वे स्थितियों से बिल्कुल प्रभावित नहीं हुए. उनके प्रेरणास्त्रोत और विकेट पर जोड़ीदार तेंडुलकर पिछले मैच में शतकों का शतक पूरा कर चुके थे, हालांकि भारत वह मैच बांग्लादेश से हार गया था. लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ उस मैच में दोनों ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.

शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम पर कोहली के दनदनाते 183 रनों ने पाकिस्तान के जबरदस्त हमले को तार-तार कर डाला. एकदिवसीय मैचों में लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की यह सबसे बड़ी जीत थी. कोहली ने तेंदुलकर से मिले उस खिताब को सार्थक कर दिया, जिसमें उन्होंने उन्हें 'मास्टर ऑफ  द चेज' यानी पीछा करते हुए लक्ष्य हासिल करने में उस्ताद खिलाड़ी कहा था. बांग्लादेश में कोहली का यह चौथा शतक था.

यह भी जानना दिलचस्प होगा कि कोहली की पूरी पारी के दौरान मास्टर ब्लास्टर टीम के ड्रेसिंग रूम में एक ही जगह पर जमे बैठे रहे. पाकिस्तान के खिलाफ मैचों के दौरान उनके अपनाए जाने वाले अंधविश्वास क्रिकेट के इतिहास की दिलचस्प किंवदंतियां बन  चुके हैं.

एक बार तो वे मैच के दौरान पूरे समय नहाते रहे और हरभजन सिंह से लगातार कमेंट्री सुनते रहे. यह लाहौर में हुए एक वन डे की बात है, जिसमें भारत जीता था. लेकिन इस बार क्रिकेट के नए पोस्टर ब्वॉय में उनकी आस्था को भारत-पाकिस्तान मुकाबले के स्थल मीरपुर में सबने अपनी आंखों से देखा और सराहा.

इस धमाके के बावजूद भारतीय टीम एशिया कप के फाइनल में नहीं पहुंच पाई. पर यह टूर्नामेंट कोहली के एक परिपक्व और आधुनिक क्रिकेटर में तब्दील होने की कहानी तो लिख ही गया. भारत की एकदिवसीय टीम के नए उप-कप्तान की कामयाबी की कहानी आंकड़े भी बयां करते हैं. लक्ष्य का पीछा करते हुए खेली गई 48 पारियों में कोहली के रनों का औसत 58.40 रहा है. इसमें उन्होंने सात शतक और 13 अर्द्धशतक लगाए हैं. तभी तो उन्हें दुनिया के सर्वश्रष्ठ एकदिवसीय खिलाड़ी का तमगा भी मिल चुका है.

दिल्ली की रणजी टीम में कोहली के साथ खेल चुके मिथुन मिंहास उनके इस फौलादी जज्‍बे से परिचित हैं. वे कहते हैं, ‘उसके दृढ़ संकल्प पर तो कोई सवाल उठा ही नहीं सकता.’virat kohli

दिसंबर, 2006 में कर्नाटक के खिलाफ  दिल्ली में एक रणजी मैच के दौरान विराट के वकील पिता प्रेम कोहली की तड़के तीन बजे मौत हो गई. पिछली शाम वे नॉटआउट रहे थे. अगली सुबह बल्लेबाजी करके दिल्ली को हार से बचाने के लिए उन्होंने पिता की अंत्येष्टि को टाल दिया. मिथुन बताते हैं, ‘विराट ने उस समय 90 रन बनाए थे. हम सबने उससे पूछा कि क्या वह मैच छोड़कर अंत्येष्टि में जाना चाहेगा? उसने सीधे मना कर दिया और पैड डाल लिए. वह दरअसल आउट देने के अंपायर के फैसले से नाराज था और उससे बहस करने के मूड में था.’

कइयों का दावा है कि उस घटना ने कोहली को बदल दिया. दो साल बाद कोहली ने 19 वर्ष से कम उम्र के विश्वकप में भारतीय टीम को जीत दिलाई और पूरी तरह क्रिकेट में डूब गए. पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी कहते हैं, ‘उसने खुद को खेल में झेंक दिया. चमक-दमक से दूर रहते हुए वह सिर्फ  क्रिकेट खेलता था.’

पूर्व भारतीय चयनकर्ता यशपाल शर्मा ने कोच राजकुमार शर्मा के साथ कोहली को करीब से देखा है. वे मानते हैं कि कोहली भारतीय क्रिकेट के नए वंडर ब्वॉय हैं: ‘वह एक नए तेंदुलकर जैसा है. उसे बिना तराशा हुआ युवी या सहवाग भी कह सकते हैं. उसकी बल्लेबाजी की ताकत गजब की है.’ कोहली अपने खेल में लगातार परिपक्व हो रहे हैं. और, जैसा कि पूर्व चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर कहते हैं कि बल्लेबाजी की उसमें जबरदस्त प्रतिभा है. हालांकि, पहले वे लेग साइड पर ही शॉट्स खेलते थे. मैदान के चारों ओर स्ट्रोक्स लगाने में खुद को सक्षम बनाकर वे भारतीय टीम में मध्यक्रम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बन गए हैं.

क्रिकेट के जानकारों ने उन पर एकदिवसीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज की मुहर पहले ही लगा दी है. क्रिकेट के दीवाने देश भारत में लोगों को उनका आक्रामक रवैया और युवा चेहरा पसंद है. इसके जरिए वे कप्तानी की कुर्सी तक आसानी से पहुंच सकते हैं. रॉयल चैलेंजर्स बंगलुरू ने तो उन्हें आइपीएल टीम का मैस्कट बना दिया है. कोहली ने ही 2009 और 2010 में फाइनल में जगह दिलाई. और 2011 के चैंपियंस लीग ट्वेंटी-20 में टीम को फाइनल की राह दिखाई.Rohit Sharma

पिछले तीन महीनों से जीत और रनों की भूखी भारतीय क्रिकेट टीम में उनके पावर गेम ने नई जान फूंकी है. विज्ञापन की दुनिया में उनका जादू दिखना शुरू हो गया है, जहां उनकी कीमत बांग्लादेश में हुए ताजा खेल के बाद 3 करोड़ को पार कर गई है. 

हमला ही ताकत

टिककर आक्रामक होना कोहली का फंडा है

यह छोटे कद का विराट खिलाड़ी क्रिकेट की दुनिया में बुलंदियों की ओर बढ़ रहा है. विराट के रन जीत की गारंटी बन गए हैं. हालात कितने ही मुश्किल क्यों न हों, विराट अगर क्रीज पर हैं तो नो टेंशन. होबॉर्ट (ऑस्ट्रेलिया) में 86 गेंदों पर 136 रनों का तूफान, मीरपुर में पहले श्रीलंका और फिर पाकिस्तान की धुलाई, एक महीने से भी कम समय में एक-दो नहीं, तीन बड़ी पारियां खेल चुके हैं विराट.  अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वही खिलाड़ी कामयाब है जो अच्छे प्रदर्शन का सिलसिला बनाए रखे और टीम को मैच जिताए. दोनों ही पैमानों पर 23 साल के विराट खरे उतरते हैं.

दबाव में साधारण खिलाड़ी बिखर जाते हैं लेकिन बड़े और भी निखर जाते हैं. विराट दूसरी श्रेणी में आते हैं, जितने मुश्किल हालत उतनी ही दमदार बल्लेबाजी. ऑस्ट्रेलिया में सीबी सीरीज के अपने आखिरी लीग मैच में टीम इंडिया को बोनस प्वाइंट के साथ जीत की दरकार थी, शुरुआती झटके के बाद विराट आए और शुरू कर दी रनों की बरसात, किसी ने भी नहीं सोचा था कि विराट नाम के इस तूफान के आगे श्रीलंकाई गेंदबाज इस तरह बेबस हो जाएंगे.virat girlfriend

डेथ ओवर्स में अपनी यॉर्कर गेंदों के लिए जाने जाने वाले श्रीलंका के लसित मलिंगा जैसे गेंदबाज तो धुलाई के बाद अब भी सदमे में हैं. एशिया कप में उसी तरह से पाकिस्तान की पेस बैटरी उनके हत्थे चढ़ गई. लेकिन दोनों ही मौकों पर फाइनल में न पहुंचने की कसक रह गई.

पिछले साल विश्वकप जीतने के बाद से टीम इंडिया का ग्राफ नीचे गिर रहा है लेकिन कोहली का ग्रॉफ उतार-चढ़ाव देखने के बाद अब ऊपर की ओर बढ़ रहा है. यह सब उनके लिए इतना आसान नहीं था. वेस्टइंडीज में मुश्किल टेस्ट सीरीज के बाद उनके संभावित 11 में होने पर ही सवाल पूछे जाने लगे थे. इंग्लैंड के दौरे पर भी निरंतरता नहीं दिखी.

हालांकि सेंचुरी उन्होंने जरूर लगाई. जब वेस्ट इंडीज भारत आया तो एक नया ही विराट देखने को मिला, एक ऐसा बल्लेबाज जिसने अपनी गलतियों से सबक लिया था और उन्हें न दोहराने का दृढ़ निश्चय किया था. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट सीरीज में इकलौती सेंचुरी विराट ने ही लगाई.

अपने शानदार फॉर्म के दम पर विराट ने एशिया कप में मीरपुर के साथ अपना रिश्ता और भी गहरा कर लिया. मीरपुर में खेले पिछले 4 मैचों में से वे 3 में शतक लगा चुके हैं. तभी तो मीरपुर को वे अपना लकी ग्राउंड बताते हैं, ‘यह ग्राउंड मेरे लिए स्पेशल है. मुझे भी यहां बल्लेबाजी करना बहुत अच्छा लगता है.’ पाकिस्तान के खिलाफ बल्ला अकसर दगा दे जाता था लेकिन एशिया कप में ये शिकायत भी दूर हो गई. वे कहते हैं, ‘पाकिस्तान के खिलाफ इंतजार करना पड़ा. खुशी है कि सेंचुरी के साथ यह इंतजार भी खत्म हुआ.’

लेकिन टीम में गौतम गंभीर के रहते विराट को उप-कप्तानी? क्या इतनी कम उम्र में उन्हें यह जिम्मेदारी देना सही फैसला है? क्या चयनकर्ता उन्हें भावी कप्तान के तौर पर तैयार कर रहे हैं? ये वे तमाम सवाल थे, जिनका जवाब विराट ने अपने बल्ले से दिया. एशिया कप में उनका धमाल यह बताने के लिए काफी है कि अब वे हर जिम्मेदारी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं.

पिछले 4 साल में बल्लेबाज के तौर पर वे खासे परिपक्व हो चुके हैं. उनके पास टेंपरामेंट भी है और तकनीक भी. ऑस्ट्रेलिया हो, इंग्लैंड या फिर एशियाई उप-महाद्वीप, विराट हर कंडीशन में रन बनाने में सक्षम हैं. उनमें चौके-छक्के जड़ने का 'नर है तो पारी को संवारने की काबिलियत भी. यही वजह है कि वे यंग ब्रिगेड का सबसे कामयाब चेहरा हैं. वन डे में विराट के बनाए गए 11 शतकों में से 10 में टीम इंडिया जीती है.

हमला विराट की ताकत है, तो कभी-कभी कमजोरी भी. विरोधी पर जबानी हमले करने हों या फिर उनके सेलिब्रेशन, उन्हें सुर्खियों में ले ही आते हैं. यही वजह है कि जानकार उन्हें अपनी आक्रामकता को काबू में रखने की सलाह देते हैं.

ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर कुछ प्रशंसकों के ताना मारने पर विराट इतना बिफर गए थे कि मर्यादा भी भूल गए. ऐसे हालात में कैसे संयम रखना है, अब यही विराट को सीखना है. वे कोशिश भी करते दिखते हैं. एशिया कप में वे काफी रिलैक्स दिखे, हर वक्त हंसते, मजाक करते हुए. म्युजिक सुनना और किताबें पढ़ना उन्हें बेहद पसंद है. टेनिस के शीर्ष खिलाड़ी रहे आंद्रे अगासी की आत्मकथा ओपन विराट की सबसे पसंदीदा किताब है.

टीम इंडिया के जिस भी बल्लेबाज ने 183 रन की पारी खेली, वह कामयाब कप्तान साबित हुआ. पहले सौरव गांगुली और फिर महेंद्र सिंह धोनी. तो क्या वे भी संभावित सफल कप्तानों की सूची में शामिल होने वाले हैं? उनके आदर्श तेंडुलकर स्पष्ट करते हैं, ‘वे बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं लेकिन उन पर अभी से बहुत दबाव नहीं डाला जाना चाहिए.’ जाहिर है, उन्हें अभी कई और इम्तहान देने होंगे.

अदिति त्यागी आजतक चैनल में विशेष संवाददाता हैं.

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